स्कॉटलैंड को ब्रिटेन में बनाए रखने की कोशिश

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स्कॉटलैंड को स्वतंत्रता मिले या नहीं, इसे लेकर वहाँ एक जनमत संग्रह होने वाला है. ब्रिटेन के नेता इस सिलसिले में वहाँ जा रहे हैं, जिससे वह लोगों को आज़ादी की माँग का समर्थन न करने के लिए मना सकें.
आज़ादी के समर्थक 'यस वोट' और विरोधी 'नो वोट' के लिए लोगों से अपील कर रहे हैं.
स्कॉटलैंड जाने के लिए प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और लेबर पार्टी के नेता एडवर्ड मिलिबैंड ने अपना साप्ताहिक कार्यक्रम रद्द कर दिया है. उप प्रधानमंत्री निक क्लेग भी स्कॉटलैंड में प्रचार करेंगे.
स्कॉटलैंड के फ़र्स्ट मिनिस्टर एलेक्स सैलमंड ने इन तीनों नेताओं को ब्रितानी सरकार के अब तक के सबसे अविश्वसनीय नेताओं में से बताया है. उन्होंने दावा किया कि इनके दौरे से 'यस वोट' को बढ़त मिलेगी.
बहस की चुनौती
वैसे सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव पार्टी, उसकी सहयोगी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी लेबर पार्टी के नेता एक साथ न तो यात्रा करेंगे और न किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे.

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इन नेताओं ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा है, ''हमारे बीच बहुत से मुद्दों पर मतभेद है. लेकिन एक चीज है जिस पर हम एक हैं, वह है यूनाइटेड किगंडम. हम एक साथ ही अच्छे हैं.''
मंगलवार को इस बारे में आए एक जनमत सर्वेक्षण में दोनों पक्षों को लगभग बराबर का समर्थन दिखाया गया है. इसके बाद ही इस यात्रा की घोषणा की गई है.

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बयान में कहा गया है, ''हम बड़े विकल्पों के बारे में मतदाताओं से बातचीत करना चाहते हैं और उनकी बात सुनना चाहते हैं. स्कॉटिश लोगों के लिए हमारा साधारण संदेश यह है, हम चाहते हैं कि आप साथ (ब्रिटेन में) रहें.''
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