दक्षिण सूडान में सरकार और विद्रोहियों में युद्धविराम

दक्षिणी सूडान में पिछले एक महीने से संघर्ष चल रहा है
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अफ़्रीक़ी देश दक्षिणी सूडान में सरकार और विद्रोहियों के बीच युद्ध विराम पर सहमति हो गई है. दोनों पक्षों के बीच इथोपिया में हुई बातचीत के बाद ये फ़ैसला हुआ.

इथोपिया की राजधानी अदिस अबाबा के एक होटल में हुए इस समझौते के तहत दोनों पक्ष चौबीस घंटे के भीतर लड़ाई बंद कर देंगे.

बीबीसी से बातचीत में संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के आयुक्त एंटोनियो गुटर्स ने इस युद्धविराम का स्वागत किया और कहा कि इसकी सफलता के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए जाएंगे.

उन्होंने कहा, "युद्धविराम अपने आप में एक अच्छी ख़बर है क्योंकि दक्षिणी सूडान के लोगों को इसकी वजह से बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. क़रीब पांच लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, एक लाख लोग यूगांडा, कीनिया और इथोपिया में रहने को मजबूर हैं. पांच साल पहले वे अपने घरों को वापस आए थे और अब उन्हें फिर भागना पड़ा है. उनके लिए ये कितनी बड़ी त्रासदी है."

पिछले हफ़्ते सरकारी सेनाओं ने विद्रोहियों के क़ब्ज़े से दो प्रमुख शहरों को आज़ाद कराया था.

दक्षिणी सूडान में पिछले एक महीने से चल रहे संघर्ष के बीच क़रीब पांच लाख लोगों को वहां से विस्थापित होना पड़ा है.

सरकार की ओर से प्रमुख वार्ताकार हियाल डेंग ने इस समझौते के बाद विद्रोहियों से हिंसा समाप्त करने की अपील की.

डेंग का कहना था, ''हमलोग इस मौक़े पर विद्रोही गुटों से अपील करना चाहेंगे कि वे हिंसा के ज़रिए राजनीतिक सत्ता हासिल करने का इरादा तर्क कर दें. हमलोगों को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि शांतिपूर्ण और प्रजातांत्रिक तरीक़े से सत्ता हस्तांतरित करने की हमारी योग्यता पर आम जनता विश्वास न खोए. क्योंकि अगर वे विश्वास खो देते हैं तो हमारे समाज में निश्चित तौर पर एक विस्फोट होगा.''

विद्रोहियों की तरफ़ से प्रमुख वार्ताकार तबन डेंग ने इस बात से इनकार किया कि उनका इरादा सरकार का तख़्ता पलट करना है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी से बात करते हुए तबन डेंग ने कहा, "हमेशा से हमारी मंशा यही रही है कि राजनीतिक प्रक्रिया में सुधार हो और शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता का हस्तांतरण हो. हमलोग जेलों में सड़ रहे अपने साथियों की रिहाई की मांग करते हैं ताकि राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए अगली राजनीतिक बातचीत में वे हिस्सा ले सकें."

सरकार को संदेह

हालांकि दक्षिणी सूडान की सरकार को इस बात पर संदेह है कि विपक्ष लड़ाई में शामिल सभी पक्षों पर नियंत्रण रखने में सफल हो पाएगा या नहीं.

इस समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत स्थगित कर दी गई है और अब अगले दौर की बातचीत सात फ़रवरी को होगी.

दोनों पक्षों के बीच विवाद की शुरूआत पिछले साल 15 दिसंबर को तब हुई थी जब राष्ट्रपति सल्वा कीर ने उप राष्ट्रपति रिएक मचार पर उनका तख़्ता पलटने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था.

संघर्ष के कारण हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है

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मचार ने इस आरोपों से इनकार करते हुए अपने 11 सहयोगियों को बिना शर्त रिहा करने की मांग की थी जिन्हें कथित साज़िश के आरोप में पकड़ा गया था.

बुधवार को राष्ट्रपति सल्वा कीर ने क्षेत्रीय मध्यस्थता में बातचीत में शामिल होने के लिए इन लोगों को रिहा करने की पेशकश की थी.

नवीनतम राष्ट्र

लेकिन साथ ही कहा था कि बातचीत के बाद इन लोगों को वापस क़ैद में लौटना होगा. मशार के सहयोगियों ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था.

दक्षिण सू़डान विश्व का नवीनतम देश है जो सूडान से वर्ष 2011 में अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर अस्तित्व में आया था.

यह अफ़्रीक़ी महाद्वीप के केंद्र में स्थित है और इसकी सीमा छह देशों से सटी है.

यह प्राकृतिक तेल के लिहाज़ से संपन्न देश है. पिछले कुछ सालों से यहां गृह युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है.

वैसे यह दुनिया के सबसे कम विकसित इलाक़ों में शामिल है. यहां केवल 15 फ़ीसदी नागरिकों के पास ही मोबाइल फ़ोन मौजूद है.

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