दक्षिणी सूडानः सफ़ेद सेना से डर के साए में बोर शहर

दक्षिणी सूडान, जातीय हिंसा
इमेज कैप्शन, जातीय हिंसा के बाद दक्षिणी सूडान में हज़ारो लोग शरणार्थी शिविरों में शरण ले रहे हैं.

दक्षिण सूडान की सरकार ने कहा है कि वो सामरिक महत्व के शहर बोर की हर हालत में सुरक्षा करने के लिए तैयार हैं.

ख़बरें हैं कि विद्रोही नेता रियक माचर के हज़ारों हथियारबंद समर्थक शहर की ओर बढ़ रहे हैं.

राष्ट्रपति के प्रवक्ता एटेनी वेक एटेंग ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि सेना बोर शहर में पूरी तरह से तैयार है और अगर विद्रोही सैनिक सोमवार को शहर में घुसने की कोशिश करते हैं तो सेना मशीनगनों का इस्तेमाल करेगी. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी है कि वो इस समस्या का कोई शांतिपूर्ण हल तलाश करे.

राष्ट्रपति के प्रवक्ता एटेनी वेक का कहना था, ''अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले से अलग-थलग है. रियक माचर को ऐसा करने से रोकने के लिए अतंरराष्ट्रीय समुदाय आगे नहीं आ रहा है. लेकिन अगर लगभग 25 हज़ार लड़ाके यहां आते हैं और एक ऐसी लड़ाई सड़ते हैं जो वे जीत नहीं सकते तो इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादही ही ज़िम्मेदार होगी.''

उन्होंने कहा कि हिंसक झड़पों की ख़बरें पहले से ही आ रही हैं. उन्होंने पहले आ रही उन ख़बरों का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि बड़े-बुज़ुर्गों के समझाने पर वे लड़ाके वापस लौट गए हैं.

उन्होंने आगे कहा, ''हमें मालूम है अभी भी उनका मूवमेंट जारी है. आज दोपहर में वो बोर शहर से 48 किलोमीटर दूर थे. ऐसा लगता है कि वो इस बात के लिए अड़े हुए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर वो यहां आकर लड़ाई नहीं करते हैं तो इससे उनके क़बीले की काफ़ी बदनामी होगी. अधिकतर लड़ाके आगे बढ़ रहे हैं और जो वापस लौटे थे उनको बुज़दिल कह कर उनका मज़ाक़ उड़ाया गया. लगभग 20 हज़ार लड़ाके आगे की ओर बढ़ रहे हैं.''

संयुक्त राष्ट्र ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि हथियारों और डंडो से लैस समर्थकों के पास कोई सैन्य प्रशिक्षण नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता जो कंट्रेरस के अनुसार यूएन इस समूह की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण उड़ानों का सहारा ले रहा है.

दक्षिणी सूडान
इमेज कैप्शन, जातीय हिंसा के बाद लोग ख़राब स्थिति में रहने को मजबूर हैं.

इस महीने सूडान में हुए <link type="page"><caption> जातीय संघर्ष </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindihttps://twitter.com/BBCHindihttps://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>में क़रीब एक हज़ार लोगों की मौत हो गई थी. एक लाख 21 हज़ार छह सौ से ज़्यादा लोगों के बारे में कहा जाता है कि वो अपने घरों को छोड़कर भाग गए हैं.

जारी है लड़ाई

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी कैंपों में दस हज़ार नागरिकों ने शरण माँगी है. उनको सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अतिरिक्त सेना भेजी जा रही है.

सरकार ने संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा है, लेकिन सेना का कहना है कि उत्तर में अभी भी लड़ाई जारी है.

पूर्व उपराष्ट्रपति रायक माचर और राष्ट्रपति सलवा कीर के बीच शुरू हुए <link type="page"><caption> सत्ता के संघर्ष </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131225_south_sudan_conflicts_pk.shtml" platform="highweb"/></link>ने आदिवासी इलाक़ों में जातीय हिंसा का रूप ले लिया है.

बोर शहर पर सेना का नियंत्रण स्थापित हो गया है, जोंगलाई स्टेट की राजधानी को उन्होंने विद्रोहियों के कब्ज़े से मुक्त करा लिया है.

सफ़ेद सेना से ख़तरा

इस शहर की गलियों में घूमने वाले लोग न्यूर मिलिशिया जनजाति के हैं, इनको सफ़ेद सेना के रूप में भी जाना जाता है. कीड़ों से बचाव के लिए ये अपने शरीर पर सफ़ेद राख मलते हैं.

दक्षिणी सूडान की सरकार के प्रवक्ता को यह कहते हुए दिखाया गया है कि इनकी संख्या 25,000 के आसपास है, जो पूर्व राष्ट्रपति रायक मचार के समर्थक हैं, लेकिन इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है.

संयुक्त राष्ट्र मिशन के एक प्रवक्ता जो कंट्रेरस के मुताबिक़ सफ़ेद सेना माचर के सीधे आदेशों को नहीं मान रही है. उनके मुताबिक़ यह समूह हिंसक है और इनके बारे में भविष्यवाणी संभव नहीं है. यह दक्षिणी सूडान में अस्थिरता उत्पन्न कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "उनके पास सैन्य अनुभव और अनुशासन की कमी है, वो संघर्ष शुरू होने के बाद से रायक माचर के समर्थन में लड़ रहे हैं. इससे बोर शहर में मासूम लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है."

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