चीनः लड़कियां ना पढ़ें 'लड़कों वाले' विषय

- Author, सीलिया हट्टन
- पदनाम, बीजिंग संवाददाता
बीते 100 सालों को यदि मुड़ कर देखें तो दुनिया भर में महिलाओं ने ऊंची उड़ान भरी है. मगर अपनी असाधारण कोशिशों के बावजूद उन्हें राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मोर्चों पर पुरुषों की तुलना में भारी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है.
बीबीसी अपने '100 वूमेन सीजन' सीरिज के जरिए जमाने भर की <link type="page"><caption> स्त्रियों की मौजूदा स्थिति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130828_first_woman_conductor_sk.shtml" platform="highweb"/></link> की पड़ताल कर रहा है. इस कड़ी में इस बार चीन में स्त्रियों के हालात.
ब्यूटीशियन या वकील? केक डेकोरेटर या रेडियो होस्ट? चीन में आजकल "आई हैव ए ड्रीम" थीम पार्क में बच्चों को बतौर करियर अलग-अलग विकल्पों के बारे में जानकारी दी जा रही है.
यहां छोटी बच्चियों को <link type="page"><caption> एयरहोस्टेस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130619_afghanistan_women_on_skies_pk.shtml" platform="highweb"/></link> की तरह कपड़े पहनने के सलीके सिखाए जा रहे हैं तो इसके विपरीत लड़कों को सुरक्षा गार्ड या कस्टम एजेंट बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
हकीकत तो ये है कि इस काल्पनिक दुनिया के बाहर चीन की असल दुनिया में भी स्त्री-पुरुष के बीच मौजूद लैंगिक भेदभाव देखे जा सकते हैं.
'मेन ओनली' पाठ्यक्रम

चीन में <link type="page"><caption> रूढिवादी सोच</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130401_britain_survey_dp.shtml" platform="highweb"/></link> के लोग चाहते हैं कि लड़कियां वे काम न करें जो लड़कें अब तक करते आए हैं. चीन के कई विश्वविद्यालयों और दूसरे क्षेत्रों में भी महिलाओं के प्रति यही नजरिया है.
बीजिंग से 600 किमी दक्षिण जाने पर चीन के पूर्वी प्रांत जिआंसु में 'चीनी खनन और प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय' (चाइना माइनिंग एण्ड टेक्नोलोजी यूनिवर्सिटी) है. यहां माइनिंग इंजीनियरिंग के कुछ छात्र एक प्रोफ़ेसर का लेक्चर बड़े ध्यान से सुन रहे हैं.
ये छात्र विश्विद्यालय के दूसरे छात्रों के लिए ईर्ष्या का विषय हैं. क्योंकि वे एक ख़ास पाठ्यक्रम 'ग्रीन कार्ड मेजर्स' पढ़ रहे हैं.
'ग्रीन कार्ड मेजर्स' पाठ्यक्रम ख़ास है क्योंकि स्नातक के बाद यह रोज़गार की तुरंत गारंटी देता है. मगर इससे भी बड़ी बात ये है कि ये पाठ्यक्रम 'मेन ओनली' है. यानि इसमें लड़कियां प्रवेश नहीं ले सकतीं.
इस बारे में यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ प्रोफेसर से बात करने पर उन्होंने कहा, "चीन का श्रम कानून खनन कार्य को महिलाओं के लिए अनुपयुक्त मानता है. हमने इसीलिए माइनिंग इंजीनियरिंग को पुरुषों तक सीमित रखा है."
सुरंग और नौपरिवहन
चीनी महिलाओं के साथ इस तरह का परंपरावादी रवैया अपनाने वाला यह अकेला विश्विद्यालय नहीं है. चीन में कई और विश्विद्यालय ऐसे हैं जो सुरक्षा का तर्क देते हुए महिलाओं को सुरंग और नौपरिवहन से जैसे विषयों से दूर रख रहे हैं.
उत्तरी चीन में स्थित डलियन विश्विद्यालय है. यहां लड़कियां नेवल इंजीनियरिंग (समुद्री अभियांत्रिकी) नहीं पढ़ सकतीं. इस विश्विद्यालय के एडमिशन ऑफिसर ने बीबीसी को इसका कारण ये बताया कि महिलाओं के लिए महीनों समंदर में किसी जहाज पर रहना कठिन है.

