'बगैर मेकअप' के सेल्फी का कमाल

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सेल्फ़ी (यानी अपनी फोटो खुद ही खींच लेना) नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है. "नो मेकअप सेल्फ़ी फ़ॉर कैंसर अवेयरनेस" के ज़रिए ब्रिटेन की 'कैंसर रिसर्च यूके' चैरिटी ने ऑनलाइन अभियान चला कर महज चंद दिनों में ही करीब 20 करोड़ रुपए जुटा लिए हैं.
सवाल उठना जायज़ है कि जो दुनिया मेकअप के पीछे पागल है, वहां सादगी से भरे <link type="page"><caption> सेल्फ़ी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/02/140218_twitter_fake_football_journalist_rd.shtml" platform="highweb"/></link> ने कैंसर अभियान के लिए इतने कम समय में इतनी बड़ी रकम कैसे जुटा ली?
मंगलवार को इस अभियान की शुरुआत सोशल मीडिया पर 'नोमेकअपसेल्फ़ी' हैशटैग के साथ तब हुई जब एक महिला ने अपनी बिना मेकअप की तस्वीर <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140321_twitter_website_blocked_turkey_vs.shtml" platform="highweb"/></link> और फ़ेसबुक पर डाली. उस महिला ने अपने दोस्तों को भी वैसा ही करने को कहा.
कैंसर से जुड़ा ये 'नोमेकअपसेल्फ़ी' अभियान चर्चा का विषय बन गया. कैंसर मरीज़ों के लिए दान की गुज़ारिश करते हुए कई सेल्फ़ी पोस्टर तेज़ी से वायरल होने लगे.
सोशल मीडिया के अलावा अभियान के बारे में अखबारों, रेडियो और टीवी न्यूज़ में भी खूब चर्चा होने लगीं.
चलन कैसे शुरू हुआ?
इस अभियान के इस कदर <link type="page"><caption> वायरल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/02/140131_twitter_stolen_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> होने के पीछे क्या राज़ है? क्या यह खास समस्या के बारे में जागरूकता फैलाने या जिंदगी बचाने के लिए किए जाने वाले प्रयोग के कारण हुआ?

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मगर किसी को अंदाज़ा नहीं कि ये चलन शुरू कैसे हुआ. शायद यह उस 'ऑस्कर सेल्फ़ी' के कारण हुआ हो जिसमें बेहतरीन शख्सियतें शोर मचाती हुई नजर आ रही हैं.
मार्च के शुरू में फिल्म अवॉर्ड संपन्न होने के बाद पहली पंक्ति के अदाकारों वाली यह तस्वीर इतनी बार री-ट्विट की गई कि इसे अब तक के ट्विटर इतिहास के सबसे ज्यादा रि-ट्विटेड इमेज की संज्ञा दी गई.
उस अवॉर्ड के बाद 81 वर्षीय अभिनेत्री किम नोवाक को अपने लुक के लिए काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी. संभव है कि इस अभियान की सफलता के पीछे इस प्रकरण का साथ हो.
लुक के लिए हो रही आलोचना के कारण कई लोगों ने अभिनेत्री किम से सहानुभूति जताते हुए अपनी नीरस तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालीं.
मानवीय संवेदना

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कैंसर रिसर्च यूके लोगों की ओर से किए जा रहे दान और समर्थन से अभिभूत है. फ़ेसबुक पर इस अभियान को 826,000 लोगों ने पसंद किया और ट्विटर पर इसे 140,000 लोग फ़ॉलो कर रहे हैं.
सेल्फ़ी को आमतौर पर खुद की छवि को प्रचारित करने के माध्यम के रूप में जाना जाता है, मगर इस प्रकरण के बाद ये कहा जा सकता है कि सेल्फ़ी का मकसद इतना संकुचित नहीं रह गया है.
कैंसर रिसर्च यूके को जितनी भी तस्वीरें भेजी गईं वे दिखाती हैं कि वे सब कैंसर से जूझने वाले मरीज और उसके परिवार के प्रति मानवीय संवेदना रखते हैं.
धन जुटाने वाली इस संस्था का कहना है कि यदि प्रचलित ट्रेंड को धन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाए तो इससे अभियान युवाओं और नए दर्शकों तक पहुंचने में सफल रहता है. और यही इस बार कैंसर के मामले में हुआ.

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मशहूर शख्सियतें जब किसी अभियान से जुड़ जाती हैं तो वे भी उन लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं जो चैरिटी जैसी चीजों से दूर रहते हैं. और इस हफ़्ते कई बड़े नामों ने अपनी सेल्फ़ी पोस्ट की है.
मगर इस <link type="page"><caption> सेल्फ़ी अभियान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140320_social_media_campaigners_an.shtml" platform="highweb"/></link> की सफलता की डोर संभवतः कहीं और भी बंधी हुई है.
नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टर लिंडा गिब्सन कहती हैं, "हो सकता है कि इस अभियान की लोकप्रियता का संबंध महिलाओं को उनके खुद के प्रति सोच से हो. उनके निजी चेहरे, सार्वजनिक चेहरे से जु़ड़ी आम मानसिकता."
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