निगरानी कार्यक्रम से चिंतित बड़ी तकनीकी कंपनियाँ

विश्व की आठ बड़ी तकनीकी कंपनियों ने अमरीकी सरकार से अपील की है कि वो अपने निगरानी कार्यक्रम में व्यापक सुधार लाए.
गूगल, ऐपल, फ़ेसबुक, ट्विटर, एओएल, माइक्रोसॉफ़्ट, लिंकडेन और याहू ने एक साझा मंच बनाकर यह मांग की है.
कंपनियों के इस समूह ने अमरीकी राष्ट्रपति और कांग्रेस को एक <link type="page"><caption> साझा खुला पत्र</caption><url href="http://reformgovernmentsurveillance.com/" platform="highweb"/></link> लिखकर कहा है कि अमरीका का मौजूदा निगरानी कार्यक्रम अमरीकी जनता की 'स्वतंत्रता की अनदेखी' करता है.
<link type="page"><caption> अमरीकी सुरक्षा एजेंसी की नज़र करोड़ों मोबाइल फ़ोन पर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131205_washington_post_nsa_survellience_ar.shtml" platform="highweb"/></link>
इन कंपनियों ने यह पत्र अमरीका के निगरानी कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियां उजागर होने के बाद किया है.
इन कंपनियों ने इस पत्र में लिखा है, "हम समझते हैं कि अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार की ज़िम्मेदारी है. लेकिन इस साल लीक हुई जानकारियों के बाद वैश्विक स्तर पर सरकारी निगरानी कार्यक्रमों में सुधार की ज़रूरत है."
सुधार की ज़रूरत
इन कंपनियों की वेबसाइट पर मौजूद इस खुले पत्र में कहा गया है, "बहुत से देशों में यह संतुलन सरकार की तरफ़ बहुत ज़्यादा झुक गया है और आम नागरिकों को संविधान से मिले अधिकार काफी हद तक छिन गए हैं."
कंपनियों ने अपने खुले पत्र में लिखा है, "इससे हमारी स्वतंत्रता छिन रही है, जिससे हम सबको प्यार है."

इन आठ कंपनियों ने यह कदम सीआईए के पूर्व कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन की तरफ़ से अमरीकी सरकार के निगरानी कार्यक्रम के बारे में उजागर की गई जानकारियों के बाद उठाया है.
<link type="page"><caption> ऐसे खुल रही है 'अमरीकी जासूसी' की पोल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131030_nsa_unlocked_sb.shtml" platform="highweb"/></link>
इन कंपनियों ने कहा है कि उजागर की गई जानकारियों से पता चलता है कि निगरानी पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत है.
तकनीकी कंपनियों के इस समूह ने अमरीकी राष्ट्रपति और कांग्रेस से अपील की है, "हम अमरीकी सरकार से अपील करते हैं कि वो इन सुधारों की पहल करे ताकि सरकारी निगरानी कार्यक्रम अमरीकी कानूनों के दायरे में रहें."
सीईओ के बयान
इस साझा खुले पत्र के अलावा इन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने भी इस संदर्भ में बयान जारी किए हैं.
फ़ेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने कहा है, "सरकारी निगरानी कार्यक्रम के बारे में आई रिपोर्टों से पता चलता है कि इस बात की सख्त ज़रूरत है कि इस बारे में और खुलापन आए और सरकार जिस तरह सूचना जमा करती है, उसके लिए नई सीमा तय हो."

<link type="page"><caption> 'आपके फ़ेसबुक,ईमेल पर नज़रें गड़ाए है अमरीका'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130923_cyber_snooping_tb.shtml" platform="highweb"/></link>
ट्विटर के सीईओ के अनुसार, "ट्विटर अपने यूज़र्स के अधिकारों की सुरक्षा और उनके लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है."
अमरीका सरकार के निगरानी कार्यक्रम से जुड़ा ये मामला इसी साल जून में पहली बार ब्रिटेन के अख़बार 'गार्डियन' में प्रकाशित रिपोर्ट से सामने आया था. यह रिपोर्ट जिन दस्तावेज पर आधारित थी उन्हें सबसे पहले एडवर्ड स्नोडेन ने लीक किया था.
इसके बाद से ही इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि विभिन्न सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों से जुड़ी जानकारियों को सुरक्षा एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है.
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