मैनचेस्टर में छापे के दौरान मिला 3डी प्रिंटर और बंदूक के भाग

वैज्ञानिक ऐसा 3डी प्रिंटर बनाने की कोशिश कर रहे है जिससे दवाएं बनाई जा सके
इमेज कैप्शन, वैज्ञानिक ऐसा 3डी प्रिंटर बनाने की कोशिश कर रहे है जिससे दवाएं बनाई जा सके

मैनचेस्टर में एक छापे के दौरान पुलिस ने एक 3डी प्रिंटर और घर में बनी संदिग्ध बंदूकों के कुछ भागों को ज़ब्त कर लिया है.

मैनचेस्टर के ज़िले वाइथनशॉ से एक छापे के दौरान गोलियां रखने वाली प्लास्टिक से बनी एक मैगज़ीन और ट्रिगर ज़ब्त किए गए हैं. जासूसों को संदेह है कि कि अगर इन दोनों को एक साथ जोड़ दिया जाए तो इससे एक बंदूक बन सकती है.

ग्रेटर मैनचेस्टर की पुलिस का कहना है कि फ़ोरेंसिक विशेषज्ञ अब ये पड़ताल कर रहे है कि क्या इन भागों को मिलाकर एक बंदूक बनायी जा सकती है या नहीं.

इस सिलसिले में एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी भी हुई है. इस व्यक्ति को गनपाउडर बनाने के संदेह में हिरासत में ले लिया गया है.

जांच पड़ताल

पुलिस के एक प्रवक्ता का कहना है कि अगर जांच पड़ताल में ये पता चल जाता है कि इन भागों को हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है तो इंग्लैंड में 'पहली बार ये इस तरह ज़ब्त करने की कार्रवाई होगी.'

3प्रिंटर दरअसल एक विशिष्ट प्रकार के प्लास्टिक जैसी सामग्री का परत दर परत निर्माण करता है. जिससे एक ठोस वस्तु बनती है.

अमरीका में पहली बार 3डी बंदूक का इस्तेमाल किया गया
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दुनिया में 3डी प्रिंटर की तकनीक से बनी बंदूक का पहली बार इस्तेमाल अमरीका में किया गया था.

डिफ़ेंस डिस्ट्रिब्यूटिड नाम की जिस संस्था ने जो बंदूकें बनाईं हैं उनका कहना है कि वो इसके ब्लू प्रिंट ऑनलाइन पर लाने की योजना बना रहा है.

वहीं यूरोप के कानून लागू करने वाली संस्था यूरोपुल का कहना था कि उसे इस तकनीक के अपराधियों के हाथ में जाने का ख़तरा है क्योंकि इस तकनीक के सस्ते होने के साथ साथ इस्तेमाल भी आसान है.

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