चीन: लोग 'मिर्ची' से सिरदर्द का इलाज करते थे?

मिर्च

चीन में पिछले दिनों एक निर्माण स्थल पर बाँस की कुछ खपच्चियाँ मिली हैं, जिनसे संकेत मिलते हैं कि दो हज़ार साल पहले वहाँ लोग किस तरह से अपनी बीमारियों का इलाज करते थे.

बाँस के इन खपच्चियों पर लिखी इबारतों से पता चलता है कि वे सिरदर्द का इलाज मिर्च जैसे किसी फल से करते थे और सांड़ के मूत्र से पीलिया ठीक किया जाता था.

चीन के अखबार <link type="page"><caption> 'चाइना डेली'</caption><url href="http://www.chinadaily.com.cn/china/2013-12/18/content_17183258.htm" platform="highweb"/></link> की खबर के मुताबिक ऐसी 920 बाँस की खपच्चियाँ मिली हैं जिन पर इस तरह की सलाह लिखी हुई है.

उस जमाने में कुछ लिखने के लिए बाँस की खपच्चियाँ ही ज्यादातर इस्तेमाल में लाई जाती थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चेंगदू शहर के दक्षिण पश्चिमी इलाके में एक निर्माण स्थल पर बाँस की ये खपच्चियाँ बरामद की गईं.

इस इलाके में पश्चिमी हान वंश के अन्य अवशेष भी प्राप्त हुए हैं. इस राजवंश का काल ईसा से 206 साल पहले का माना जाता है.

मेडिकल साहित्य

बाँस की खपच्चियों पर लिखी इबारतों में से कुछ के बारे में ये अंदाज़ा है कि ये घोड़ों के डॉक्टर के काम आने वाले नुस्खे हैं जबकि इनमें से कुछ इंसानी बीमारी से संबंधित हैं.

चेंगदू पुरातत्व संस्थान के शी ताओ का कहना है कि बियान क्वे के उत्तराधिकारियों का लिखा मेडिकल साहित्य गुम ही हो जाता.

बियान क्वे को चीन के सबसे पुराने ज्ञात डॉक्टरों में शुमार किया जाता है.

कहते हैं कि बियान क्वे ने ही नब्ज पकड़ने का हुनर सिखाया था, उन्होंने ही मरीज को बेहोश या किसी अंग को सुन्न करने का तरीका बताया.

किवंदती ये भी है कि बियान क्वे ने ही पहली बार अंग प्रतिरोपण भी किया था.

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