यूक्रेन में प्रदर्शनकारियों से निपटने को नया क़ानून

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यूक्रेन में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए बनाया गया नया क़ानून बुधवार से प्रभाव में आ गया है जिसके तहत सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ज़्यादा सख्त कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है.
इस क़ानून के तहत सरकारी इमारतों की नाकाबंदी करने, सार्वजनिक जगहों पर तंबू गाड़ने और विरोध प्रदर्शनों के दौरान मुखौटा और हैलमेट पहनने वालों को गिरफ़्तार किया जा सकता है और उन्हें पाँच साल तक की सज़ा हो सकती है.
इस बीच प्रधानमंत्री मिकोला अज़ारोव ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आए तो उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
अज़ारोव ने रशियन टीवी पर कहा कि प्रदर्शनकारियों ने टकराव का अपना रवैया बंद नहीं किया तो सरकार के पास नए क़ानून के तहत कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा.
जमावड़ा

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राजधानी <link type="page"><caption> कीएफ़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/07/120704_ukrain_russian_rn.shtml" platform="highweb"/></link> में पिछली दो रातों के दौरान प्रदर्शन में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं.
प्रदर्शनकारी गत नवंबर से कीएफ़ के बाहरी इलाक़े में तंबू गाड़कर डटे हुए हैं. वे सरकार के के साथ प्रस्तावित संधि को खारिज किए जाने और रूस के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने के क़दम से रोष में हैं.
बीबीसी के डेनियल सैंडफोर्ड के अनुसार कीएफ़ में संसद की ओर जाने वाली सड़कों पर अब भी सुरक्षाकर्मियों का जमावड़ा है.

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स्थानीय मीडिया ने यूक्रेन के गृह मंत्रालय के हवाले से बताया कि 32 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया है जिनमें से 13 को क़ानून व्यवस्था भंग करने के मामले में 15 साल तक की जेल हो सकती है.
संवाददाताओं के मुताबिक़ यह हिंसा रशेविस्की स्ट्रीट तक ही सीमित है जो कि जो मुख्य प्रदर्शन स्थल के क़रीब है. शहर में बाक़ी स्थानों पर कामकाज सामान्य चल रहा है.
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