'आंतक का अड्डा बने' पाकिस्तानी मदरसे पर अमरीकी प्रतिबंध

अमरीका ने पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में एक मदरसे पर ये कहते हुए प्रतिबंध लगाए दिए है कि वो चरमपंथियों का प्रशिक्षण केंद्र बन गया है.
ये पहला मौका है जब किसी मदरसे पर अमरीकी प्रतिबंध लगाए गए हैं.
अमरीकी वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि पेशावर में गंज मदरसे को अल कायदा, तालिबान और लश्कर ए तैयबा जैसे चरमपंथी संगठन ट्रेनिंग और लोगों की भर्ती के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
प्रतिबंधों के तहत अमरीकी लोगों से इस मदरसे के किसी भी तरह के व्यापारिक संपर्कों पर पाबंदी होगी और अमरीकी अधिकार क्षेत्र में अगर इस मदरसे की कोई संपत्ति होगी तो उसे भी सील कर दिया जाएगा.
हालांकि मदरसे से जुड़े लोगों ने सभी आरोपों को ठुकराते हुए प्रतिबंधों की आलोचना की है.
'धार्मिक शिक्षा की आड़ में'
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार इस मदरसे के प्रमुख शेख अमीनुल्ला को अल कायदा और तालिबान का समर्थन करने के लिए अमरीका और संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में ही ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया था.
अमरीकी वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है, “आज पहली बार एक ऐसे मदरसे को लेकर कार्रवाई की गई जिसका आतंकवादी संगठन दुरुपयोग कर रहे हैं.”
बयान के अनुसार गंज मदरसा एक ऐसी जगह है “जहां धार्मिक शिक्षा की आड़ में छात्रों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है और उन्हें आतंकवादी और उग्रवादी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है.”
प्रतिबंधों की आलोचना

दूसरी तरफ मदरसे के प्रबंधक मोहम्मद इब्राहिम ने प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए बीबीसी से कहा कि जो भी व्यक्ति सच जानना चाहे वो मदरसे में आ सकता है.
उन्होंने कहा, “जिस शेख अमीनुल्ला के साथ जोड़ कर इस मदरसे पर पाबंदियां लगाई गई हैं, वो हमारे शिक्षक थे लेकिन वो आठ महीने पहले इस्तीफा देकर यहां से चले गए हैं.”
मोहम्मद इब्राहिम ने दावा किया कि उनके मदरसे में शिक्षा देने के अलावा कुछ और नहीं होता है.
उन्होंने कहा कि मदरसे में पांच सौ से छह सौ छात्र शिक्षा पा रहे हैं. मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार मदरसे में लड़कियां भी पढ़ने आती हैं लेकिन वो दिन में ही अपने घर वापस चली जाती हैं.
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