नव-नाज़ी संगीत की पहचान के लिए ऐप

जर्मन पुलिस ने नव-नाज़ी या जातीय संगीत की पहचान के लिए एक स्मार्टफोन ऐप तैयार किया है.
एक जर्मन समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए तरीके पर चर्चा के लिए इस सप्ताह मंत्रियों की एक बैठक होगी. जर्मनी में इन दिनों नव-नाज़ी संगीत की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है.
सरकार का कहना है कि संगीत के चलन से चरमपंथी दल में युवाओं की भर्ती को बढ़ावा मिल रहा है.
जर्मन संविधान के तहत किसी भी माध्यम के ज़रिए नाज़ीवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने पर रोक है.
फिंगर प्रिंट्स की पहचान
सेक्सोनी के क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय में तैयार ये ऐप नव-नाज़ी रॉक संगीत के ऑडियो फिंगर प्रिंट्स की पहचान करता है.
इसे संगीत पहचान सेवा शाज़ाम के संदर्भ में नाज़ी शाज़ाम नाम दिया गया है जो स्मार्टफोन माइक्रोफोन का इस्तेमाल करके गाने के शीर्षक से पहचान कर पाएगा.
पुलिस, इंटरनेट रेडियो स्टेशनों या जन सभाओं में बजाए जाने वाले इस प्रकार के संगीत की पहचान करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है.
इससे पहले, पिछले वर्ष नाबालिगों को नुकसान पहुंचाने वाले मीडिया के फेडरल रीव्यू बोर्ड ने नव-नाज़ी या जातीय संगीत वाले 79 गानों की पहचान की थी.
हालांकि इस बात को लेकर अभी सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसे सिस्टम को बड़े स्तर पर लागू किया जा सकेगा.
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