यूक्रेन: पुलिस और प्रदर्शनकारियों में संघर्ष

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यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों के मुख्य कैंप पर पुलिस ने धावा बोला है जहां तेज़ धमाकों की आवाज़ सुनी गई है. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच ज़बरदस्त झड़पें हुई हैं जिनमें कम से कम 16 लोग मारे गए हैं.
मारे गए लोगों में छह पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. पुलिस ने इंडिपेंडेंट स्क्वॉयर को अपने घेरे में ले लिया जहां प्रदर्शनकारी डटे हुए थे. प्रदर्शनकारियों के कई तंबुओं में आग लगा दी गई है.
इसबीच, व्हाइट हाउस का कहना है कि अमरीका के उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच से बात की है और हिंसा पर चिंता ज़ाहिर करते हुए सरकारी बलों को वापस बुलाने का आग्रह किया है.
बीते साल नवंबर के बाद से यहां शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन होते रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वह पीछे नहीं हटेगा.
शहर की मेट्रो सेवा को फ़िलहाल बंद कर दिया गया है और ऐसी भी ख़बरें हैं कि कीएफ़ ओर आने वाले वाहनों को आगे जाने से रोका जा रहा है.
संविधान में बदलाव के मुद्दे पर हज़ारों लोगों ने संसद की ओर मार्च निकाला जिसे पुलिस ने रोकना चाहा. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस ने भी रबर की गोलियों के साथ ही अचेत करने वाले हथगोलों का इस्तेमाल किया.
यूक्रेन में बीते कुछ हफ्तों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें होती रही हैं. लेकिन मंगलवार को हुई झड़पों को पहले के मुक़ाबले कहीं अधिक हिंसक बताया जा रहा है.

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सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तय समय-सीमा के भीतर वापस चले जाने के लिए कहा था और ऐसा नहीं करने पर पुलिस कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी थी.
विपक्ष पीछे हटने को राज़ी नहीं
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब देश का संविधान बदलने के मुद्दे पर सांसदों के बीच विचार-विमर्श होना वाला है.

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संविधान में जिन बदलावों की बात की जा रही हैं उनमें यह प्रस्ताव भी शामिल है कि वर्ष 2004 का संविधान दोबारा बहाल किया जाए और राष्ट्रपति विक्टर यान्कोविच की शक्तियां ख़त्म कर दी जाएं.

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विपक्ष का कहना है कि वे अपना ड्राफ्ट सौंपना चाहते थे लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया.
यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख कैथरीन एश्टन का कहना है कि यूक्रेन में बढ़ती हिंसा की वजह से वे 'बेहद चिंतित' हैं.
उन्होंने यूक्रेन के नेताओं से कहा है कि वे इस हिंसा के बुनियादी कारणों को दूर करें.

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वहीं रूस ने यूक्रेन में बढ़ती हिंसा के लिए पश्चिमी देशों के नेताओं और यूरोपीय ढांचे को ज़िम्मेदार ठहराया है.
यूक्रेन में जारी अशांति की शुरुआत बीते साल नवंबर में तब हुई थी जब राष्ट्रपति विक्टर यान्कोविच ने रूस के साथ संबंधों को तरजीह देते हुए यूरोपीय यूनियन के साथ एक समझौते को ख़ारिज़ कर दिया था.

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इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों पर क़ब्ज़ा कर लिया था. कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया था लेकिन बाद में सरकार ने उन्हें आम माफ़ी देते हुए छोड़ दिया था.
लेकिन प्रदर्शनकारी सड़कों पर अभी भी अपने तम्बू गाड़े हुए हैं. विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति यान्कोविच को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
विपक्ष ने यह चेतावनी भी दी है कि सरकार विपक्ष की मांग नहीं मानकर तनाव को और बढ़ा रही है.
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