सीरिया संघर्षःलड़ाके कर रहे हैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल

सीरिया के चरमपंथी गुट

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सीरिया में चल रहे गृह युद्ध में शामिल विदेशी लड़ाके सोशल मीडिया का किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, इसके बारे में एक अनोखी जानकारी सामने आई है.

'इंटरनेशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रैडिक्लिज्म' यानि आईसीएसआर की रिपोर्ट बताती है कि विदेशी लड़ाके सीरिया संघर्ष में अपनी भूमिका को प्रमाणित करने के लिए सोशल मीडिया की मदद ले रहे हैं.

इस रिपोर्ट के जरिए ये बात सामने आ रही है कि बड़ी संख्या में लोगों को उन अनाधिकृत प्रचारकों से सूचनाएं मिल रही हैं, जिनका किसी भी चरमपंथी समूह से कोई निजी संबंध नहीं है.

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अनाधिकृत प्रचारकों की पहचान धार्मिक अधिकारियों के रूप में की जा रही है. लड़ाके इन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं.

रिपोर्ट लिखने वालों में से एक शिराज मेहर ने बीबीसी न्यूजनाइट को बताया "इसके पीछे उनका उद्देश्य सोशल मीडिया के जरिए लोगों को खुलकर सामने आने और उनका साथ देने को प्रेरित करना है."

अल-कायदा

सीरिया राष्ट्रपति बशर अल-असद

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आईसीएसआर ने 114 लोगों से बातचीत करने के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट का विश्लेषण किया है. इसमें कुल 121 अकाउंट शामिल किए गए हैं जिनमें फेसबुक के 86 और ट्विटर के 35 अकाउंट शामिल हैं.

शोधकर्ताओं ने विदेशी लड़ाकों के सोशल मीडिया से जुड़े उन संपर्कों का पता लगाया जिनको वे फॉलो कर रहे थे और जो उन्हें फॉलो कर रहे थे.

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शोधकर्ताओं ने जो विश्लेषण प्रस्तुत किया है उससे ये पता चलता है कि इनमें से ज्यादातर ब्रिटेन (25.4 फीसद) के हैं. उनको जर्मनी (12.3 फीसद), स्वीडन (8.8 फीसद), नीदरलैंड (7 फीसद) और बेल्जियम (5.3 फीसद) के लोग फॉलो कर रहे हैं.

पूर्वी यूरोपीय देशों के 6.1 फीसद जबकि गैर-यूरोपीय पश्चिमी देशों (ऑस्ट्रेलियाई, कनाडाई और अमरीकी) 7 फीसद लोग शामिल हैं.

ब्रिटेन में पिछले साल 2013 में गिरफ्तार किए गए 24 लोगों की तुलना में इस साल अभी तक 30 से ज्यादा लोगों को चरमपंथी अपराधों के संदेह में गिरफ्तार किया गया है.

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जहां तक समूहों से संबंध की बात है, आईसीएसआर का विश्लेषण बताता है कि 61.4 फीसद विदेशी लड़ाकों की पहचान विद्रोही जेहादी समूह इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत के रूप में की गई है, जबकि 17.5 फीसदी अल-नुसरत फ्रंट नामक विद्रोही गुट से जुड़े हुए हैं जिसका संबंध अल-कायदा से है. अल-कायदा सीरिया संघर्ष में मुख्य भूमिका में है.

'नए प्रचारक'

सीरिया संघर्ष

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रिपोर्ट से जुड़े अकादमिक विश्लेषण से ये बात भी सामने आई है कि जेहादी समूहों के आधिकारिक ट्वीटर अकाउंट उन कथित 'प्रचारकों के अकाउंट' की तुलना में सूचना के कम महत्वपूर्ण जरिया माने जा रहे हैं.

इन अकाउंटों के जरिए जंग के मैदान की महत्वपूर्ण सूचनाओं का प्रसार किया जा रहा है, नए वीडियो का लिंक जारी किया जा रहा है और लड़ाई, उपकरणों और बैठकों की तस्वीरें साझा की जा रही हैं.

ट्विटर पर विदेशी लड़ाके जिस बेहद लोकप्रिय 32 अकाउंट्स को फॉलो कर रहे हैं उनमें से 11 प्रचारक अकाउंट हैं और मात्र एक अकाउंट लड़ाका गुट का आधिकारिक अकाउंट है.

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12 सबसे लोकप्रिय प्रचारकों में से छह वे हैं जिनका जिक्र विदेशी लड़ाकों की ओर सबसे ज्यादा बार हुआ है और जिनको उन्होंने सबसे ज्यादा दोबारा-ट्वीट किया है.

आईसीएसआर ने पता लगाया है कि सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फेसबुक पेजों में से 10 धार्मिक छवि से ताल्लुक रखते हैं.

इसमें वैसे दो उपदेशक शामिल हैं जो अंग्रेजी भी बोलते हैं और सोशल मीडिया के जरिए पश्चिमी मुस्लिम दर्शकों के साथ निरंतर संवाद में हैं.

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