अफ़ग़ानिस्तान: राष्ट्रपति चुनाव में अब्दुल्ला आगे

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अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए हो रही मतगणना में अब्दुल्ला अब्दुल्ला अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अशरफ़ ग़नी से आगे चल रहे हैं.
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक़ अब तक हुई मतगणना में पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला को 44 फ़ीसदी और ग़नी को 33 फ़ीसदी वोट मिले हैं. अधिकारियों के मुताबिक़ अब तक आधे वोटों को गणना हो चुकी है.
देश में पाँच अप्रैल को हुए मतदान में कुल 34 प्रांतों में क़रीब 70 लाख लोगों ने मतदान किया था.
अगर किसी भी उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी वोट नहीं मिले तो सबसे ज़्यादा मत पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच मई के अंत में फिर से चुनावी मुक़ाबला होगा.
मतगणना के अंतिम नतीजे 14 मई को आने की संभावना है. स्वतंत्र चुनाव आयोग के अध्यक्ष अहमद यूसुफ़ नूरीस्तानी ने कहा कि मतगणना के शुरुआती आंकड़े आंशिक हैं और इनमें बदलाव हो सकता है.
निष्पक्ष
मतगणना के ताज़ा रुझानों की घोषणा के बाद डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि वो दूसरे दौर के मतदान के लिए तैयार हैं.
समचार एजेंसी एपी से उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण यह है कि प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है.''
उन्होंने कहा, ''अगर क़ानून के मुताबिक़ यह दूसरे दौर में जाता है तो हम उसके लिए तैयार हैं. लेकिन इस स्थिति में हमें लगता है कि शायद दूसरे दौर की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.''
इस चुनाव में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के पसंदीदा उम्मीदवार माने जा रहे देश के एक दूसरे विदेश मंत्री ज़ालमी रसूल को पहले दौर में 10 फ़ीसद वोट मिले हैं.
राजधानी काबुल में मौज़ूद बीबीसी संवाददाता डेविड लॉयन का कहना है कि चुनाव के पहले दौर में तालिबान बाधा नहीं डाल पाया था. लेकिन गर्म मौसम और देश में चल रहे तथाकथित गृह युद्ध के चरम पर होने की वजह से सुरक्षा बलों के लिए दूसरा दौर अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
नई सरकार

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उन्होंने कहा कि अगर और नतीजे आने के बाद डॉ. अब्दुल्ला की बढ़त बढ़ती है तो उनके अपने ही शर्तों पर सरकार बनाने की संभावना अधिक होगी.
चुनाव में होने वाली धोखाधड़ी चिंता का प्रमुख विषय हैं लेकिन चुनाव आयोग ने पहले कहा था कि इस तरह की शिकायतों से निपटने में हफ़्तों लगेंगे.
करजई जब साल 2009 में जब दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए थे तो बड़े पैमाने पर चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे. उस चुनाव में अब्दुल्ला अब्दुल्ला दूसरे नंबर पर रहे थे.
संवैधानिक प्रावधानों की वजह से निवर्तमान राष्ट्रपति हामिज करज़ई तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के अगले राष्ट्रपति को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, उनमें विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद की स्थिति और तालिबान की ओर से किए जा रहे हमले प्रमुख हैं.
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