जब फ़ेसबुक पढ़ाई के रास्ते में आए...

- Author, डेविड व्हिटी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नैरोबी
कीनिया के रहने वाले एक युवा सामाजिक उद्यमी ने फ़ेसबुक से जुड़े एक सवाल का हल खोजा है कि सोशल मीडिया को पढ़ाई की राह में रोड़ा बनने से कैसे रोका जाये.
20 साल के जोयेल अपनी पढ़ाई कभी पूरी नहीं कर पाए, उन्होंने महसूस किया कि सोशल मीडिया को ख़ुद से दूर धकेलने की बजाय उसे अपना लेना ही समस्या का समाधान है.
दुनिया भर के करीब-करीब 10 लाख से ज़्यादा लोग उनकी इस बात से सहमत होते जान पड़ते हैं, क्योंकि जैसे ही उनकी वेबसाइट गिगेविया डॉट कॉम लाइव हुई, पाँच हफ़्तों के भीतर ही इतने सारे लोगों ने यूज़र के रूप में यहां साइन इन कर लिया है.
अध्यापकों और स्कूलों के सामने हमेशा से ये समस्या रही है कि कक्षा में कैसे छात्रों को फ़ेसबुक का इस्तेमाल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे बच्चों का ध्यान दूसरी ओर जाता है.
लेकिन उन्हें ये भी पता है कि किशोरों को ऑनलाइन चैंटिंग की लत-सी लग गई है.
फ़ेसबुक का विकल्प
उनकी वेबसाइट स्कूलों और अध्यापकों को अपना हिस्सा बनने की इज़ाजत देती है, आप वेबसाइट में साइन इन करके कक्षा विशेष से जुड़ी पाठ्य सामग्री साझा कर सकते हैं.
इसमें एक व्यक्तिगत लायब्रेरी का हिस्सा भी है, जहाँ आप कक्षाके स्तर के अनुरूप किताबें साझा कर सकतें हैं और परामर्श वाले हिस्से में जाकर बच्चों को उपयोगी सुझाव दे सकते हैं.
ये सब कुछ एक ही वेबसाइट पर मौजूद है, जिसका इस्तेमाल आप सोशल मीडिया पर होने वाली चैट के लिए और दोस्तों के साथ कुछ साझा करने के लिए भी कर सकते हैं.
उनकी वेबसाइट को अंतरराष्ट्रीय वेब डेवलपर्स की टीम के साथ मिलकर बनाया गया है.
उपभोक्ता इसे आसानी से एक्सेस कर सकते हैं और इसकी दूसरी ख़ास बात ये है कि इसके उपभोक्ता दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं.
इसके 50 फ़ीसदी से ज़्यादा यूज़र अमरीका के हैं. बाकी तुर्की और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से हैं, जो कीनिया के मुकाबले ज़्यादा सक्रिय हैं.
स्कूल फ़ीस के लिए बारिश का पानी

