गुप्तचर या मासूम जानवर?

मिस्र के अधिकारियों ने एक सारस को पकड़ा है जिस पर जासूसी का संदेह जताया गया है.
उस पर लगी प्रवास पट्टी को अधिकारियों ने ग़लती से जासूसी का उपकरण समझ लिया था.
असल में सारस निर्दोष था. हर साल हज़ारों जानवरों को जासूसी के इल्ज़ाम में पकड़ा जाता है, जिनमें अधिकतर बेक़सूर होते हैं.
2011 में सऊदी अधिकारियों ने एक गिद्ध को गिरफ़्तार किया था.
उस पर संदेह था कि वह इसरायल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद की तरफ़ से किसी जासूसी मिशन पर था.
लाल सागर में मौजूद रिज़ॉर्ट शर्म-अल-शेख के पास 2010 में कई शार्क हमले हुए थे.
इसे लेकर एक टेलीविज़न स्टेशन ने आरोप लगाया था कि उसे इसरायल ने जीपीएस के ज़रिए नियंत्रित किया था ताकि मिस्र के पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाया जा सके.
‘जासूस’ जानवरों को लेकर ईरान भी परेशानी का सामना कर चुका है.
2007 में ईरानियन सेना ने 14 ‘जासूस गिलहरियों’ की टीम को पकड़ा था जो एक नाभिकीय रिएक्टर के पास मिली थीं.
अधिकारियों ने तब कहा था कि उन्होंने इन्हें ‘किसी कार्रवाई को अंजाम देने से पहले ही गिरफ़्तार’ कर लिया है.
‘गुप्तचर’ जानवर
हालांकि सभी पालतू जानवरों के बारे में यह कहानियां झूठी नहीं हैं. सेना में जानवरों की सेवाएं 1908 से ही ली जाती रही हैं जब जर्मनों ने पहली बार कबूतरों में कैमरे लगाकर आसमान से तस्वीरें उतारी थीं.
कुछ प्रोग्राम्स दूसरों के मुक़ाबले ज़्यादा कामयाब रहे हैं.

सीआईए की तरफ़ से चलाए गए ऑपरेशन अकाउस्टिक किटी में एक बिल्ली में सुनने वाला उपकरण लगाने की कोशिश पहले ही दिन नाकाम हो गई.
वॉशिंगटन डीसी में सोवियत दूतावास के बाहर बिल्ली के इस बच्चे को एक कार ने कुचल दिया.
अनुमान के मुताबिक़ इस प्रोजेक्ट पर क़रीब 91 करोड़ रुपए ख़र्च आया था.
नाकाम रहा एक और प्रोजेक्ट ‘बैट बॉम्ब’ को अमरीका ने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस्तेमाल किया था.
तब चमगादड़ों में आग लगाने वाले उपकरण बांधकर उन्हें जापान पर गिराया गया था. इसके पीछे जापान की लकड़ी की इमारतों में घुसपैठ कर उन्हें आग लगाने की मंशा थी.
डॉल्फ़िनें ज़्यादा कामयाब
शायद जासूसी में जानवरों के सबसे ज़्यादा कामयाब सदस्य डॉल्फ़िन रही हैं.
अमरीका और रूस दोनों ने समुद्री स्तनपाइयों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मौजूदगी की पुष्टि की है जिसके तहत डॉल्फ़िनों और सीलों को समुद्र के भीतर बिछाई गई माइंस का पता लगाने और शत्रु तैराकों को नाकाम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.
मगर नौजवान सैनिकों की तरह डॉल्फ़िनों में भी हार्मोंस होते हैं.
इस साल मार्च में यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय को ऐसी ख़बरों से इनकार करना पड़ा था कि उसकी तीन सैन्य डॉल्फ़िनें किसी तरह चंगुल से बच निकली थीं और काला सागर में सेक्स की तलाश में घूम रही थीं.
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