हत्या के अभियुक्त की रिहाई से बौखलाए लोग

अमरीका में निगरानी करने वाले एक कार्यकर्ता जार्ज ज़िमरमैन को एक काले किशोर की हत्या के आरोप से बरी कर दिए जाने के फैसले के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं.
इनमें से अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण ही हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी 17 साल के <link type="page"><caption> काले </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130321_black_miss_israel_yityish_aynaw_vr.shtml" platform="highweb"/></link> किशोर ट्रेवोन मार्टिन के परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं.
वे <link type="page"><caption> अमरीका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130705_us_independence_china_ml.shtml" platform="highweb"/></link> की न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल भी ख़ड़े कर रहे हैं.
बराक ओबामा की अपील
सबसे बड़ा प्रदर्शन <link type="page"><caption> न्यूयार्क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/07/130706_san_francisco_crash_ia.shtml" platform="highweb"/></link> में हुआ है जहां छोटी सी रैली देखते देखते हजारों की भीड़ में तब्दील हो गई.
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अदालत फैसला आने के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
बराक ओबामा ने रविवार को यह स्वीकार किया कि इस मामले ने लोगों की भावनाओं को बेहद आहत किया है. फिर भी उन्होंने जनता से आग्रह किया, “हमारे यहां कानून का राज है, और फैसला आ चुका है.”
अमरीकी न्याय मंत्रालय का कहना है कि वह इस बात की भी छानबीन कर रहा है कि ज़िमरमैन के ख़िलाफ़ किसी तरह का दीवानी मुक़दमा दायर किया जा सकता है या नहीं.
29 साल के ज़िमरमैन पर पिछले साल एक काले किशोर की हत्या के आरोप लगे थे.
‘हमें उठ खड़ा होना होगा’

शनिवार को ज़िमरमैन को बरी किए जाने के फ़ैसले के बाद सैन फ्रांसिस्को, फिलाडेल्फिया, शिकागो, वॉशिंगटन, बॉस्टन, सैन डियागो और अटलांटा सहित अमरीका के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए.
न्यूयॉर्क में हज़ारों की संख्या में लोग रविवार की रात मार्च करते हुए टाइम्स स्क्वेयर पहुंचे. वे “ट्रेवोन मार्टिन को न्याय दो!” के नारा लगा रहे थे.
20 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी प्रिंस अकीम ने रॉयटर्स को बताया, “यदि हमने इस फैसले का विरोध नहीं किया, तो मुश्किल में पड़ सकते हैं. काले युवकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. हमें इसका विरोध करना होगा, लड़ना होगा.”
उधर लॉस एंजेलेस में प्रदर्शनकारियों ने यातायात में अवरोध पैदा किए और कई सड़कों को जाम रखा.
पुलिस ने 'एलए टाइम्स' अख़बार को बताया कि वैसे तो ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, मगर इनके बीच कुछ आक्रामक समूह भी मौजूद थे जो कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पत्थर और बैटरी फेंक रहे थे.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन
लॉस एंजेलेस के मेयर एरिक गर्सट्टी ने प्रदर्शनकारियों से ‘शांति बनाए रखने’ की अपील की.
<link type="page"><caption> बॉस्टन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130526_boston_marathon_completed_ar.shtml" platform="highweb"/></link> में करीब 500 लोगों ने पुलिस दल के साथ चलते हुए प्रदर्शन किया. बॉस्टन के पुलिस अधीक्षक विलियम इवांस ने बताया, “वे लोग पूरी तरह से अनुशासित थे.”

रविवार को देश के कई चर्चों में प्रार्थना सभा के दौरान ट्रेवोन मार्टिन को याद किया गया.
फ्लोरिडा के सैनफोर्ड में, जहां वारदात हुई थी, वहां सभा में कई युवकों ने ट्रेवोन की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन रखी थी.
अटलांटा के इबेन्जर बैपटिस्ट चर्च के सीनियर पादरी रेव राफेल वारनॉक ने अपनी धार्मिक सभा में कहा, “ट्रेवोन बेंजामिन मार्टिन की मौत हो चुकी है. वह इसलिए हमारे बीच नहीं है क्योंकि वह और उसके जैसे दूसरे काले लोगों को यहां इंसान नहीं, बल्कि एक समस्या समझा जाता है.”
‘अदालत का फैसला आ चुका है’
रविवार को अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लोगों से इस मसले पर शांति बनाए रखने की अपील की.
ओबामा के अनुसार ट्रेवोन मार्टिन की मौत अमरीका के लिए एक दुखद घटना है, लेकिन “देश में न्याय व्यवस्था का शासन है, और अदालत का फैसला आ चुका है.”
उन्होंने कहा, “हमें ख़ुद से ये सवाल करना होगा कि क्या हम उस हिंसा पर रोक लगाने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं, जो देश में रोज़ कई लोगों की जान ले रही है?”
ओबामा ने कहा, “ट्रेवोन के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करने का यही सबसे अच्छा तरीका है.”
पिछले साल ज़िमरमैन मामले पर ओबामा ने कहा था, “अगर मेरा कोई बेटा होता तो वह बिलकुल ट्रेवोन जैसा होता.”
न्याय करने में नाकाम

अमरीका के नागरिक अधिकार समूहों ने इस फैसले पर अपनी निराशा जाहिर की है. साथ ही उन्होंने शांति भी बनाए रखने की बात भी की.
नागरिक अधिकारों के नेता जेसी जैक्सन ने सीएनएन को बताया, “अमरीका की न्याय व्यवस्था एक बार फिर से न्याय करने में नाकाम साबित हुई.”
अधिकार कार्यकर्ता अल शार्पटन ने कहा, “यह फैसला अमरीका की जनता के चेहरे पर एक तमाचा है.”
उन्होंने इस मामले की तुलना अफ्रीकी-अमरीकी नागरिक रोडनी किंग की 1991 में पुलिस द्वारा पिटाई के मामले से की. उस मामले में उस समय बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी.
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