ब्राज़ील: राष्ट्रपति ने किया सुधारों का ऐलान

ब्राज़ील में कई दिनों से जारी <link type="page"><caption> सरकार विरोधी प्रदर्शन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130621_brazil_unrest_ra.shtml" platform="highweb"/></link> रोकने की एक और कोशिश करते हुए राष्ट्रपति डिलमा रोसेफ़ ने कई सुधार कार्यक्रमों का ऐलान किया है.
टीवी पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वह <link type="page"><caption> सार्वजनिक परिवहन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130620_brazil_protest_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए नई योजना बनाएंगी और तेल की सारी रॉयल्टी का इस्तेमाल शिक्षा के लिए किया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि देश की स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के लिए विदेशों से हज़ारों डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी.
इससे पहले उन्होंने मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक बुलाकर विरोध प्रदर्शनों के बारे में चर्चा की.
परिवहन किराए में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ साओ पाउलो में प्रदर्शन शुरू हुए थे लेकिन जल्द ही पूरे देश में भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों के ख़िलाफ़ रैलियां होने लगीं.
प्रायोजकों का पैसा
गुरुवार रात दस लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतरे और कई शहरों में हिंसा भड़क उठी. इनमें दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए.
शुक्रवार को भी प्रदर्शन जारी रहे और क़रीब 1,000 लोगों ने रियो दे जेनेरो में जुलूस निकाला.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई दुकानें लूटी गई हैं और एक कला केंद्र की ख़ाली इमारत में लोग घुस गए. पुलिस पर पत्थर फेंके गए, तो उसने आंसू गैस के गोलों से इसका जवाब दिया.
साओ पाउलो में भी प्रदर्शन किए गए, जिससे ट्रैफ़िक जाम हो गया लेकिन किसी हिंसा की कोई ख़बर नहीं है. ब्राज़ील के उत्तर-पूर्व में फ़ोर्टेलेज़ा में भी प्रदर्शन हुए.

टीवी और रेडियो पर जारी पहले से रिकॉर्ड संबोधन में रोसेफ़ ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों की चिंता पर ध्यान दे रही हैं.
उन्होंने वादा किया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के नेताओं से मिलना चाहेंगी. उन्होंने कहा कि उन्हें “उनके सहयोग, उनकी ऊर्जा और उनकी क्षमताओं” की ज़रूरत है.
साओ पाउलो में बीबीसी के गैरी डफ़ी के अनुसार अपने जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण संबोधन में रोसेफ़ ने समझौतावादी दांव खेला.
उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि संस्थाएं ज़्यादा पारदर्शी बनें और ग़लत बातों को ज़्यादा से ज़्यादा रोकें.”
राष्ट्रपति ने अगले साल ब्राज़ील में होने वाले <link type="page"><caption> फ़ुटबॉल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130506_brazilian_football_taliban_compaign_rd.shtml" platform="highweb"/></link> विश्वकप के आयोजन का भी बचाव किया और कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में ब्राज़ील का हमेशा ही स्वागत किया जाता है.
इसके आयोजन पर हो रहे ख़र्च की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वकप को प्रायोजित करने वाली कंपियनां इसका ख़र्च उठाएंगी.
उन्होंने कहा, “मैं कभी भी करदाताओं के पैसे को इस पर ख़र्च नहीं करने दूंगी वह भी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे ज़रूरी क्षेत्रों की क़ीमत पर.”
कई प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा अभी चल रहे आठ टीमों के कॉफ़ेडेरेशन कप को लेकर भी है, जिसे अगले साल होने वाले विश्वकप का पूर्वाभ्यास माना जा रहा है.
प्रदर्शनकारी इसके टिकटों की ऊंची क़ीमतों और दोनों आयोजनों के साथ ही 2016 में रियो दे जेनेरो में होने वाले ओलंपिक पर किए जा रहे भारी ख़र्च से भी नाराज़ हैं.
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