जिसने 'दुश्मन' का दिल निकालकर खाया

- Author, पॉल वुड
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, सीरिया
इस बात पर एकबारगी यकीन करना मुश्किल होता है कि एक सीरियाई विद्रोही कमांडर ने अपने सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए अपने एक दुश्मन का दिल काटकर खा लिया.
लेकिन यह बात बिल्कुल सच थी. पिछले हफ़्ते सीरिया में उसी कमांडर से मेरी मुलाक़ात हुई जिसका नाम अबु सक्कर है. लेकिन वह मुझे साफ़ तौर पर कुछ भी बता नहीं पा रहे थे.
इस घटना का खुलासा एक वीडियो के ज़रिए हुआ जिसमें उन्हें एक मृत सैनिक का दिल काटकर निकालते हुए दिखाया गया. जब मैंने उनसे यह सवाल किया कि क्या वह सचमुच किसी आदमी का दिल था तो उनका कहना था, “मुझे ठीक से कुछ याद नहीं है. मैंने उसे काटा नहीं था, बस हाथ में लेकर उसे दिखाया था.”
यह वीडियो सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध की वीभत्सता की दास्तान बयां करता है. अबु सक्कर इस वीडियो में एक दुश्मन सैनिक के ऊपर खड़े हुए नज़र आते हैं और वे उनके मांस के टुकड़े काट रहे हैं. इसी बीच उनके पास मौजूद एक व्यक्ति की आवाज़ आती है, “ऐसा लग रहा है कि आप वैलेंटाइन का दिल बना रहे हैं.”
सक्कर खून से सना हुआ कुछ हाथ में उठाते हैं और घोषणा करते हैं, “बशर के सैनिकों हम तुम्हारा दिल खाएंगे.” जब मई में यह वीडियो जारी हुआ तो हमने उनसे संपर्क किया.
उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने दिखावे के लिए दिल का टुकड़ा काटा था. अब जब मेरी उनसे आमने-सामने मुलाकात होती है तो वह थोड़े चौकन्ने नज़र आते हैं. हालांकि जब मैने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो उनका गुस्सा बढ़ने लगता है.
अपनों का ग़म

उन्होंने कहा, “मैं ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन मुझे यह करना पड़ा. हमें अपने दुश्मन को डराना पड़ता है, उनकी खिल्ली उड़ानी होती है क्योंकि वे भी हमारे साथ ऐसा ही बर्ताव करते हैं. अब जहां अबु सक्कर होता है वहां आने की वे हिम्मत भी नहीं कर पाते.”
उनकी उम्र 27 साल है और वह कद से थोड़े नाटे और गठीले शरीर वाले हैं. उनके चेहरे की सख्ती साफ़ तौर पर दिखती है. वह बड़ी क्रूरता से देखते हैं. धूप में रहने की वजह से उनके शरीर की त्वचा काली सी पड़ गई है.
वह विद्रोह से जुड़ने की परिस्थितियों की अपनी कहानी मुझे बताते हैं. उनका ताल्लुक सीरिया के होम्स के बाबा अम्र ज़िले के बेडुइन समुदाय से है. वह बाबा अम्र में एक मज़दूर के तौर पर काम करते थे. साल 2011 में उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया.
उनका कहना है कि एक ऐसे ही प्रदर्शन के दौरान एक महिला और बच्चा मारे गए. उनके भाई जब उनकी मदद के लिए गए तो उन पर भी गोली दाग दी गई जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई.
उन्होंने सरकार के खिलाफ़ हथियार उठा लिया और वह एक नए संगठन फ्री सीरियन आर्मी (एफएसए) से जुड़ गए. अबु सक्कर ने अपना संगठन शुरू करने से पहले फ़ारुक़ बिग्रेड के साथ भी लड़ाई में हिस्सा लिया.
बाद में उन्होंने अपने एक दल उमर अल-फ़ारुक का गठन किया.विद्रोह के दौरान उन्हें अपने दूसरे भाई, कई रिश्तेदारों और अपने क़रीबी लोगों को खोना पड़ा.
उनका कहना है कि उनसे जुड़े सभी क़रीबी लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. उनके माता-पिता को गिरफ़्तार कर लिया गया और पुलिस की ज़्यादती इतनी थी कि पुलिस ने उन्हें कॉल कर उनके माता-पिता को पीटने की आवाज सुनवाई.
बदले की भावना