जोयेल कीनिया की राजधानी नैरोबी में हमारे साक्षात्कार के लिए पैदल पहुंचे क्योंकि किसी ने उनकी कार में पीछे से टक्कर मार दी थी.
गलियों में सामान्य बैग और लैपटॉप के साथ उनको टहलते देखकर यक़ीन नहीं होगा कि ये व्यक्ति अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के साथ मंच साझा कर चुका है.
उनके जीवन की रोमांचक कहानी 14 साल की उम्र से शुरू होती है, जब वो अपने गाँव के अन्य लोगों के साथ पश्चिमी कीनिया के एक शहर में गंदे पानी से होने वाली बीमारी पेचिश की मार झेल रहे थे.
स्थानीय अस्पताल में उनके बिस्तर के चारों तरफ के लोगों की मौत हो गई थी, उन्होंने सोचा, "कुछ करने की ज़रूरत है."
उन्होंने साफ़ पानी तक के लिए ज़मीन की खुदाई की. इसके बाद उन्होंने पुरानी साइकिल के पहिए से एक पंप डिज़ाइन किया और पड़ोस के लोगों को पानी मुहैया करवाया.
उन्होंने पीने के पानी से अपना पहला व्यवसाय शुरू किया.
जब उनके पास फ़ीस के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते थे तो वे स्थानीय दूध की फैक्ट्री के गटर से बारिश का पानी इकट्ठा करते थे, उसको साफ़ करते थे और सूखे मौसम के दौरान बोतल में भरकर स्थानीय लोगों को बेचते थे.
हालांकि, फिर दोबारा कभी वो स्कूल नहीं गए और उन्होंने पिछले साल अपनी पानी की कंपनी 'स्काई ड्रॉप' को पाँच लाख डॉलर में एक इसराइली निवेशक को बेच दिया.
सफलता की कहानी
इस सफलता से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, उन्हें अफ्रीकी लीडरशिप एकेडमी में पारी शुरू करने का मौका मिला.
फॉर्ब्स की "थर्डी अंडर थर्टी" की सूची में अफ्रीका के सबसे बेहतरीन युवा उद्यमी के रूप में उनका नाम शामिल हुआ.
उन्हें कैलीफोर्निया की सिलिकॉन वैली में चोटी के खिलाड़ियों से भी मिलने का मौका मिला.
यहीं पर उनकी मार्क जुकरबर्ग के साथ मुलाकात हुई और उन्होंने कुछ ऐसी बात कही जो जोयेल के मन में बैठ गई.
जोयेल बताते हैं, "अगले दो साल में एक नई कंपनी आएगी जो शून्य से 20 करोड़ यूज़र्स तक पहुंच जाएगी."
वे कहते हैं, ''मैं बैठकर उनकी बात सुन रहा था और सोचा- अरे! निश्चित रूप से मैं ही वो आदमी हूँ."
उनकी धीमी आवाज़ से उनका आत्मविश्वास झलकता है कि जब वो कुछ ठान लेते हैं तो कर दिखाते हैं.
वो बताते हैं, "मैंने सीखा है कि सफल होने के लिए दृढ़ निश्चय और कठिन मेहनत बहुत ज़रूरी है, अगर आप ऐसा करते हैं तो दुनिया खड़ी होकर आपका स्वागत करती है. अगर आप अपने प्रयासों में 100 फ़ीसदी समर्पण दिखाते हैं तो आप निश्चित रूप से सफल होते हैं."
सोशल मीडिया और शिक्षा

व्यवसाय में सामाजिक पहलू के मिश्रण के कारण उनका पहला साहसिक उद्यम "स्काई ड्रॉप" सफल रहा और <link type="page"><caption> इंटरनेट प्लेटफार्म</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/11/131122_internet_censorship_tim_berners_vr.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए भी यह बात सटीक तौर पर लागू होती है.
ये लोगों के लिए मुफ़्त है. लेकिन 100 से अधिक बच्चों की संख्या वाले स्कूलों को इसके लिए भुगतान करना होगा. उनको उम्मीद है कि ये भविष्य में वित्तीय रूप से भी सफल होगा.
वो कहते हैं, "मैं कुछ भी नहीं था, हमारे पास कोई पैसा नहीं था और जब मैं युवा था, हमेशा धनी बनना चाहता था. मैं लोगों को उनका जीवन बेहतर करने में मदद करना चाहता हूं, लेकिन मैं एक उद्यमी भी हूँ और सफल होना चाहता हूँ."
उन्होंने अपनी वेबसाइट का किसी तरह का प्रमोशन नहीं किया गया है और न ही इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया है. इसके अब तक 10 लाख से अधिक यूज़र बन गए हैं.
उनकी वेबसाइट शिक्षा और सोशल मीडिया का मिलाजुला रूप है. उन्हें उम्मीद है कि ये युवाओं के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने का तरीका बदल देगी.
वो कहते हैं, "हम शिक्षा और सोशल मीडिया को एक सार्थक ढंग से जोड़ रहे हैं."
उनका लक्ष्य बहुत ऊंचा है और साल 2014 तक वो चाहते हैं कि उनकी गिगेविया डॉट कॉम के 15 करोड़ यूज़र हो जाएं.
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