मिस्र: घिरी मस्जिद के चारों ओर तनाव

मिस्र में सुरक्षाकर्मियों ने काहिरा की एक मस्जिद को घेर रखा है जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड के कई सौ समर्थकों ने रात बिताई. उधर पूरे देश में हिंसा का दौर जारी है.
शुक्रवार को मिस्र के अलग-अलग इलाक़ो में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 80 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद राजधानी <link type="page"><caption> क़ाहिरा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130816_egypt_qus_ans_nn.shtml" platform="highweb"/></link> से है जहां सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों पर गोलियां चलाईं.
मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक बुधवार को हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार को 'ग़ुस्से का दिन' मना रहे थे.
<link type="page"><caption> क़ाहिरा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130816_egypt_friday_protest_vk.shtml" platform="highweb"/></link> के अलावा और कई इलाकों से भी हिंसा की ख़बरें हैं. मिस्र के दूसरे बड़े शहर एलेक्ज़ेंड्रिया में 20 लोग मारे गए हैं.
मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि उनके समर्थक पूरे मिस्र में एक सप्ताह तक हर रोज़ विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे.

बुधवार को हुई हिंसा में 638 लोग मारे गए थे.
इसके विरोध में शुक्रवार को जुमा की नमाज़ के बाद हज़ारों की तादाद में मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक क़ाहिरा के रैमसेस चौक पर जमा हुए थे.
हिंसक भीड़
प्रदर्शनकारी 'जनता इस तख़्तापलट को समाप्त करना चाहती है' के नारे लगा रहे थे.
बीबीसी संवाददाता जेरेमी बोवेन के अनुसार प्रदर्शऩ उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन को आग लगा दी.
इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने भी गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
प्रदर्शऩकारी सेना समर्थित अंतरिम सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे.

मुस्लिम ब्रदरहुड के एक समर्थक का कहना था, ''हमने चुनावों के ज़रिए एक राष्ट्रपति को सत्ता पर बिठाया था लेकिन उन्होने टैंकों के ज़रिए एक कठपुतली को खड़ा किया है जो गोलियां चलाता है. लेकिन मिस्र की जनता डरेगी नहीं. मोर्सी के समर्थक नहीं डरेंगे.''
ग़द्दार
प्रदर्शनकारी <link type="page"><caption> मिस्र</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130816_egypt_friday_protest_vk.shtml" platform="highweb"/></link> के सेना जनरल अल-सिसि के विरोध में भी नारे लगा रहे थे. वे जनरल सिसि को 'ग़द्दार' कह रहे थे.
एएफ़पी समाचार एजेंसी ने मिस्र की अंतरिम सरकार के हवाले से ख़बर दी है कि शुक्रवार को 1000 से ज़्यादा इस्लामी समर्थकों को गिरफ़्तार किया.
शनिवार को एक वक्तव्य में गृह मंत्रालय ने कहा, "गिरफ़्तार किए गए मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थकों की संख्या 1004 तक पहुंच गई है." मंत्रालय का कहना था कि काहिरा में 558 गिरफ़्तारियां की गईं.
उधर अपदस्थ राष्ट्रपति मोर्सी के विरोधी संगठन 'नेश्नल सैलवेशन फ़्रंट' और 'तमरूद' ने भी मुस्लिम ब्रदरहुड के विरोध में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. पूरे मिस्र में अपने पड़ोसियों और गिरजाघरों की सुरक्षा के लिए भी अपील की गई है.

मुस्लिम ब्रदरहुड के कुछ समर्थकों ने कहा है कि कॉप्टिक ईसाइयों ने मोर्सी के बेदख़ल किए जाने का समर्थन किया है. इसलिए आशंका जताई जा रही है कि ईसाई लोग भी हिंसा के शिकार बनाए जा सकते हैं.
उधर बुधवार को हुई हिंसा की पूरे अंतरराष्ट्रीय जगत में कड़ी निंदा की गई है. अमरीका और संयुक्त राष्ट्र समेत सभी ने इसकी घोर आलोचना की है. तुर्की ने मिस्र से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.
सऊदी का समर्थन
लेकिन सऊदी अरब के राजा अबदुल्लाह ने मिस्र की मौजूदा सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि सऊदी अरब की जनता और सरकार 'आतंकवाद' के विरोध में अपने मिस्री भाइयों के साथ खड़ी है.
गणतांत्रिक तरीक़े से चुने हुए मिस्र के पहले राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना ने तीन जुलाई को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था. मोर्सी फ़िलहाल हिरासत में हैं और उन पर हत्या के आरोप दर्ज हैं.
सरकारी मीडिया के अनुसार गुरुवार को मोर्सी की हिरासत को और 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है.
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