फ़ुकुशिमा: रिसाव रोकने के लिए 'बर्फ़ की दीवार'

साल 2011 में भूकंप के बाद आई सुनामी में तबाह हुए फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मी पानी के रिसाव को रोकने के लिए जापान की सरकार संयंत्र के चारों ओर एक बेहद ठंडी दीवार का निर्माण करेगी.
जापान सरकार के एक प्रवक्ता योशिहिदे सुगा ने कहा कि इस दीवार के निर्माण पर 47.3 करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च होगी.
उनका कहना है कि संयंत्र से रेडियोधर्मी पानी का रिसाव गंभीर होता जा रहा है, ऐसे में सरकार के लिए इसका समाधान ढूंढना बेहद ज़रूरी हो गया है.
भूकंप और सुनामी के कारण इस रिएक्टर के कूलिंग सिस्टम ख़राब हो गए और इनमें से तीन पिघल गए थे.
वर्तमान में ठंडा करने के लिए रिएक्टर्स पर पानी डाले जा रहे हैं लेकिन इस कारण भारी मात्रा में जमा हुई रेडियोधर्मी पानी टोक्यो इलेक्ट्रीक पावर कंपनी (टेप्को) के लिए एक समस्या बन गई है.
सरकार की योजना के मुताबिक़ दूषित पानी को भूजल में मिलने से रोकने के लिए रिएक्टर के चारों ओर पाइपों का इस्तेमाल करते हुए बर्फ़ीली ज़मीन की एक दीवार बनाई जाएगी. इन पाइपों में कूलेंट भरा जाएगा.
उन्नत होगा वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम
इसके अलावा इकट्ठा हुए दूषित पानी की समस्या के समाधान के लिए वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम को भी उन्नत किया जाएगा.
संयंत्र के क्षतिग्रस्त होने के बाद से रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए उस पर लगातार पानी डाला जा रहा है. इस कारण 400 टन अतिरिक्त दूषित पानी जमा हो गया है.
इस पानी को अभी एक अस्थाई टैंक में रखा गया है. पिछले महीने टेप्को ने कहा था कि टैंक से 300 टन अत्याधिक दूषित पानी रिस गया, जो आज तक की इस तरह की सबसे बड़ी दुर्घटना है.
लेकिन, हाल के महीनों में पाइपों से भी रिसाव हुए हैं और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि क्षतिग्रस्त रिएक्टरों से निकलने वाला पानी ज़मीन के अंदर जा रहा है.
पिछले माह जापान के परमाणु नियामक ने फ़ुकुशिमा से रिसने वाले पानी को इंटरनेशन न्यूक्लियर एंड रेडियोलॉजिकल इवेंट स्कैल (इंस) के तहत तीन स्तरीय ख़तरा क़रार दिया था.
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