क्या दवा बाज़ार में बंद होगी रिश्वतखोरी?

जानीमानी दवा कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (जीएसके) ने अपनी दवाओं के प्रचार के लिए डॉक्टरों को भुगतान बंद करने की घोषणा की है.
दुनिया की बड़ी कंपनियों में शुमार और ब्रिटेन की सबसे बड़ी दवा कंपनी जीएसके के इस क़दम से दवा बाज़ार में एक नई उम्मीद की किरण जगी है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मंगलवार को कंपनी के हवाले से कहा कि जीएसके मेडिकल कॉंफ्रेंस में हिस्सेदारी करने वाले स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों को भुगतान करना बंद कर देगी.
जीएसके के इस क़दम से दूसरी कंपनियों को भी ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है क्योंकि हाल के समय में आक्रामक मार्केटिंग रणनीतियों के लिए पूरे दवा उद्योग को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.
अच्छी शुरुआत
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के सम्पादक फियोना गोल्डी ने रॉयटर्स को बताया कि, ''जीएसके ने एक बढ़िया शुरुआत की है और उम्मीद की जानी चाहिए कि बाकी दवा निर्माता कंपनियां भी इसका अनुसरण करेंगी.''
<link type="page"><caption> दवा कंपनी भरेगी 3 अरब डॉलर का हर्जाना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2012/07/120702_pharma_gsk_tb.shtml" platform="highweb"/></link>
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल चिकित्सा के पेशे में दवाओं को प्रमोट करने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने में आगे रहा है.
फियोना गोल्डी के अनुसार, ''दवाओं को व्यावसायिक दबावों से पूर्ण रूप से मुक्त करने की राह अभी लंबी है. डॉक्टर और उनके समूह सहज ही समझौता कर लेने के आदी हो गए हैं.''
जीएसके अकेली नहीं
हालांकि एक अन्य कंपनी एस्ट्राजेनेका ने 2011 में कहा था वो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में डॉक्टरों को हिस्सेदार बनाने के लिए दिए जाने वाले भुगतान को ख़त्म करने जा रही है.

लेकिन किसी भी अन्य दवा कंपनी ने उसका अनुसरण नहीं किया.
लेकिन जीएसके का फ़ैसला एस्ट्राजेनेका के क़दम से आगे जाता है. कंपनी ने न सिर्फ सम्मेलनों में भुगतान को निरस्त करने की बात कही है बल्कि बाज़ार में दवा प्रोत्साहन से संबंधित अन्य तरीक़ों को भी बंद करने की भी घोषणा की है.
एमर्स्टडम स्थित एनजीओ हैल्थ एक्शन इंटरनेशनल के प्रमुख टिम रीड बड़ी दवा कंपनियों के कटु आलोचक हैं. उनका मानना है कि जीएसके के इस क़दम से बाक़ी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.
स्वनियमन कितना कारगर?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने टिम रीड के हवाले से कहा, ''मैं समझता हूं कि अन्य कंपनियां इसका अनुसरण करेंगी लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा है दवा बाज़ार स्वनियमन पर ज़ोर देता है. जबकि दवा प्रोत्साहन को कारगर ढंग से रोकने का केवल एक ही तरीक़ा है- राज्य द्वारा मजबूत क़ानून बनाकर इसे लागू करवाना.''
जीएसके के मुख्य कार्याधिकारी एंड्र्यू विट्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि इन कदमों से कंपनी की कोशिश है कि मरीज़ों के हितों का ध्यान सबसे पहले रखा जाए.
उन्होंने कहा, ''हम मानते हैं कि डॉक्टरों को दवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका हैं लेकिन यह स्पष्ट, पारदर्शी और हितों के टकराव के बिना होना चाहिए.''
जीएसके दवा बिक्री के व्यक्तिगत लक्ष्य की नीति को पूरी दुनिया में लागू करेगी.
कंपनी की योजना 2015 की शुरुआत तक एक नई क्षतिपूर्ति व्यवस्था को सभी देशों में लागू करना है.
<link type="page"><caption> चीन में घूसखोरी चलती रही है</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130812_bribe_china_gsk_rns.shtml" platform="highweb"/></link>
लेकिन क्या जीएसके का यह क़दम दवा बाज़ार के लिए मील का पत्थर बन सकता है?
जीएसके पर आरोप

बाज़ार विश्लेषक, आईजी, के एलिस्टर मैकेग कहते हैं, ''जीएसके के क़दम स्वागतयोग्य हैं लेकिन आशंका यह है कि उसे आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ सकता है. लेकिन जब तक अन्य कंपनियां इसका अनुसरण नहीं करतीं, तब तक उसे दिक़्क़त झेलनी पड़ सकती है.''
चीन में जीएसके बिक्री में रिश्वतखोरी के आरोपों से जूझ रही है.
कंपनी पर आरोप है कि बिक्री बढ़ाने की ख़ातिर रिश्वत देने के लिए ट्रेवल एजेंसियों को 50 करोड़ डॉलर का भुगतान किया था.
हालांकि जीएसके ने कहा है कि कंपनी द्वारा किए जा रहे उपाय चीन में उसके ऊपर लगे आरोपों से संबंधित नहीं हैं.
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