इसी से मिलती जुलती वजह बीजिंग की 'पीपल्स पुलिस यूनिवर्सिटी' में महिलाओं के प्रवेश पर लगी गंभीर रोक के बारे में पूछने पर बताई गई. इस विश्वविद्यालय में लड़कियों के लिए मात्र 10-15 फीसदी का कोटा है. जब एडमिशन ऑफिसर से वजह जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने पहले तो मिलने से इंकार कर दिया.
पुलिस महिला मंजूर नहीं
फिर 'पीपल्स पुलिस यूनिवर्सिटी' के एडमिशन ऑफिसर ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि बड़ी संख्या में महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए रोक लगाई गई है कि स्नातक के बाद उनके लिए काम के मौके बहुत कम हैं. इसके अलावा चीन में लोग पुलिस के रूप में किसी महिला को देखने के आदी नहीं हैं.
जिआंसु का खनन अभियांत्रिकी विभाग भी कुछ ऐसा ही सोचता है. वह मानता है कि महिलाएं खनन के भारी-भरकम मशीनों को उठाने में सक्षम नहीं हैं. इसके अलावा खान में कोई गंभीर या आपात स्थिति आने पर तुरंत वहां से निकलने में भी वे सक्षम नहीं हैं.
जिआंसु विश्विद्यालय के प्रोफेसर शू तर्क देते हुए कहते हैं, "कुछ काम तो महिलाओं के लिए एकदम फ़िट नहीं बैठते. अगर उन्हें ऐसे कामों के लिए बाध्य किया गया तो यह उनकी ऊर्जा की बर्बादी होगी."
महिलाओं के पक्ष में नेटवर्क
चीन के कई लोग महिलाओं को कुछ विषयों से दूर रखने के इन तर्कों से कतई <link type="page"><caption> सहमत नहीं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130308_women_rule_sa.shtml" platform="highweb"/></link> दिखते. छात्रों और वकीलों का छोटा मगर ताकतवर नेटवर्क महिलाओं पर लगी इन पाबंदियों के ख़िलाफ़ खड़ा है.
इस नेटवर्क के एक छात्र कार्यकर्ता का कहना है, "ये मुखर लैंगिक भेदभाव है. अगर कोई व्यक्ति खुद को कठिन काम में सक्षम समझता है, तो उसे वो काम करने देना चाहिए. "
वे आगे कहते हैं, "विश्विद्यालयों को महिलाओं पर इस तरह की पाबंदियां लगाने के बजाए उन्हें अपनी रुचि का काम करने देना चाहिए."

कार्यकर्ताओं का यह नेटवर्क पुरुषों के पक्ष में बनाए गए जेंडर कोटा के लिए भी अपनी आवाज उठा रहा है.
रिजल्ट में लैंगिक संतुलन की नीति
हाल के कुछ वर्षों में चीन में सभी मुख्य शिक्षण संस्थानों में लड़कियां लगातार टॉप कर रही हैं.
लड़कों के पिछड़ने के अंदेशे और परीक्षा परिणामों में लैंगिक संतुलन बनाए रखने के लिए स्कूल-कॉलेजों ने प्रवेश में लड़कियों के लिए ज्यादा नंबर और लड़कों के लिए कम नंबर का प्रावधान रखा है.
मगर चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीन के शिक्षा मंत्री का कहना है कि एडमिशन में सबके लिए बराबर का कोटा है, सिवाय सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों और जनसुरक्षा विषय की पढ़ाई पढ़ाने वाले कॉलेजों के.
जबकि कार्यकर्ताओं के अनुसार अनाधिकारिक तौर पर कई स्कूलों, कॉलेजों में कोटा सिस्टम चल रहा है.
शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के खिलाफ छिपा हुआ पूर्वाग्रह अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
महिला कार्यकर्ता जिओ मेई कहती हैं, "लैंगिक भेदभाव चीन के चप्पे चप्पे में मौजूद है. परंपरावादी लोग मानते आए हैं कि पुरुष महिलाओं से बेहतर होते हैं. मगर जबसे महिलाओं ने आगे बढ़ना शुरू किया है, वे अब उनके लिए समस्या नजर आती है."
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