जिस आदमी का दिल खाने का आरोप इन पर है, उसके बारे में वह कहते हैं, “उस व्यक्ति के मोबाइल पर वीडियो थे जिसमें वह एक मां और उसकी दो बेटियों का बलात्कार करते हुए नज़र आता है. वे उससे छोड़ने की गुज़ारिश करती हैं लेकिन वह उनकी हत्या कर देता है. ऐसे आदमी के साथ आप क्या करेंगे?
हालांकि मुझे लगता है कि मैं शायद अपने दुश्मन को अपनी ख़ुराक कतई नहीं बनाऊंगा. अबु सक्कर का कहना है कि वह सैनिक उनका अपमान कर रहा था.
वह कहते हैं, “शुरुआत में जब भी हम शिया लड़ाकों को पकड़ते थे तो हम उन्हें खाना खिलाते थे उन्हें आराम से रहने देते थे और उनसे कहते थे कि हम भाई हैं. लेकिन उन्होंने हमारी औरतों का बलात्कार करना और बच्चों का कत्ल करना शुरू कर दिया.”
उस कमरे में मौजूद एक व्यक्ति का कहना है कि ये सच्चे मुसलमान नहीं होते. यह गृहयुद्ध बेहद सांप्रदायिक हो रहा है. अबु सक्कर अपने शरीर में 14 गोलियों के निशान दिखाते हैं. वह कहते हैं, “हम दो साल से घेरेबंदी में हैं. सरकार के सैनिक द्वारा दिखाए गए वीडियो में वो क्रूरता नज़र आती है जो हमने नहीं किया है.”
वह कहते हैं, “कुसैर, बाबा अम्र और होम्स जैसी जगहों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया. किसी को भी इसका ख़्याल नहीं है. देखिए शरणार्थी कैसे अपनी ज़िंदगी बिता रहे हैं. क्या आप यह स्वीकार करेंगे कि आपके माता-पिता भी उसी तरह से रहें. हम इस्लामी राष्ट्र की रक्षा कर रहे हैं और अरब तथा पश्चिमी देश हमसे बुरा बर्ताव कर रहे हैं. पश्चिमी देशों ने आखिर किया ही क्या है? कुछ नहीं.”
नरभक्षी विद्रोही
वह आख़िरकार गुस्से भरे लहज़े में कहते हैं, “अगर हमें मदद नहीं मिलती हैं, कहीं सुरक्षित जाने की आज़ादी और हथियार नहीं मिलते तो हम इससे भी ज़्यादा बुरा कर सकते हैं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.”

अबु सक्कर अब एक ‘नरभक्षी विद्रोही’ का प्रतीक बन गए हैं.
यह मुमकिन हो सकता है कि अबु सक्कर मानसिक तौर पर ठीक ना हों या युद्ध की वजह से वह ऐसे हो गए हों.
मैंने फ्री सीरियन आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सलीम इद्रीस से पूछा कि अबु सक्कर को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया गया. उनका जवाब उन हकीकतों से रूबरू कराता है कि विद्रोही पक्ष की ओर से कैसे युद्ध लड़ा जा रहा है.
मौत का फ़रिश्ता
वह कहते हैं, “उन्होंने जो किया हम उसकी निंदा करते हैं लेकिन पश्चिम में हमारे दोस्त सिर्फ़ इसी बात पर क्यों जोर दे रहे हैं जब हज़ारों लोग मर रहे हैं.”
अबु सक्कर इस बात से बिल्कुल आश्वस्त नहीं दिखते कि वह अपने कृत्य के लिए क्या प्रतिक्रिया देंगे. वह थोड़े घबराए, गुस्से में और तीखी बात कहते हुए नज़र आते हैं. वह बिल्कुल उन्हीं लोगों की तरह दिखते हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में कई बुरी चीज़ें देखी हों.
साक्षात्कार के आख़िर में वह कहते हैं कि वह दुश्मनों के लिए “मौत का फ़रिश्ता” हैं. इस वीडियो के आने के बाद उनके साथियों ने भी उनके बयान का एक वीडियो बनाया. इस वीडियो में अबु सक्कर साथ-सुथरे कपड़े पहने हुए सिगरेट पीते हुए नज़र आते हैं.
वह कहते हैं कि वह किसी भी तरह की सुनवाई के लिए तैयार हैं लेकिन राष्ट्रपति बशर असद को भी जांच की कार्रवाई का हिस्सा बनना होगा.
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