पाकिस्तान : झाड़ियां काटने का ठेका सौ करोड़ में

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- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में बीते हफ़्ते जहां पोलियो संकट और भ्रष्टाचार के मुद्दे चर्चा में रहे तो भारत में चुनावी शोर अपने चरम पर रहा और इसलिए उर्दू अखबार भी चुनावी खबरों से अटे रहे.
चुनाव आयोग पर भाजपा की तरफ़ से हो रहे हमलों पर राष्ट्रीय सहारा की संपादकीय टिप्पणी है, ''चुनाव आयोग से बेवजह की जंग''. अख़बार कहता है कि बनारस के बेनियाबाग़ में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को रैली की इजाज़त न देने पर चुनाव आयोग की आलोचना सही नहीं.
अख़बार कहता है कि चुनाव आयोग सबके लिए बराबर है और उसने किसी को नहीं बख़्शा है, अब चाहे भाजपा के नरेंद्र मोदी, अमित शाह या गिरिराज सिंह हों या फिर कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा या फिर समाजवादी पार्टी के आज़म ख़ान.
अख़बार के मुताबिक़ हालिया वर्षों में चुनाव आयोग का प्रदर्शन ऐसा रहा है कि उसने किसी से पक्षपात नहीं किया है, इसलिए भाजपा की सारी चीख पुकार बेमानी है.
सेक्युलरिज़्म के मायने
वहीं हिंदोस्तान एक्सप्रेस कहता है कि भाजपा ने रैली की इजाज़त न दिए जाने को तूल देकर उससे कहीं ज़्यादा फ़ायदा उठा लिया है, जितना उसे रैली करके भी नहीं मिलता.
दूसरी तरफ़ बनारस के चुनावी मुक़ाबले पर अख़बार की टिप्पणी है कि बाहरी होने और कोई पार्टी संगठन न होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के कार्यकर्ताओं ने बनारस के मतदाताओं में अपने लिए जो जगह बनाई है, वो हैरतअंगेज़ है.
अख़बार के अनुसार जहां एक तरफ़ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र और अध्यापकों का झुकाव केजरीवाल की तरफ है, वहीं मुसलमानों के बीच भी केजरीवाल की लोकप्रियता चरम पर है.
अख़बार-ए-मशरिक़ का संपादकीय है - धर्मनिरपेक्षता का मतलब अल्पसंख्यक परस्त होना नहीं. अखबार लिखता है कि हिंदुत्व की अलम्बरदार पार्टियां सेक्युलरिज़्म की अपनी अपनी तरह से व्याख्या करती हैं जबकि बुनियादी तौर पर वो सेक्युलरिज़्म की दुश्मन हैं.
अख़बार लिखता है जहां एक तरफ़ सांप्रदायिक तत्व बहुसंख्यकों को ये कह कर बरगलाने का प्रयास करते हैं कि सेक्युलरिज़्म का मतलब अल्पसंख्यकों का मुंह भरना और उनकी चापलूसी करना है तो वहीं अल्पसंख्यकों की शिकायत होती है कि उनके साथ धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक आधारों पर भेदभाव जारी है.
अख़बार कहता है कि वोट बैंक की ख़ातिर अगर अल्पसंख्यकों के लिए कुछ घोषणाएं की जाती हैं तो ये भी देखना चाहिए कि उन पर अमल कितना हो रहा है. ये देखे बग़ैर सेक्युलरिज़्म को अल्पसंख्यक परस्ती कहना ग़लत है.
पोलियो के चलते प्रतिबंध
रुख़ पाकिस्तान का करें तो विश्व स्वास्थ संगठन ने पाकिस्तान को उन देशों की सूची में शामिल कर दिया है जिन पर पोलियो की वजह से कई तरह के यात्रा प्रतिबंध लगे हैं.

