जापान का आखिरी परमाणु रिएक्टर होगा बंद

जापान अपने अंतिम परमाणु रिएक्टर को बंद करने जा रहा है. इस रिएक्टर को दोबारा शुरू करने की कोई समय सीमा नहीं तय की गई है.
पश्चिमी जापान के ओही में स्थित रिएक्टर4 में सोमवार से बिजली उत्पादन बंद हो जाएगा. यह देश का अकेला परमाणु बिजली संयंत्र है, जो चालू है. बाकी संयंत्र पहले ही बंद किए जा चुके हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि जापान में कम से कम इस साल दिसंबर तक परमाणु बिजली का उत्पादन पूरी तरह से बंद रहेगा. यह 1960 के बाद से सबसे बड़ी बंदी होगी.
जापान की जनता 2011 में <link type="page"><caption> फुकुशिमा संयंत्र</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130906_south_korea_fukushima_fishries_impost_sr.shtml" platform="highweb"/></link> में हुई दुर्घटना के बाद परमाणु बिजली के खिलाफ हो गई है.
<link type="page"><caption> भारी भूकंप और सुनामी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130312_japan_tsunami_gallery_vd.shtml" platform="highweb"/></link> के चलते हुई इस दुर्घटना से पहले जापान की कुल बिजली आपूर्ति में परमाणु बिजली की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत थी.
लेकिन उसके बाद संयंत्रों को या तो नियमित रख-रखाव के लिए बंद किया गया या फिर सुरक्षा कारणों के चलते और फिर उन्हें दोबारा चालू नहीं किया गया.
जनता का दबाव

<link type="page"><caption> जापान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130908_olympic_picture_gallery_vt.shtml" platform="highweb"/></link> में पिछले साल मई और जून में ही परमाणु बिजली का उत्पादन बंद हो गया था, लेकिन टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेप्को) के ओही स्थित संयंत्र को फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी गई थी.
जनता की आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार पर दबाव था कि वह सुरक्षा मानकों को सख्त बनाए.
विश्लेषकों का कहना है कि सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने और संयंत्र को दोबारा चालू करने के लिए कानूनी बाधाओं को पार करने में करीब छह महीने का समय लगेगा.
कंपनियों ने अभी तक जापान के 50 रिएक्टरों में से करीब 12 दर्जन संयंत्रों को दोबारा शुरू करने के लिए आवेदन दिया है.
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे चाहते हैं कि रिएक्टर दोबारा काम करने लगें, क्योंकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
बढ़ता व्यापार घाटा
<link type="page"><caption> फुकुशिमा दुर्घटना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130912_japan_cartoon_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> के बाद जापान बड़ी मात्रा में कोयला, तरल प्राकृतिक गैस और अन्य ईंधन का आयात करने को मजबूर है.
शिंजो अबे की सरकार का कहना है कि इन आयातों के चलते 2011 से जापान को भारी व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है.
फुकुशिमा की घटना के बाद से जापान में घरेलू बिजली का बिल औसतन 30 प्रतिशत बढ़ गया है. सरकार घरेलू बिजली की खपत को काबू में रखना चाहती है.
दूसरी ओर फुकुशिमा संयंत्र में जारी दिक्कतों के चलते सरकार जनता को परमाणु रिएक्टर का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं कर पा रही है.
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