बीजिंग की धुंध का जवाब, साफ़ हवा के गुंबद!

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- Author, सेलिया हैटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बीजिंग
चीन की राजधानी बीजिंग के ऊपर आमतौर पर ज़हरीली धुंध की मोटी चादर तैरती रहती है लेकिन संभव है कि एक दिन वहां आपको ऐसे बहुत से गुंबद नज़र आएं जिनमें स्वच्छ हवा भरी हुई हो.
लंदन की एक आर्किटेक्चर और डिज़ाइन फ़र्म, ऑरप्रोजेक्ट ने एक 'बबल प्रोजेक्ट' की परिकल्पना प्रस्तुत की है जिसके अनुसार विशाल गुब्बारों जैसे ढांचे तैयार किए जाएंगे जिनमें साफ़ हवा भरी होगी.
इन बुलबुलों के अंदर बिल्डिंग में रहने वाले लोगों के लिए पार्क में मौजूद पौधे स्वच्छ हवा पैदा करेंगे और इसके अलावा वहां रहने वालों लिए बाहर धुंध मुक्त कृत्रिम जगहें भी होंगी जहां वे अपना वक़्त गुज़ार सकेंगे.
ऑरप्रोजेक्ट भारत के निदेशक, रजत सोढ़ी, ने कंपनी की स्थानीय टीम के साथ डेढ़ साल तक इस दिशा में काम किया है.
प्रकृति से प्रेरणा
सोढ़ी बताते हैं, "इस परियोजना के मूल में वस्तुस्थिति का एहसास है कि विकासशील देशों में, ख़ासतौर पर भारत और चीन के मुख्य शहरों में हवा की गुणवत्ता बर्दाश्त की सीमा को भी पार कर चुकी है."
उन्होंने कहा, "सचमुच में आप बाहर जाकर नहीं रह सकते. आप एक एयर-कंडीशंड जगह से दूसरी पर जाते हो."
उनकी फ़र्म ने प्रकृति में मौजूद पैटर्न की तर्ज पर विशाल गुंबद बनाने का फ़़ैसला किया है.
सोढ़ी कहते हैं, "अगर आप तितली के पंख को या किसी पत्ती को देखें तो एक बहुत सघन पैटर्न है जिससे उनका ढांचा बहुत स्थिर और अच्छा-ख़ासा बड़ा बनता है लेकिन उसमें सामान बहुत कम लगता है."

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इस ढांचे की छत को ईटीएफ़ई से बनाया जा सकता है जो कि बहुत टिकाऊ और हल्का पदार्थ है. यह समय के साथ नष्ट नहीं होता. हर बुलबुले में गैस भरी जाएगी ताकि यह तैर सके.
पूरे ढांचे का आकार और आधार स्टील से तैयार किया जाएगा. जनवरी में पहली बार जारी किए जाने के बाद से ही इस प्रोजेक्ट को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है.
इसके आलोचकों का कहना है कि यह प्रोजक्ट पराजय दिखाता है. आख़िर बीजिंग जैसे शहरों में प्रदूषण से मुक्ति पाने की चिंता ही क्यों की जाए अगर शहर में साफ़ हवा के बुलबुले मौजूद हैं तो.
<link type="page"><caption> चीन में धुएं और कोहरे के बीच दर्जनों उड़ानें रद्द</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/01/120110_china_smog_rn.shtml" platform="highweb"/></link>
अन्य का कहना है कि यह योजना पूरी तरह अव्यावहारिक है और अगर यह सफल रही तो प्रदूषित क्षेत्रों में नागरिकों के दो वर्ग पैदा करेगी. माना जा सकता है सिर्फ़ कुछ धनी लोग ही बुलबुलों में रह सकेंगे और बचे हुए बाक़ी लोग धुंध में फंसे रहेंगे.
हर मौसम में टिकाऊ
रजत सोढ़ी को यकीन है कि ऐसी प्रतिक्रियाएं ऐसे लोग दे रहे हैं जो पर्यावरणीय समस्याओं को सुलझाना चाहते हैं, लेकिन वह कहते हैं कि यह उनका उद्देश्य नहीं है. वह एक आर्किटेक्ट हैं जो रहने की जगह बनाते हैं. बबल प्रोजेक्ट को ऐसी कई जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है जहां पर लोग साल के ज़्यादातर समय खुले स्थानों पर हरियाली के मज़े नहीं ले पाते.

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वह कहते हैं, "अमरीका का बड़ा इलाक़ा इस साल ध्रुवीय बवंडर से प्रभावित रहा, जिससे बाहर निकलना असंभव हो गया. हक़ीक़त यह है कि शहरों में कोई हरी-भरी जगह बची ही नहीं है, इसलिए हवा की गुणवत्ता गिर रही है क्योंकि प्राकृतिक रूप से हवा का पुनर्निर्माण नहीं हो रहा है."
डिज़ाइनर दावा करते हैं कि यह प्रोजेक्ट बेहद गर्म या ठंडी जलवायु में टिका रह सकता है.
सोढ़ी कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस तरह का प्रोजेक्ट किसी भी जगह के लिए सही है, क्योंकि मूलतः यह करता यह है कि यह बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में एक नियंत्रित पर्यावरण तैयार करता है जो साल भर साफ़ हवा देता रहे."
चीनी सरकार के अधिकारियों ने फ़र्म के प्रस्ताव पर अभी तक जवाब नहीं दिया है.
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