कैलाश को बधाई देता पाक तो क्या हो जाता!

- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
सिवाए उनके जिन्हें किसी भी हाल में ख़ुश रहना नहीं आता और जिनकी क़िस्मत में ही 'हाय बावेला' लिखा हुआ है, सब ख़ुश हैं.
आज ही मुझे फ़िज़िक्स में नोबेल पुरस्कार लेने वाला अब्दुस सलाम पाकिस्तानी याद आ रहा है जिसने इटली के 'ट्राइस्ट फ़िज़िक्स इंस्टीट्यूट' में अपने देश के बच्चों के लिए बहुत से स्कॉलरशिप मंज़ूर करवा कर रखे थे लेकिन कोई नहीं गया.
जाना भी चाहता होगा तो माता-पिता ने अपनी इच्छा या किसी डर से नहीं भेजा होगा.
डॉक्टर सलाम एक साइंटिस्ट मगर अहमदिया, एक पाकिस्तानी मगर अहमदिया, एक इंसान मगर अहमदिया थे.
आज वो रबवाह शहर की जिस क़ब्र में दफ़न हैं, उसके ऊपर लगी तख्ती में अंग्रेज़ी में प्रोफेसर अब्दुस सलाम तो लिखा है, पर 'अ ग्रेट मुस्लिम साइंटिस्ट' में से 'मुस्लिम' अक्षर किसी ईमान वाले ने खुरच डाला है.
'आई एम मलाला'

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और डॉक्टर सलाम की बिरादरी में इतना साहस नहीं कि नई तख़्ती लगा सके.
हां, मलाला पाकिस्तान की बेटी है मगर कैसी बेटी है जो आज भी जान के ख़ौफ़ से घर नहीं आ सकती है.
हां, मलाला ने पाकिस्तान का सिर ऊंचा कर दिया है, मगर मलाला की जीवनी- 'आई एम मलाला', कोई बुकशॉप वाला काउंटर पर सजा के तो दिखा दे.
हां, मलाला बहादुर हीरोइन है मगर जिस स्वात में वो जन्मीं, वहां पिछले साल ही एक कॉलेज का नाम 'मलाला डिग्री कॉलेज' नहीं रखा जा सका.
छात्र और छात्राएं कहती हैं कि तालिबान बम से उड़ा देंगे.
नोबेल पुरस्कार

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लेकिन अब तो सरकार के अनुसार तालिबान तितर-बितर हो गए हैं, चलो अब सरकार अपनी पाकिस्तानी बेटी के नाम पर किसी सड़क का नाम रख दे, कोई डाक टिकट ही छाप दे.
ये कैसी बेटी है जो बहादुर भी है मगर अकेली.
मुझे ख़ुशी है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और गृह मंत्री चौधरी निसार अली ने चेतावनी दी है कि भारत 'लाइन ऑफ़ कंट्रोल' पर अंधाधुंध गोलीबारी से बाज़ आ जाए वरना मामला बहुत बिगड़ जाएगा.
साथ ही उन्होंने मलाला को नोबेल पुरस्कार मिलने पर बहुत-बहुत बधाई दी है.
यार मोदी जी का तो मैं कुछ नहीं कर सकता पर आप तो ये कर सकते हैं कि भारत सरकार को एक तगड़ी चेतावनी देने के साथ-साथ कैलाश सत्यार्थी को भी थोड़ी सी बधाई दे देते.
पुरानी जंग

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कैलाश ना तो कोई सेनाधिकारी हैं ना मुंह से शोले उगलने वाला कोई नेता या मंत्री.
अरे वही अपना कैलाश सत्यार्थी जो दस दिसम्बर को मलाला के हमक़दम होकर नोबेल पुरस्कार लेगा और पूरा समारोह दक्षिण एशिया के इन ख़ूबसूरत लोगों के नाम पर छततोड़ तालियां बजाएगा.
ऐ दिल्ली और इस्लामाबाद वालों तुम्हीं इतनी सी बात समझ नहीं आ रही तो बड़े होकर क्या करोगे.
बीबीसी की सीनियर रिपोर्टर लिज़ डूसट ने कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफ़जई को नोबेल पुरस्कार मिलने पर क्या अच्छा ट्वीट किया है, "मलाला और कैलाश भविष्य की जंग लड़ रहे हैं, मगर उनके पाकिस्तान और भारत अभी तक एक घिसी-पिटी पुरानी जंग में उलझे हुए हैं."
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