मुशर्रफ पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा

पाकिस्तान के पूर्व <link type="page"><caption> सैन्य शासक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130420_musharraf_judicial_custody_sk.shtml" platform="highweb"/></link> परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं. <link type="page"><caption> नवाज शरीफ सरकार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130430_pak_elections_points_ia.shtml" platform="highweb"/></link> ने मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्णय लिया है.
पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर 'राजद्रोह' का मुकदमा चलाया जाएगा.
साल 2013 के शुरु में ही मुशर्रफ दुबई और लंदन के अपने नौ साल के निर्वासन से वापस लौट आए थे. मगर अभी वे पाकिस्तान में नजरबंद हैं.
'तख्ता पलट'
मुशर्रफ के खिलाफ उनके शासनकाल से संबंधित कई आरोप लगाए गए हैं. सबसे महत्वपूर्ण आरोप है, नवाज शरीफ के खिलाफ 1999 में किए गए सैन्य तख्ता पलट का.
मुशर्रफ के प्रवक्ता ने इन आरोपों के बारे में कहा है कि यह ‘जल्दबाजी’ में लिया गया ‘निरर्थक’ कदम है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संसद में कहा, “ मुशर्रफ ने एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार संविधान का उल्लंघन किया. उन्होंने 1999 में तत्कालीन निर्वाचित सरकार का तख्ता पलट किया. सब कुछ खतरे में डाल दिया. न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया, उन्हें जेल में डाला.”
शरीफ ने आगे कहा, “उन्हें अदालत को अपने उपर लगाए गए इन सारे इल्जामों का जवाब देना होगा.”
पाकिस्तान के अटार्नी जनरल ने भी संसद में शरीफ से अपनी सहमति जताई. अटार्नी जनरल ने कहा कि सरकार चाहती है कि पाकिस्तान के पूर्व 'तानाशाह' के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए.
'जजों की नजरबंदी'

2007 में परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रपति शासन लागू किया था. इसके बाद मुशर्रफ ने वरिष्ठ जजों को भी उनके घरों में नजरबंद कर दिया था.
अदालत में पहले से ही वकीलों द्वारा पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है.
इन याचिकाओं में मांग की गई है कि मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए. क्योंकि पाकिस्तान में केवल सरकार ही देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप को अदालत में ला सकती है.
इधर मुशर्रफ के कार्यालय की ओर से बयान आया है कि पूर्व राष्ट्रपति ने ‘निस्वार्थ भाव’ से देश की सेवा की है.
बयान में आगे कहा गया, “पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ देशद्रोह का आरोप अनुचित है. सरकार यह आरोप लगा कर अपनी लापरवाही का ही प्रदर्शन कर रही है. ”
आरोपों का सिलसिला
इस साल के शुरुआत में पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक बहुत उम्मीद से पाकिस्तान वापस आए. वे मई में होने वाले प्रधानमंत्री के चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व करना चाहते थे.
मगर इस चुनाव के लिए मुशर्रफ को अयोग्य घोषित कर दिया गया. फिर अंत में इस्लामाबाद के उनके बंगले में उन्हें नजरबंद कर दिया गया. उन पर कई आरोप लगाए गए हैं.
मुशर्रफ पर पहला आरोप है कि 2007 में जब बेनजीर भुट्टो चुनाव में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान लौटीं तो मुशर्रफ उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने में नाकाम रहे.
इसके अलावा उन पर यह आरोप भी है कि साल 2007 में अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए उन्होंने वरिष्ठ जजों को जेल में बंद कर दिया था.
मुशर्रफ ने अपने उपर लगाए गए सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक </caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>कर सकतें हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












