खराब सेहत के चलते मुशर्रफ़ की गिरफ़्तारी का आदेश नहीं

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह के मुकदमे की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने उनकी गिरफ़्तारी के आदेश न देने का फैसला किया है.
अदालत का कहना है कि वारंट जारी न करने का फैसला मुशर्रफ की तबियत खराब होने के चलते किया गया है.
परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में गुरुवार को अदालत में पेश किया जाना था लेकिन अदालत जाते हुए रास्ते में अचानक उनकी तबियत खराब हो गई.
रास्ते में 'दिल में दर्द' की शिकायत के बाद मुशर्रफ को रावलपिंडी स्थित सेना के कार्डियोलॉजी अस्पताल भेजा गया है.
यह तीसरा मौका है जब पूर्व राष्ट्रपति अदालत के सामने पेश नहीं हुए हैं. इससे पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मुशर्रफ़ अदालत नहीं गए थे.
अस्पताल के सूत्रों ने बीबीसी उर्दू को बताया कि पूर्व सैन्य राष्ट्रपति की तबियत पहले से बेहतर है.
अदालत ने उन्हें गुरुवार को भी उपस्थिति से छूट देते हुए कहा है कि अब इस मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी को फिर से की जाएगी.
इस मामले में अभियोजन पक्ष के वकील अकरम शेख का कहना था कि आरोपी परवेज मुशर्रफ को सभी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी लेकिन अदालत उनके वारंट गिरफ्तारी जारी करे ताकि कानूनी ज़रुरतें पूरी की जा सकें. उन्होंने कहा कि अदालत इससे पहले आरोपी दो बार अदालत में पेश होने के लिए समन जारी कर चुकी है.

मुशर्रफ के वकील डॉ. खालिद का कहना था कि उनके मुवक्किल अदालती आदेश का पालन करते हुए अदालत में पेश हो रहे थे और अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई. उन्होंने कहा कि अदालत उनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी न करे.
मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा उनके वर्ष 2007 के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने देश में आपातकाल लागू करने के आदेश दिए थे. जबकि पूर्व राष्ट्रपति इन आरोपों से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि उनके ख़िलाफ़ लगाए गए सारे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.
'बीमारी संदेहास्पद'
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मुशर्रफ़ को किस तरह की दिल की परेशानी है. उनके एक सहयोगी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया की 'उनकी हालत ख़राब है'.
जबकि इस्लामाबाद स्थित विशेष अदालत में मौजूद बीबीसी के एम इलियास खान ने कहा, "पाकिस्तान में बहुत से लोगों का मानना है कि उनकी बीमारी की खबरें संदेहास्पद हैं क्योंकि अपने बचाव में वह ये तरीका अपनाते हैं, जिसके बारे में बचाव दल का कहना है कि इससे उन्हें अदालत के समक्ष पेश होने से छूट मिलती रही है."
पूर्व राष्ट्रपति का पिछले एक वर्ष का अधिकांश समय वर्ष 1999 से 2008 के दौरान उनके सत्ता से संबंधित मामलों को लेकर लगाए गए आरोप में नजरबंद रहते हुए गुजरा है. हालांकि मुशर्रफ़ को अभी इन सभी मामलों में ज़मानत मिली हुई है.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तानियों का मानना है कि नवाज़ शरीफ़ की सरकार देश में चल रही समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए मुशर्ऱफ के खिलाफ मुकदमे का इस्तेमाल कर रही है.
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