वॉशिंगटन डायरी: आईएस को इबोला से ख़तरा

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
मौसम बदलना प्रकृति का शाश्वत सत्य है. ये बात अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन पर भी लागू होती है. लेकिन वहां सर्दी, गर्मी पतझड़ वगैरह के साथ ही कुछ और तरह के मौसम भी होते हैं जो समय-समय पर बदलते हैं.
इन दिनों वॉशिंगटन में इबोला का मौसम है. इसकी ऐसी धूम है कि इबोला के झुमके, नेकलेस और टीशर्ट बेचे जा रहे हैं.
वॉशिंगटन के इस मौसम पर ब्रजेश उपाध्याय की डायरी.
वॉशिंगटन डायरी
वॉशिंगटन में मौसम बदल चुका है. पत्ते रंग बदलने लगे हैं.
गर्मी झांसा ज़रूर दे देती है. कभी-कभी चटक धूप के ज़रिए अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाकर कहती है मैं अभी खत्म नहीं हुई.
लेकिन दरवाज़े से बाहर निकलते ही हवा की खुनकी उस दावे को झुठला देती है.
एक हफ़्ता और गुज़रेगा, बचे-खुचे हरे पत्ते लाल-पीले रंगों में सराबोर हो जाएंगे और फिर कुछ ही दिनों में हमेशा के लिए पेड़ का साथ छोड़ देंगे ज़मीन को चूमने के लिए. पेड़ मातम के माहौल में चले जाएंगे.
लेकिन ये तो हर साल की रूटीन है. अगले साल और फिर उसके अगले साल भी कुछ ऐसा ही होगा.
बदलते मौसम
लेकिन वॉशिंगटन के असली मौसम के बारे में शायद ही कोई इतना यकीन से कुछ कह सके. जिस तेज़ी से बिना किसी वॉर्निंग के वो बदलता है उस तेज़ी से तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता. कहां से आएगा, कहां को जाएगा, इसकी किसी को भनक नहीं होती.

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चार-पांच साल पहले जब मैं यहां था तो यहां उन दिनों पाकिस्तान का मौसम था. कांग्रेस में पाकिस्तान, व्हाइट हाउस में पाकिस्तान, थिंक टैंक में पाकिस्तान, अख़बारों में पाकिस्तान, किताब की दुकानों में पाकिस्तान. काफ़ी लंबा चला था वो मौसम.
लेकिन ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तान और दुनिया क्या छोड़ी, अमरीका से पाकिस्तान का मौसम ही लेकर चले गए.
दो हफ़्ते पहले मोदी का मौसम आया था. कौन है मोदी, क्या है मोदी, क्या देगा मोदी, क्या लेगा मोदी—मौसम का हर रंग वॉशिंगटन में नज़र आ रहा था. अब वो भी खत्म हुआ.
अब तो जो मौसम पूरी जवानी के साथ उतरा है वॉशिंगटन में वो है इबोला का मौसम. सुबह अच्छा-भला उठता हूं लेकिन अख़बार और टीवी देखने के बाद जब घर से बाहर निकलता हूं तो हर इंसान को घूर रहा होता हूं कि कहीं उसे इबोला तो नहीं है.
सुना है स्कूल में बच्चे किसी को खांसता हुआ सुनते हैं तो एक साथ आवाज़ लगाने लगते हैं इबोला-इबोला.
'होला इबोला'

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कल तक यहां आइसिस यानि इस्लामिक स्टेट से ख़तरे का मौसम था.
बरसाती मेंढ़कों की तरह हर कोने से विश्लेषक बाहर निकल आए थे हज़ारों मील दूर चल रही लड़ाई से अमरीकी होमलैंड को सुरक्षित करने के उपाय बताने.
बेचारे इस्लामिक स्टेट को आज अगर सबसे ज़्यादा किसी से ख़तरा है तो वो इबोला से. अंदर के पन्नों पर धकेला जा चुका है. ये हालात रहे तो पूरे अख़बार से ही बाहर हो जाएगा.
चले थे पूरी दुनिया पर राज करने और एक छोटे से कीड़े ने औकात बता दी!
इबोला झुमके-टीशर्ट
इतने बड़े मुल्क अमरीका में अभी तक तीन लोगों के बारे में पता है कि उन्हें इबोला हुआ है. लेकिन टीवी कवरेज देखकर, कांग्रेस में इस मामले पर चल रही सुनवाई देखकर, ओबामा के बयान सुनकर लग रहा है जैसे ये अमरीका नहीं अफ़्रीका हो.
और इस जुनून में सारे अफ़्रीका को भूल ही गए हैं जहां हर रोज़ हज़ारों इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. अगर कुछ ऐसी ही तैयारी वहां करवा देते और इबोला को अफ़्रीका में ही रोक देते तो कुछ भला होता.
इबोला के मौसम की ऐसी धूम है कि एक कंपनी ने इबोला के झुमके, इबोला के नेकलेस और यहां तक कि इबोला की तस्वीर वाले डिनर प्लेट्स बेचने शुरू कर दिए हैं. टीशर्ट पर लिखा हुआ है “होला इबोला” यानि हेलो इबोला.
अब तो बस देखना है कि ये मौसम और कितने दिन चलेगा और अगला मौसम क्या लेकर आएगा.
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