सावधान! स्याह इंटरनेट पर हैं बच्चों के शिकारी

ब्लैकमेल, ऑनलाइन शोषण

सैकड़ों ब्रितानी बच्चों को ऑनलाइन ब्लैकमेल करके यौन क्रियाएँ करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. ब्रिटेन की एक संस्था चाइल्ड एक्सप्लॉयटेशन एंड ऑनलाइन प्रोटेक्शन सेंटर (सीईओपी) ने यह जानकारी देते हुए ब्रितानी नागरिकों को इससे सचेत रहने को कहा है.

सीईओपी, ब्रितानी पुलिस का ही एक हिस्सा है जो बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए विशेष रूप से काम करती है.

ये ब्लैकमेलर बच्चों से <link type="page"><caption> यौन शोषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130205_child_sex_abuse_online_fma.shtml" platform="highweb"/></link> के पीड़ित रहे बच्चे बनकर नक़ली प्रोफ़ाइल से बातचीत शुरू करते हैं और तस्वीरें साझा करते हैं.

उसके बाद ये ब्लैकमेलर बच्चों को धमकी देते हैं कि वे इन तस्वीरों को उनके परिवार वालों और दोस्तों को भेज देंगे.

सीईओपी के अनुसार पिछले दो सालों में हुए बारह मामलों में 424 बच्चों को इस तरह ब्लैकमेल किया गया जिनमें से 184 बच्चे ब्रिटेन के थे.

संस्था के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी बेकर ने कहा कि ब्लैकमेल के शिकार बच्चों में आठ साल की उम्र तक के बच्चे शामिल हैं.

बेकर के अनुसार, ''इन बच्चों से 'ग़ुलामों जैसे' कृत्य कराए जाते थे. ब्लैकमेलर बच्चों से यौन कृत्य कराते थे, ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने के लिए कहते थे और कई मामलों में उनसे जबरन पैसे वसूलने की कोशिश की जाती थी.''

इंटरनेट का 'स्याह कोना'

एंडी बेकर ने बीबीसी रेडियो फ़ोर से बातचीत में कहा,"यह शोषण बहुत तेज़ी से होता है. मात्र चार मिनट में ही हाय-हेलो से शुरू होकर 'क्या तुम नंगे होना चाहते हो?' से ख़ुद को चोट पहुँचाने के लिए कहने तक पहुँच सकता है.''

इस तरह के शोषण के शिकार सात बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी, जिनमें ब्रिटेन का एक 17 वर्षीय किशोर भी शामिल था.

सात अन्य बच्चों ने अपने आपको बुरी तरह घायल कर लिया था जिनमें छह बच्चे ब्रिटेन के थे.

बेकर ने कहा, "हम इंटरनेट के एक छोटे किंतु बहुत ही स्याह कोने के बारे में बात कर रहे हैं. हमें इस पर निगरानी रखने की ज़रूरत है."

ब्लैकमेल

डेनियल पेरी
इमेज कैप्शन, डेनियल पेरी से ब्लैकमेल करने वाले ने नगद पैसे माँगे थे जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.

ब्रिटेन के डन्फर्मलाइन क़स्बे के डेनियल पेरी नामक एक किशोर को ब्लैकमेलरों ने अमरीकी किशोरी के नक़ली प्रोफ़ाइल के ज़रिए फँसाया था.

बेकर के अनुसार ब्लैकमेलर उनसे लाखों पाउंड माँग रहे थे जिसके बाद डेनियल ने आत्महत्या कर ली थी.

ब्लैकमेलरों ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने पैसे न दिए तो उनकी बातचीत का वीडियो उनके परिवार वालों और दोस्तों को भेज दिया जाएगा.

ब्लैकमेल करने वालों ने डेनियल को पैसे के लिए ईमेल भेजा. उसके एक घंटे के भीतर ही डेनियल मृत पाए गए.

सीईओपी ने जिन बारह मामलों की पड़ताल की है, उनमें शामिल लोग चार भिन्न महाद्वीपों से संबंध रखते हैं. इनमें पाँच मामले ब्रिटेन के हैं.

इस तरह के सबसे बड़े मामले को 'ऑपरेशन के' नाम दिया गया था. इसमें पूरी दुनिया के 322 बच्चे शामिल थे, जिनमें 96 बच्चे ब्रिटेन के थे.

इस गिरोह के सदस्यों ने 40 से ज़्यादा नक़ली ऑनलाइन प्रोफ़ाइल बना रखी थीं और बच्चों के <link type="page"><caption> शोषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130905_sikh_silence_ap.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए यह गिरोह 40 से ज़्यादा ईमेल आईडी का प्रयोग करता था.

<link type="page"><caption> बाल शोषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130702_child_sex_abuse_dil.shtml" platform="highweb"/></link> करने वालों का यह गिरोह तब पकड़ में आया, जब एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ने संदिग्ध गतिविधियाँ देखीं और ब्रितानी बच्चों ने इसके बारे में अपने अभिभावकों को सूचित किया.

अंग्रेज़ी का योगदान

पूरी दुनिया में अंग्रेज़ी भाषा बोलने वालों की बड़ी संख्या की भी इन बच्चों के <link type="page"><caption> शोषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130722_pornography_cameron_nn.shtml" platform="highweb"/></link> में बड़ी भूमिका है. ब्रिटेन की एक उदारवादी देश की छवि भी इसका एक कारण है.

सीईओपी के ऑपरेशनल मैनेजर स्टीफ़ैनिक मैकॉर्ट कहते हैं, "इसका प्राथमिक कारण तो अंग्रेज़ी भाषा ही है. बच्चों को ब्लैकमेल तभी किया जा सकता है, जब उनसे बात की जा सके. अंग्रेज़ी सचमुच ही बहुत लोकप्रिय वैश्विक भाषा है.''

मैकॉर्ट के अनुसार इसका दूसरा बड़ा कारण है कि ब्लैकमेल करने वालों को लगता है कि ब्रिटेन एक मुक्त समाज है, इसलिए ब्रिटेन के बच्चों को आसानी से फँसाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि कई ब्लैकमेलरों ने यह बात स्वीकार की है कि उन्हें लगता था कि ब्रिटेन के बच्चों को आसानी से शिकार बनाया जा सकता है.

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