इराक़: मिली जुली सरकार का प्रस्ताव ख़ारिज

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इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने शिया सुन्नी एकीकृत सरकार की मांग को सिरे से नकार दिया है.
प्रधानमंत्री ने आगाह किया है कि इस तरह की मांग का मतलब है "संविधान के खिलाफ़ तख्तापलट और लोकतंत्र को चुनौती."
अमरीका ने देश के राजनेताओं से गुजारिश की है कि वे सांप्रदायिक और जातिगत मतभेद से उपर उठें और एकजुटता का प्रदर्शन करें.
मिली जुली सरकार के गठन को सुन्नी जिहादियों के खिलाफ़ जनता को एकजुट करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा था.
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने बुधवार को कहा था कि इराक़ संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है.
अमरीकी सैन्य सलाहकार
सरकारी सेना उन इलाकों पर कब्ज़ा पाने में असफल रही है जिन्हें चरमपंथियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है.
इराक़ी सुरक्षा बलों की मदद के लिए 300 अमरीकी सैन्य सलाहकारों की टीम के आधे लोग वहां पहुंच चुके हैं.

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इस बीच ब्रसेल्स में इराक़ को लेकर नेटो नेताओं के बीच बातचीत हो रही है. जॉन केरी भी इसमें शामिल हैं.
वो बग़दाद और इरबिल के दो दिवसीय दौरे से तुरंत लौटे हैं.
'खतरनाक लक्ष्य'

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अपने साप्ताहिक टेलीविजन संबोधन में नूरी मलिकी ने 'सभी राजनीतिक ताकतों को कहा कि वे एकजुट हों' और 'चरमपंथियों के हिंसक हमले" का मुकाबला करें.
लेकिन शिया प्रधानमंत्री ने सरकार में अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय की अधिक भागीदारी के बारे में कोई वादा नहीं किया. मलिकी पर सुन्नी समुदाय के खिलाफ भेदभाव बरतने का आरोप लगता रहा है.

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प्रधानमंत्री ने मिली जुली सरकार की मांग को खारिज कर दिया है. उनका तर्क है कि यह क़दम अप्रैल में हुए उस संसदीय चुनाव के नतीजों के खिलाफ होगा जिसमें उन्होंने जीत हासिल की थी.
उन्होंने कहा, "ऐसा वे लोग चाहते हैं जो संविधान के दुश्मन हैं और अभी अभी शुरू हुई जनतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म कर देना चाहते हैं."
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