अमरीका की आपत्ति के बावजूद क़ैदियों की रिहाई

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बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़ अमरीका के कड़े विरोध के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान के अति सुरक्षा वाले बगराम जेल से 65 क़ैदियों को रिहा कर दिया गया है. अमरीका ने बयान जारी कर इस क़दम को 'बेहद अफ़सोसजनक' बताया है.
अमरीका का कहना है कि उसके पास सबूत हैं कि रिहा किए गए क़ैदी नेटो और अफ़ग़ान सुरक्षाबलों पर हमलों के लिए ज़िम्मेदार थे और इन पर मुक़दमा चलना चाहिए.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने ज़ोर देकर कहा है कि बंदियों के ख़िलाफ़ सबूत काफ़ी नहीं हैं.
इससे पहले जेल अमरीका के अधीन था और मार्च 2012 में एक समझौते के तहत इसे अफ़ग़ानिस्तान को सौंपा गया था.
काबुल के उत्तर में 45 किमी दूर स्थित इस जेल का नाम परवान बंदी केंद्र कर दिया गया है. तब से जेल से सैकड़ों क़ैदियों को रिहा किया जा चुका है.
अमरीका का कहना है कि मौजूदा क़दम पिछले साल हुए समझौते का उल्लंघन करता है. वहीं अफ़ग़ानिस्तान की सरकार का मानना है कि अगर ये क़ैदी हिरासत में रहते हैं, तो वे बाक़ी क़ैदियों को भी कट्टरपंथी बना देंगे.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने बगराम जेल को 'तालिबान बनाने वाली फ़ैक्टरी' कहा था.
कमज़ोर होते रिश्ते
काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड लॉयन के मुताबिक़ इन क़ैदियों की रिहाई से अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अमरीकी सुरक्षाबलों और अफ़ग़ान सरकार के रिश्ते और कमज़ोर हुए हैं.
डेविड लॉयन ने ख़बर दी है कि गुरुवार सुबह क़ैदी 6-7 के समूहों में जेल से निकलना शुरू हुए. बाहर जाने के लिए बसों और टैक्सियों में चढ़ते वक़्त हंस रहे थे और ठहाके लगा रहे थे.
अमरीका का आरोप है कि रिहा किए गए क़ैदियों में से एक को अफ़ग़ान सुरक्षाबलों पर हमले के दौरान घायल होने के बाद पकड़ा गया था. बाक़ियों को शॉ़टगन, राइफ़ल, रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर और बम बनाने के उपकरणों के साथ गिरफ़्तार किया गया था.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि क़ैदियों को रिहा करने का फ़ैसला राजनैतिक है और इसे राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने व्यक्तिगत तौर पर लिया है. करज़ई लंबे समय से बगराम बंदी केंद्र के ख़िलाफ़ रहे हैं.
बगराम जेल में ज़्यादातर वो तालिबान और अन्य चरमपंथी क़ैद हैं जिन्हें पश्चिमी सुरक्षाबलों ने पकड़ा था. यह जेल क़ैदियों के शोषण के आरोपों के केंद्र में भी रहा है.
क़ैदियों की रिहाई ऐसे समय में हो रही है जब अमरीकी नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षाबल अफ़ग़ानिस्तान से वापसी की तैयारी कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिदेश के मुताबिक़ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षाबल इस साल के आखिरी में वापसी से पहले सुरक्षा की सभी ज़िम्मेदारियां अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को सौंप देंगे.
लेकिन अफ़ग़ान राष्ट्रपति करज़ई ने अमरीका के साथ वापसी को अंतिम रूप देने वाले सुरक्षा समझौते पर दस्तख़त करने से इंकार कर दिया है.
अगर इस सुरक्षा और रक्षा सहयोग समझौता पर सहमति हो जाती है तो इसके तहत लगभग दस हज़ार अमरीकी सैनिक अगले 10 साल तक अफ़ग़ानिस्तान में रहेंगे.
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