अरियल शेरॉन: किसी के नायक, किसी के लिए 'क़साई'

अरियल शेरॉन
इमेज कैप्शन, पिछले आठ साल से कोमा में थे शेरॉन

इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की यादें हमेशा राष्ट्र के दिल में रहेंगी जबकि राष्ट्रपति शिमोन पेरेत्ज़ ने उन्हें इसराइल के सबसे महान नेताओं में से एक बताया है.

इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. साल 2006 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से ही वे कोमा में थे.

जिस समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा वे राजनीतिक जीवन के शीर्ष पर थे. शेरॉन के निधन पर पेरेत्ज़ ने उन्हें एक बहादुर सैनिक बताया.

इसराइली राष्ट्रपति ने कहा कि शेरॉन इसराइल के महान रक्षक थे जिनके लिए डर कोई चीज ही नहीं थी.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि शेरॉन ने अपना सारा जीवन इसराइल को समर्पित कर दिया जबकि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा कि उनके लिए ये सम्मान की बात है कि उन्होंने शेरॉन के साथ काम किया.

गज़ा में जश्न

वहीं फ़लस्तीनी पक्ष की तरफ़ से बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया आई है. एक फ़लस्तीनी राजनेता मुस्तफा बारग़ौती ने कहा कि शेरॉन ने युद्ध और आक्रामकता का रास्ता चुना था और इसलिए फ़लस्तीनियों के बीच उनकी कोई अच्छी यादें नहीं हैं.

अरियल शेरॉन
इमेज कैप्शन, गज़ा में शेरॉन की मौत पर ख़ुशी का इजहार किया गया

गज़ा पट्टी में शेरॉन की मौत का जश्न मनाया जा रहा है जहां लोग मिठाइयां बांट रहे हैं.

गज़ा पट्टी में सरकार चलाने वाले कट्टरपंथी संगठन हमास का कहना है कि शेरॉन की मौत से एक ऐसे अपराधी का अंत हुआ जिसके हाथ फ़लस्तीनियों के ख़ून से रंगे थे.

अल जज़ीरा और अल अरबिया जैसे अरबी समाचार चैनलों ने अपनी कवरेज में शेरॉन की मौत को बहुत कम महत्व दिया है.

इसरायल के लोग अपने पूर्व प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन को उनकी नीतियों के कारण 'बुलडोज़र' कहते थे लेकिन फ़लस्तीनी लोग उन्हें 'द बुचर' या 'कसाई' कहते थे.

'साहसी नेता'

शेरॉन के बारे में कहा जाता था कि वो 'मोटी चमड़ी' के आदमी हैं उन्होंने कभी अरब और यहां तक कि इसराइलियों की पसंद या नापंसद की फ़िक्र नहीं की.

इसराइली सेना और फिर राजनीति में उच्च पदों पर रहे शेरॉन का सिर्फ़ एक ही मक़सद रहा - अपनी शर्तों पर इसराइल को पूरी सुरक्षा मुहैया कराना.

इसराइल के इतिहास में उन्होंने पहले एक जनरल और फिर राजनेता होने के नाते अहम भूमिका निभाई लेकिन वो हमेशा विवादास्पद व्यक्ति रहे.

मध्य पूर्व के लिए अमरीका के दूत रह चुके डेनिस रॉस ने बीबीसी से कहा कि शेरॉन की छवि विवादास्पद चीज़ें करने वाले नेता की रही है लेकिन उनमें ऐसे कदम उठाने का साहस था, जो चंद ही लोग उठा पाते हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि शेरॉन ने 1948 में आज़ादी के युद्ध में हिस्सा लिया और 2006 में कोमा में जाने से पहले इसराइल में शायद ही कोई ऐसा बड़ा राष्ट्रीय घटनाक्रम रहा हो जिसका हिस्सा शेरॉन नहीं थे.

वो 2001 और उसके बाद 2005 में इसराइल के प्रधानमंत्री बने. शेरॉन के प्रधानमंत्री रहते फ़लीस्तीनियों के साथ इसराइल के संबंध बेहद उथल-पुथल का शिकार रहे.

'वो चले गए'

अरियल शेरॉन
इमेज कैप्शन, अरियल शेरॉन अपनी आक्रामक नीतियों के लिए जाने जाते थे

बतौर रक्षा मंत्री जब शेरॉन ने 1982 में लेबनान पर हमले का आदेश दिया तो उनके ईसाई लेबनानी सहयोगियों ने साबरा और शातिला के शिविरों में सैकड़ों फलस्तीनी आम लोगों की हत्या कर दी थी.

एक इसराइली आयोग ने उन्हें इसका जिम्मेदार पाया और उन्हें रक्षा मंत्री का पद छोड़ना पड़ा था.

वर्ष 2000 में येरुशलम की सबसे पवित्र मस्जिद में शेरॉन के दौर से फलस्तीनी विद्रोह शुरू हुआ, लेकिन उसके अगले साल ही इसराइली जनता ने उससे सत्ता सौंप दी.

शेरॉन को 2005 में ग़जा से इसराइली सैनिक हटाने पर कड़े घरेलू विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियों के विस्तार को बढ़ावा दिया ताकि फलस्तीनियों को इसराइल से बाहर रखा जा सके.

अरियल शेरॉन के दो बेटों में से एक गिलाद शेरॉन ने अस्पताल के बाहर कहा, "वो चले गए हैं. वो तभी गए जब उन्होंने जाने का फैसला किया था."

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