वो 'शैतान' के नाम पर लोगों को मार डालते हैं!

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चीन में पिछले दिनों एक महिला की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. जांच में पता चला कि हत्यारे एक प्रतिबंधित संप्रदाय से थे.
मई में एक प्रतिबंधित समुदाय के कुछ लोग एक रेस्तरां में आते हैं और एक महिला को पीट-पीटकर मार डालते हैं. महिला की ग़लती सिर्फ़ इतनी है कि वो इन लोगों को अपना टेलीफ़ोन नंबर नहीं देती.
यह संप्रदाय ख़ुद को 'चर्च ऑफ़ द ऑल्माइटी गॉड' कहता है और लाखों सदस्य होने का दावा करता है.
घटना मैकडोनल्ड जैसे भीड़भाड़ वाले रेस्तरां में हुई, जहां छह लोग अपने संप्रदाय में नए लोगों को शामिल करने के लिए आए थे और फ़ोन नंबर न मिलने पर उसे मार डाला.
घटना सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल फ़ोन में क़ैद हो गई, मगर हत्यारों को इसका कोई गिला नहीं है.
'शैतान' मारने का दावा
जेल में इन छह लोगों में से एक झांग लिडांग ने कहा, ''मैंने पूरी ताक़त से उसे मारा. वह 'शैतान' थी. हमें उसे ख़त्म करना ही था.''

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'चर्च ऑफ द ऑल्माइटी गॉड' के मुताबिक़ भगवान एक महिला के रूप में पृथ्वी पर हैं. जो इस 'भगवान' से अपना सीधा संपर्क बताते हैं वह संप्रदाय के मुखिया झाव वीशान हैं, जिन्होंने 25 साल पहले संप्रदाय की नींव रखी थी.
वीशान भैतिकी के शिक्षक थे और अब अमरीका में हैं. पर कहां, किसी को नहीं पता.
1970 तक कम्युनिस्ट चीन में सभी धर्मों पर पाबंदी थी और अभी भी चीन में धार्मिक आज़ादी बहुत कम है.

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'चर्च ऑफ द ऑल्माइटी गॉड' की वेबसाइट पर हत्याओं, मारपीट और चाकूबाज़ी का कोई ज़िक्र नहीं, जिसके लिए वो अपने सदस्यों को उकसाते हैं.
संप्रदाय का दावा है कि पिछल तीन साल में उसके चार लाख अनुयायी गिरफ़्तार किए गए हैं.
इस संप्रदाय के कारण कई परिवार टूटे भी हैं. वो अपना नाम नहीं बताना चाहते.
ऐसे ही एक व्यक्ति ने नाम उजागर न करते हुए बताया, ''यह संप्रदाय परिवार विरोधी, मानवता विरोधी और सरकार विरोधी है. यह लगातार अपने सदस्यों को ट्रेनिंग देता है कि वो अपने परिवार से झूठ बोलें. जो अपना परिवार छोड़ देता है, उसे संप्रदाय में ऊंची जगह मिलती है.''

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बीजिंग यूनिवर्सिटी के पास एक चर्च में यह चेतावनी टंगी है कि लोग इस संप्रदाय से दूर रहें.
ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब किसी बेटी ने पिता की या बेटे ने पिता की हत्या कर दी थी.
चीन के परिवार इस संप्रदाय से ख़ौफ़ज़दा हैं पर सरकार ने इसके ख़िलाफ़ अभी तक कड़ाई नहीं बरती है. यह संप्रदाय कम्युनिस्ट पार्टी का भी विरोध करता है.
चूंकि यह संप्रदाय कोई राजनीतिक आंदोलन खड़ा नहीं कर सकता और मूलत: परिवारों पर निशाना साधता है, शायद इसलिए ही चीन सरकार इनके ख़िलाफ़ कोई बहुत कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही.
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