मिस्र: राष्ट्रपति चुनाव होंगे समयपूर्व

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मिस्र में अंतरिम सरकार ने देश में राष्ट्रपति चुनावों को तयशुदा समय से पहले कराने की घोषणा कर दी है.
इसका अर्थ ये हुआ कि राष्ट्रपति चुनाव देश में आम चुनावों के बाद नहीं होंगे, जैसा की सेना की निगरानी में लोकतंत्र की बहाली के लिए बनाए गए एक कार्यक्रम में तय हुआ था.
इस ताज़ा फ़ैसले के बाद इस बात पर कयास बढ़ जायेंगे कि क्या सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फ़तह अल सीसी राष्ट्रपति पद के एक उम्मीदवार होंगे.
जनरल सीसी बेहद अहम
देश में कई लोगों ने जनरल सीसी से राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करने का आग्रह किया है.
जुलाई में मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध रखने वाले वाले राष्ट्रपति मुहम्मद मोरसी को हटाने की कार्रवाई में जनरल सीसी की बेहद अहम भूमिका थी.
<link type="page"><caption> मिस्र के जनरल अल-सीसी: चेहरे के पीछे असली चेहरा </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130828_egypt_general_al_sisi_profile_an.shtml" platform="highweb"/></link>

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मुहम्मद मोरसी मिस्र के पहले लोकतांत्रिक ढंग से चुने हुए राष्ट्रपति थे जिन्हें व्यापक प्रदर्शनों के बाद सेना की अग्रिम भूमिक में अपदस्थ कर दिया गया था.
देश के अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर ने फ़ैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय "राष्ट्रवादी ताकतों, भिन्न संगठनों और अलग-अलग ट्रेंड्स को देखते हुए लिए गया है."
शनिवार को सेना के समर्थकों ने साल 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ उठी खड़ी हुई जनक्रांति की तीसरी वर्षगाँठ पर रैलियां निकालीं थीं.
हज़ारों लोग देश की राजधानी काहिरा के मशहूर तहरीर चौक पर पहुँच गए. इन लोगों ने हाथों में मिस्र के झंडे और जनरल सीसी की तस्वीरें उठा रखी थीं.
साल 2011 में देश में तत्कालीन राष्ट्रपति मुबारक के ख़िलाफ़ हुई क्रांती का केंद्र यही तहरीर चौक था.
सेना सर्वमान्य नहीं
देश में कई जगहों पर सेना के विरुद्ध भी प्रदर्शन हुए. कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 49 लोग मारे गए.
बीबीसी के अरब मामलों के विशेषज्ञ सेबेस्टियन अशर का कहना है कि मिस्र में फैली अस्थिरता और अराजकता के बीच देश में कई लोग समझते हैं कि जनरल सीसी ही वो मज़बूत आदमी हैं जिनकी देश को सर्वाधिक ज़रुरत है.
पर बीबीसी संवाददाता का यह भी कहना है कि अगर जनरल सीसी राष्ट्रपति पद के चुनावों के खड़े हो कर जीत जाते हैं, जिसकी प्रबल संभावना है, तो वो बेहद ताकतवर हो जाएंगे. राष्ट्रपति बन जाने की सूरत में जनरल सीसी पूरी तरह से देश में लोकतंत्र बहाल करने वाली योजना पर काबिज़ हो जाएंगे.
राष्ट्रपति मोरसी को अपदस्थ करने के ख़िलाफ़ लड़ रहे मुस्लिम ब्रदरहुड ने देश में शनिवार से 18 रोज़ के आंदोलन की शुरुवात की है.
<link type="page"><caption> कौन हैं मोहम्मद मोरसी? </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120624_mursi_profile_va.shtml" platform="highweb"/></link>

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तीन साल पहले राष्ट्रपति मुबारक को 18 दिन के आंदोलन के बाद ही सत्ता को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
मुस्लिम ब्रदरहुड से टकराव
मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड और इसके समर्थक राष्ट्री मोरसी को हटाए जाने के बाद से सेना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों के अब तक सैकड़ों जाने जा चुकी हैं और हज़ारों लोगों को ग़िरफ्तार किया जा चुका है.
देश की मौजूदा सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड को एक "आतंकी संगठन" करार दे दिया है. सरकार का दावा है कि पिछले कुछ समय से देश में बड़ी संख्या हो रहे हिंसक हमलों के पीछे मुस्लिम ब्रदरहुड का हाथ है. मुस्लिम ब्रदरहुड इस बात से इनकार करती आई है.
<link type="page"><caption> क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड? </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120624_profile_muslim_brotherhood_ml.shtml" platform="highweb"/></link>
मुस्लिम ब्रदरहुड के ख़िलाफ़ सरकारी कार्रवाई के साथ उन लोगों पर भी तेज़ी से कार्रवाई हुई है जिन्हें सेना विरोधी समझा जाता है. कई पत्रकार और धर्मनिरपेक्ष सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.
कई लोगों को डर है कि देश पर होस्नी मुबारक के ज़माने में काबिज़ सैन्य संगठन मिस्र को एक बार फिर से अपनी गिरफ़्त में ले रहे हैं.
चंद रोज़ पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि राष्ट्रपति मोरसी को हटाए जाने के बाद से मिस्र अभूतपूर्व पैमाने पर हिंसा का सामना कर रहा है.
संगठन ने मिस्र की सेना पर आरोप लगया था कि वह बड़े पैमाने पर लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन कर रही है और ताकत का बेजा प्रयोग कर रही है.
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