मिस्र में हटेगा आपातकाल और कर्फ्यू

मिस्र की सरकार ने कहा है कि देश में तीन महीने से लागू आपातकाल और रात्रिकालीन कर्फ्यू हटाया जा रहा है.
अदालत के एक फ़ैसले के बाद आपातकाल उम्मीद से दो दिन पहले ही हटा जा रहा है.
प्रधान मंत्री के एक सलाहकार ने बताया था कि आपातकाल मंगलवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर चार बजे यानी 1400 जीएमटी पर ख़त्म हो गया था. लेकिन सरकार ने बाद में कहा कि वो अभी फैसले की कॉपी का इंतज़ार कर रही है.
सुरक्षा बलों के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों का धरना ज़बरदस्ती ख़त्म करवाने के बाद 14 अगस्त को आपातकाल और रात का कर्फ्यू लगाया गया था.
शुरुआत में आपातकाल और कर्फ्यू एक महीने के लिए था लेकिन 12 सितंबर को सरकार ने इसे दो महीनों के लिए बढ़ा दिया.
प्रधान मंत्री हाज़ेम अल-बेबलावी के एक सलाहकार ने बीबीसी से पुष्टि की कि आपातकाल और कर्फ्यू मंगलवार स्थानीय समयानुसार दोपहर चार बजे यानी 1400 जीएमटी पर हटा लिया गया.
सरकार को ये कदम तब उठाना पड़ा जब एक प्रशासनिक अदालत ने फैसला दिया कि आपातकाल और कर्फ्यू बढ़ाने का आदेश सिर्फ़ दो महीने की लागू रह सकता है.
लेकिन इसके बाद मंत्रिमंडल ने एक वक्तव्य में कहा कि सरकार इस फैसले को लागू करने से पहले फैसले की लिखित कॉपी का इंतज़ार कर रही है.
वक्तव्य में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि सेना-समर्थित सरकार अदालत का फ़ैसला मानेगी.
आपातकाल की वजह

आपातकाल और रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक के कर्फ्यू के दौरान अधिकारी, बिना वॉरंट गिरफ़्तारियां कर सकते थे और लोगों के घरों की तलाशी ले सकते थे.
ऐसे समय जब सरकार रोज़गार के नए मौके बनाने और अर्थव्यवस्था को बहाल करने की कोशिश कर रही थी, तब कई लोगों ने राजधानी काहिरा में कारोबार कम होने के लिए कर्फ्यू को ज़िम्मेदार ठहराया था.
कर्फ्यू और आपातकाल उस वक्त लागू किया गया जब काहिरा में मुर्सी समर्थकों के शिविरों को हटाने के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए.
मोहम्मद मुर्सी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मिस्र के पहले राष्ट्रपति हैं. लेकिन उनके शासन के खिलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद इस वर्ष जुलाई में सेना ने उन्हें पद से हटा दिया.
फिलहाल उन पर साल 2012 में राष्ट्रपति महल के बाहर कथित रूप से प्रदर्शनकारियों की हत्या करने के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा चल रहा है.
विवादास्पद विधेयक
साल 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति होसनी मुबारक के खिलाफ़ व्यापक प्रदर्शनों के चलते उनके सत्ता से हटने से पहले मिस्र वासियों को तीन दशकों से ज़्यादा समय तक आपातकाल में रहना पड़ा था. इस दौरान सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार थे.
इस बीच सार्वजनिक प्रदर्शनों के बारे में नए क़ानून को अभी तक अंतरिम राष्ट्रपति अदली महमूद मंसूर ने मंज़ूरी नहीं दी है.
काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता ओर्ला गुएरिन के मुताबिक इस विधेयक का मसौदा विवादों में घिरा रहा है क्योंकि इसके तहत सार्वजनिक प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगना लगभग तय है और इससे पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए व्यापक अधिकार मिल जाएंगे.
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