हामिद करज़ई आग से खेल रहे हैं: नेटो प्रमुख

इमेज स्रोत, AP PhotoVirginia Mayo Pool
नेटो सेना के महासचिव ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई अमरीका के साथ सुरक्षा समझौता न कर 'आग से खेल' रहे हैं.
इस समझौते के तहत अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सेना की कुछ तादाद इस साल के बाद भी मौजूद रह सकेगी. वहां मौजूद सेनाएं इस साल वहां से वापस जा रही हैं
बीबीसी के न्यूज़नाइट कार्यक्रम में अनस फ़ो रासमुसेन ने हामिद करज़ई के हाल के कुछ बयानों पर निराशा भी जताई है जिसमें विदेशी सेना की आलोचना की गई थी.
एक ब्रितानी अखबार ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के हवाले से लिखा था कि अगर ब्रितानी सेनाओं ने <link type="page"><caption> हेलमंद प्रांत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/01/140116_afghanistan_taliban_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> में कदम नहीं रखा होता तो वो बेहतर स्थिति में होता.
रासमुसेन ने कहा कि कहा कि एक बेहतर अफ़ग़ानिस्तान के निर्माण के लिए नेटो ने अपना ख़ुन बहाया है और बहुत सारा धन ख़र्च किया है और नेटो अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक नेतृत्व से थोड़ी बहुत कृतज्ञता की उम्मीद रखता है.
'नए राष्ट्रपति'

इमेज स्रोत, Reuters
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए राष्ट्रपति सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
उनका कहना था, "उम्मीद है कि अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव के बाद बनने वाले नए राष्ट्रपति इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे."
अफ़ग़ानिस्तान में दो महीने में चुनाव होने हैं. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई अपना कार्यकाल पुरा कर चुके हैं.
रासमुसेन ने इस बात के संकेत दिए कि अगर सुरक्षा समझौता नहीं होता है तो इसका असर अफ़ग़ानिस्तान को मिलने वाली विदेशी आर्थिक सहायता पर पड़ सकता है जिसका असर वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा.
इस समय अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 87,000 <link type="page"><caption> पश्चिमी सैनिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130908_afganistan_nato_vt.shtml" platform="highweb"/></link> हैं, जो बीते साल के 150,000 के मुक़ाबले कम है. अगले बसंत तक इनकी संख्या 40,000 से कम होगी और 2014 के अंत तक शून्य होगी. हालांकि, उम्मीद है कि अमरीका अपने पीछे एक छोटा प्रशिक्षण बल यहां छोड़ जाएगा.
इससे पहले दिसंबर में अमरीका ने उम्मीद जताई थी कि शायद भारत हामिद करज़ई को उस समझौते पर दस्तखत करने के लिए राज़ी कर ले जिसकी बदौलत अमरीकी फ़ौज 2014 के बाद भी अफ़गानिस्तान में मौजूद रह सकेगी.
अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीका के ख़ास दूत जेम्स डॉबिंस ने कहा था कि इस दोतरफ़ा सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने में जितनी देर हो रही है उससे अफ़गानिस्तान का भारी नुकसान हो रहा है.
<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140203_rahul_nedo_homeminister_sk.shtml" platform="highweb"/></link>. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फ़ेसबुक पन्ने</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












