अमरीकी फ़ौजी के बदले ये तालिबान नेता हुए रिहा

इमेज स्रोत, BBC World Service

पिछले दिनों एक अमरीकी सैनिक के बदले रिहा किए गए अफ़ग़ान तालिबान के पांच वरिष्ठ सदस्यों को दोहा की राजधानी क़तर में रखा गया है.

उन्हें न तो मीडिया से मिलने दिया जा रहा है और न ही उन्हें सार्वजिनक तौर पर देखा जा सकता है. इन्हें लेकर फ़ैसला हुआ है कि वो मीडिया से बात नहीं करेंगे.

अफ़ग़ान तालिबान ने जहां अपने सदस्यों की रिहाई को अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं अमरीका में कई लोग इस डील पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि राष्ट्रपति ओबामा और उनका प्रशासन डील का बचाव ही कर रहे हैं.

दरअसल अमरीका तालिबान को 'आतंकवादी' संगठन मानता है और उसके नियमों के मुताबिक़ 'आंतकवादी' संगठनों से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन बावजूद इसके ओबामा प्रशासन ने क़तर की मध्यस्था से क़ैदियों की ये अदला बदली की है.

अहम सदस्य

दोहा में तालिबान सदस्यों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और फ़िलहाल उन्हें वहां से जाने की अनुमित नहीं है. ग्वांतानामो बे की जेल से रिहा होने वाले अफ़ग़ान क़ैदियों में वे लोग शामिल हैं जो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार के दौरान अहम पदों पर थे. इनमें शामिल हैं:

ग्वांतानामो बे

इमेज स्रोत, AP

इमेज कैप्शन, अमरीकी पर हुए 9/11 के हमले के बाद बड़ी संख्या में संदिग्धों को ग्वांतानामो बे की जेल भेजा गया

मोहम्मद फ़ज़ल: जब अमरीका ने 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था तब मोहम्मद फ़ज़ल तालिबान सरकार में रक्षा उपमंत्री थे. उन पर संभावित युद्ध अपराध के आरोप हैं जिनमें हज़ारों शियाओं के अलावा पश्तून और ताजिकों की हत्या के मामले भी शामिल हैं.

ख़ैरुल्लाह ख़ैरख़्वाह: ये तालिबान की सरकार में गृह मंत्री और हेरात प्रांत के गवर्नर रह चुके हैं. हेरात अफ़ग़ानिस्तान का तीसरे सबसे बड़ा शहर है.

अब्दुल हक़ वासिक़: वासिक़ तालिबान के शासनकाल में ख़ुफ़िया मामलों के उप मंत्री रहे हैं. बताया जाता है कि उन्होंने अन्य इस्लामी चरमपंथी संगठनों के साथ तालिबान का गठबंधन कराने में अहम भूमिका निभाई है.

मुल्ला नूरुल्लाह नूरी: नूरी तालिबान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर और गवर्नर रहे हैं. उन पर भी बड़े पैमाने पर शिया मुसलमानों और अन्य लोगों की हत्या में शामिल होने के आरोप हैं.

मोहम्मद नबी ओमारी: बताया जाता है कि ये अमरीका और गठबंधन सेनाओं पर हुए हमलों में शामिल रहे हैं और उनके हक़्क़ानी नेटवर्क के साथ नज़दीकी संबंध हैं.

दोहा में मौजूदगी

तालिबान का कार्यालय

इमेज स्रोत, BBC World Service

इमेज कैप्शन, दोहा में तालिबान का कार्यालय बंद कर दिया गया है लेकिन माना जाता है कि उसके सदस्यों की कतर में अब भी अच्छी ख़ासी मौजूदगी है

दोहा में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोबेल का कहना है कि कभी सबसे दुर्दांत लोग अब दुनिया के सबसे अमीर लोगों के बीच रह रहे हैं.

ये लोग 12 साल तक जेल में रहे जिसमें ज़्यादातर समय अकेले कालकोठरी में बीता. इन पांच लोगों के नज़दीकी सूत्रों का कहना है कि वो इस मानसिक स्थिति में नहीं हैं कि बाहरी दुनिया के लोगों से बात कर सकें.

रिहा हुए तालिबान सदस्यों में से एक अब्दुल हक़ वासिक़ ने एक सूत्र को बताया कि उन्हें लोगों को पहचानने में परेशानी हो रही है, और इन सबको फिर यही डर सता रहा है कि कहीं उन्हें वापस ग्वांतानामो बे न भेज दिया जाए.

ये अभी साफ़ नहीं है कि ये लोग क़तर में किन शर्तों के तहत रह रहें हैं, लेकिन माना जाता है कि क़तर की सरकार ने अमरीका से वादा किया है कि ये लोग कम से कम एक साल तक अफ़ग़ानिस्तान नहीं लौटेंगे.

तालिबान नेतृत्व भी चाहता है कि वो भी अपने इन पांचों सदस्यों की उसी तरह देखभाल करता हुआ दिखे, जिस तरह अमरीका बो बर्गडेल की कर रहा है.

वो नहीं चाहते कि इन्हें मीडिया के कैमरों के सामने रखा जाए, ठीक वैसे ही जैसे अमरीका बर्गडेल को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखे हुए है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>