पाक-तालिबान वार्ता: संघर्ष विराम बढाने पर ज़ोर

activist of Pakistan Tehreek-e-Insaf

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पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी तालिबान के बीच पहले दिन की शांति वार्ता समाप्त हो गई है. ये बातचीत उत्तरी वजीरिस्तान के किसी कबायली इलाके में हुई.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक बातचीत के दौरान संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर फैसला हुआ है, हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.

पिछले महीने शुरू हुई शांति प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों के बीच ये पहली सीधी बातचीत है.

<link type="page"><caption> पाकिस्तानी तालिबान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140314_pakistan_blast_skj.shtml" platform="highweb"/></link> यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के चरमपंथी वर्ष 2007 से ही पाकिस्तान में विद्रोही गतिविधियों में शामिल हैं.

पूरी बातचीत के साथ करीब से जुड़े एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया है कि तालिबान के साथ जारी संघर्ष विराम को आने बढ़ाने का मुद्दा बातचीत में सबसे ऊपर है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तालिबान के साथ बातचीत बहाल करने की घोषणा की थी, ताकि पाकिस्तान में जारी हिंसा को समाप्त किया जा सके.

बातचीत के लिए पाकिस्तान सरकार के चार प्रतिनिधियों का एक दल बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान से लगी सीमा के पास हेलिकॉप्टर से पहुंचा.

राजनीतिक दबाव

बीबीसी की शुमैला जाफरी ने लाहौर से बताया कि नवाज शरीफ पर इस संकट का समाधान तलाशने के लिए काफी राजनीतिक दबाव है और कई पाकिस्तानी बातचीत असफल होने पर सैन्य कार्रवाई चाहते हैं.

ये <link type="page"><caption> चरमपंथी लड़ाके</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140320_taliban_attack_police_station_vs.shtml" platform="highweb"/></link> पूरे पाकिस्तान में सख्त शरीयत कानूनों को लागू करना चाहते हैं और देश के संविधान को खारिज करते हैं.

टीटीपी में भी कई आपसी मतभेद हैं. ऐसे में किसी नतीजे तक पहुंचना काफी जटिलताओं से भरा है.

पाकिस्तान में कुछ लोग इस बातचीत के पक्ष में नहीं हैं. उन्हें लगता है कि इस बातचीत से चरमपंथियों को संगठिन होने और ताकत बढ़ाने का मौका मिल जाएगा.

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