पाकिस्तान सरकार से बातचीत को तैयार हकीमुल्ला महसूद

अफगानिस्तान से सटे पाकिस्तान के कबायली इलाक़ों में सक्रिय तहरीक़-ए-तालिबान के मुखिया हकीमुल्ला महसूद ने कहा है कि वह पाकिस्तान सरकार से बातचीत को तैयार हैं मगर साथ ही उन्होंने कहा है कि उनका गुट अमरीकियों को निशाना बनाते रहेगा.

पाकिस्तान में सार्वजनिक जगहों पर लगातार हो रहे धमाकों में हाथ होने से उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार किया.

हकीमुल्ला मसूद ने बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में कहा, ''हम सार्वजनिक जगहों पर धमाकों को ग़लत समझते हैं और इसकी निंदा करते हैं. हम उन सभी हमलों की निंदा करते हैं जिसमें मुसलमानों की जान और माल को नुकसान पहुंचता है.''

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान में धमाके के कारण हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार यही संगठन है.

हकीमुल्ला पर एफबीआई ने 30 करोड़ रुपए का ईनाम घोषित कर रखा है.

आरोप

महसूद का आरोप है कि इन धमाकों के पीछे पाकिस्तानी हुक़ूमत का हाथ है और इसके लिए तहरीक़-ए-तालिबान को ज़िम्मेदार ठहराकर वह जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. महसूद ने कहा, ''हम केवल काफिरों और अमरीकियों को निशाना बनाते हैं और बनाते रहेंगे. लेकिन जहां तक धमाकों की बात है, हमने इसमें हाथ होने से कल भी इनकार किया था और आज भी इनकार कर रहे हैं.''

उनका कहना है कि पाकिस्तानी सरकार अगर संजीदा बातचीत करना चाहती है तो वे बात करने को तैयार हैं.

हालांकि महसूद ने यह भी बताया कि सरकार ने ऑल पार्टी कान्फ्रेंस के बाद अभी तक ऐसी कोई पेशकश नहीं की है और न ही अपना कोई नुमाइंदा भेजा.

पाकिस्तानी सरकार और कबीलाई इलाकों में सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच समझौते की कोशिश हुई थी.

करीब एक महीना पहले सरकार ने तहरीक़-ए-तालिबान से ताज़ा बातचीत की मंशा जताई थी.

'संघर्ष विराम को तैयार'

हकीमुल्ला का कहना है कि अगर सरकार की तरफ से बातचीत की औपचारिक घोषणा की जाती है तो वो इसके लिए तैयार हैं. लेकिन सरकार सीधी बातचीत करना ही नहीं चाहती और मीडिया के मार्फत अपनी मंशा और शर्तों का इजहार करती है.

पाकिस्तान के कुछ उलेमा द्वारा संघर्ष विराम की अपील किए जाने को लेकर उन्होंने कहा, ''हम संघर्ष विराम को तैयार हैं लेकिन ड्रोन हमलों को भी बंद करना होगा.''

कबीलाई इलाके में तहरीक़-ए-तालिबान जैसे संगठनों और सरकार के बीच हुए समझौतों के विफल होने में अपनी भूमिका से हकीमुल्ला ने इनकार करते हुए कहा कि कबीलाई इलाके के अन्य संगठनों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है.

उन्होंने कहा कि अमरीका के इशारे पर कबीलाई जनता पर बमबारी कर और मदरसों व मस्जिदों को निशाना बना कर सरकार ने ख़ुद वादाख़िलाफी की है.

माना जाता है कि तहरीक़-ए-तालिबान की वादाख़िलाफी की वजह से यह समझौता परवान नहीं चढ़ सका.

'पाक में शरिया लागू करेंगे'

अमरीका अफगानिस्तान से 2014 में अपने सारे सैनिक वापस बुला लेगा. इस हालत में क्या तहरीक़-ए-तालिबान के नजरिए पर कोई असर पड़ेगा?

हकीमुल्ला का कहना है कि, उनका संगठन, सिर्फ अमरीका के साथ पाकिस्तान की दोस्ती के कारण जिहाद नहीं छेड़े हुए है. अमरीकी इशारे पर मुसलमानों का कत्लेआम भी इसका एक प्रमुख कारण है.

अमरीकी सेनाओं के चले जाने के बाद उनका अगला मक़सद पाकिस्तान में गैर इस्लामिक सरकार को उखाड़ फेंकना और वहां शरिया क़ानून लाना होगा.

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