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रोज़नामा जंग कहता है कि ये बात न सिर्फ़ सरकार बल्कि पूरे देश के लिए चिंता की बात है.
प्रतिबंधों का मतलब है कि पाकिस्तान के अलावा सीरिया और कैमरून के नागरिकों को विदेश जाने से पहले पोलियो की दवा पिलाना ज़रूरी होगा, ताकि उनकी वजह से वहां पोलियो का वायरस न फैले.
अख़बार कहता है कि अगर पोलियो टीकाकरण मुहिम में लगे लोगों को निशाना बनाने वाले चरमपंथी तत्व इस ग़लतफ़हमी का शिकार हैं कि पोलियो की दवा में ऐसी चीज़ होती है जो आगे चलकर बच्चों की प्रजनन क्षमता पर असर डालती है तो उनकी ग़लतफ़हमी दूर किए जाने की भरपूर कोशिश होनी चाहिए.
कहां है क़ानून?
कराची के जिन्नाह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हथियार और कारतूस के साथ गिरफ़्तार एक अमरीकी नागरिक की रिहाई पर नवा-ए-वक़्त लिखता है- हमारे मुल्क में कानून कहां हैं?
अख़बार कहता है कि इस व्यक्ति के पास एक मैगजीन और 15 कारतूस बरामद हुए, लेकिन उसकी रिहाई की चिंता उसे कम और पाकिस्तानी अधिकारियों को ज़्यादा दिख रही थी.
अख़बार के मुताबिक़, इस व्यक्ति का चालान होता, पूछताछ होती कि इस तरह गोली-बारूद के साथ आने का उसका मक़सद क्या है, लेकिन पाकिस्तानी शासकों ने एक बार फ़िर साबित कर दिया है, ''हम अमरीका के गुलाम हैं.''
आजकल ने इस विषय पर कार्टून बनाया है, जिसमें एयरपोर्ट पर एक पुलिस अफ़सर एक व्यक्ति को सैल्यूट मार रहा है और जिस दरवाजे से ये व्यक्ति जा रहा है उसके ऊपर लिखा है- सुरक्षित निकास, सिर्फ़ विदेशी जासूसों के लिए.
अंतरराष्ट्रीय गधा दिवस

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लाहौर से छपने वाले रोजनामा दुनिया ने आठ मई को मनाए जाने वाले 'अतरराष्ट्रीय गधा दिवस' के हवाले से अपने संपादकीय में बेज़ुबान जानवरों के साथ होने वाले बुरे बर्ताव पर सवाल उठाया है.
अख़बार कहता है कि जानवरों ने इंसान की तरक्की में अहम भूमिका अदा की है. घोड़े ने जहां इंसानों को दूर-दूर तक पहुंचाया, तो ऊंट ने रेगिस्तान पार कराए, वहीं खेती-बाड़ी में गाय, भैंस और बैल के साथ गधे ने बोझ उठाने के अलावा गाड़ी, ठेले, तांगे और न जाने क्या-क्या खींच कर इंसान को यहां तक पहुंचाया है.
अख़बार कहता है कि अफ़सोस की बात यह है कि गधों के प्रति उनके मालिकों का व्यवहार अच्छा नहीं होता है.
न भर पेट चारा दिया जाता है और न पूरी तरह आराम करने दिया जाता है, इतना ही नहीं बीमारी होने की सूरत में उसे डॉक्टर को दिखाने की जरूरत भी नहीं समझी जाती है.
'ग़रीब मुल्क की अय्याशी'
दैनिक इंसाफ़ ने पाकिस्तान में सामने आए एक घपले पर संपादकीय लिखा है, 'ग़रीब मुल्क की अय्याशी'. अख़बार के मुताबिक़, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के मुताबिक़ इस्लामाबाद में न्यू बेनज़ीर भुट्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में 82 अरब रुपए की अनियमितता हुई है.
अख़बार लिखता है कि एक ग़रीब और कर्ज़ में डूबे देश के लिए यह बहुत बड़ी रक़म है और इस मामले के ब्यौरे में हैरतों का हूजूम है और यकीन नहीं आता है कि ऐसी लूट और धांधली और उसे करने वालों पर पर्दा डालना भी संभव है.
रिपोर्ट कहती है कि झाड़ियां काटने का ठेका एक अरब रुपये में दिया गया, आख़िर ये हो क्या रहा है?
वहीं दैनिक ख़बरें ने अपने पहले पन्ने पर एक छोटी सी ख़बर लगाई है, जिसमें अमरीका ने उत्तर कोरियाई मीडिया की एक रिपोर्ट में राष्ट्रपति बराक ओबामा को एक बदसूरत बंदर कहे जाने को अमरीका का अपमान बताया है.
इसके अलावा दैनिक वक्त ने अपने पहले पन्ने पर अस्पताल में लेटी एक बच्ची की बड़ी सी तस्वीर छापी जो पिछले दिनों पाकिस्तान में आए भूकंप में घायल हो गई. नौशेरा इलाक़े के पास आए भूकंप में दो लोग मारे गए और 70 ज़ख़्मी हो गए.
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