ब्राज़ील: बढ़े किराए वापस, प्रदर्शनकारी डटे

सार्वजनिक परिवहन के भाड़े में वृद्धि के फ़ैसले को वापस लेने के बावजूद ब्राज़ीली प्रशासन देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को रोकने में कामयाब नहीं हो पाया है.

फ़ैसला वापस लेने के ऐलान के ठीक बाद लोगों की भीड़ ने साओ पाउलो और ब्राज़ीलिया में मुख्य सड़कें जाम कर दीं और रियो डी जेनेरो में पुलिस से भिड़ गई.

इससे पहले झगड़े तब हुए थे जब कन्फे़डरेशन कप के लिए ब्राज़ील की टीम फ़ोर्टेलेज़ा में मैक्सिको के ख़िलाफ़ खेलने वाली थी.

प्रदर्शनकारी अगले साल होने वाले <link type="page"><caption> फुटबॉल विश्व कप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/06/130612_world_cup_brazil_gallery_pk.shtml" platform="highweb"/></link> पर हो रहे भारी खर्च और भ्रष्टाचार से नाराज़ हैं.

<link type="page"><caption> (तस्वीरों में: ब्राजील में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/06/130618_brazil_protest_pic_gallery_sk.shtml" platform="highweb"/></link>

साओ पाउलो में बीबीसी संवाददाता जूलिया कारनीरो के अनुसार कन्फे़डरेशन कप के मैचों से पहले सैकड़ों हज़ार लोगों के सड़क पर उतरने की संभावना है.

प्रदर्शन जारी

दो सबसे बड़े शहरों रियो डी जेनेरो और साओ पाउलो में अधिकारियों के यह ऐलान करने के बाद कि वह सार्वजनिक परिवहन के भाड़े में वृद्धि के फ़ैसले को वापस ले रहे हैं, लगातार जारी प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया.

साओ पाउलो के मेयर फ़र्नांडो हद्दाद ने कहा कि भाड़ा वृद्धि वापसी का फ़ैसला एक “बड़ा त्याग” होगा और इसके लिए अन्य निवेशों में कटौती करनी पड़ेगी.

रियो के मेयर एडुआर्डो पेस ने भी यही बात दोहराई और कहा कि कम यात्रा भाड़े से शहर को हर साल 5 अरब रीयाल (13.46 अरब रुपये) का नुक्सान होगा.

अन्य शहरों के मेयर प्रदर्शनों को देखते हुए पहले ही बस किराए को घटाने का ऐलान कर चुके हैं.

प्रदर्शनकारियों पर असर नहीं

ब्राज़ील के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं
इमेज कैप्शन, ब्राज़ील के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं

लेकिन प्रदर्शनकारी इस कोशिश से ज़रा भी प्रभावित नहीं हुए.

रियो डी जेनेरो के उपनगर निटेरोई में हुए प्रदर्शनों में शामिल 18 वर्षीय छात्रा कैमिला सेना कहती हैं, “दरअसल अब यह किराए (परिवहन के) बारे में नहीं रह गया है. लोग इस देश की व्यवस्था से इतने नाराज़ हैं, इतने उकता गए हैं कि अब बदलाव चाहते हैं.”

बुधवार को उत्तर-पूर्वी शहर फ़ोर्टेलेज़ा में 30,000 से ज़्यादा लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ की गोलियां चलाईं.

जब पुलिस ने एक विरोध प्रदर्शन को रोका तो झड़पें शुरू हो गईं. पुलिस अधिकारियों समेत कई लोग घायल हो गए.

बीबीसी संवाददाता बेन स्मिथ के अनुसार विरोध के दौरान कई प्रदर्शनकारी बैनर लेकर आए थे, जिन पर लिखा था: “एक शिक्षक नेयमार के मुकाबले कहीं ज़्यादा उपयोगी है.”

नेयमार ब्राज़ील के स्टार <link type="page"><caption> फ़ुटबॉलर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130506_brazilian_football_taliban_compaign_rd.shtml" platform="highweb"/></link> हैं और उन्होंने मैक्सिको के ख़िलाफ़ गोल भी मारा था.

राष्ट्रपति को गर्व

मैच से पहले नेयमार ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिया था. उन्होंने फ़ेसबुक पर लिखा था, “मैं एक ब्राज़ीलियन हूं और मैं अपने देश को प्यार करता हूं. मेरा परिवार और दोस्त ब्राज़ील में रहते हैं. इसी वजह से मैं चाहता हूं कि ब्राज़ील ज़्यादा न्याय संगत, सुरक्षित, स्वस्थ और ज़्यादा ईमानदार हो.”

पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है
इमेज कैप्शन, पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है

उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ़ मैदान पर, फ़ुटबॉल खेलकर ही ब्राज़ील का प्रतिनिधित्व और रक्षा कर सकता हूं. अब से जब भी मैं मैदान में उतरूंगा वह इस आंदोलन से प्रेरित होगा.”

ब्राज़ील के मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी पेले ने प्रदर्शनकारियों का आह्वान किया है कि वह विरोध खत्म कर दें, “हम सब ब्राज़ील में हो रहे इस हुल्लड़ को भूल जाते हैं और याद करते हैं कि ब्राज़ीली टुकड़ी ही हमारा ख़ून, हमारा देश है.”

उप-राष्ट्रपति मिशेल टेमेर ने इसलाइल और फ़िलीस्तीनी क्षेत्र की यात्रा आधे में ही समाप्त कर दी और बुधवार को ब्राज़ील लौट आए.

राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ़ ने कहा है कि उन्हें गर्व है कि इतने सारे लोग बेहतर देश के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

बहुत से प्रदर्शनकारियों की शिकायत है कि रियो डी जेनेरो में होने वाले <link type="page"><caption> विश्व कप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/06/130612_brazil_wc_football_venues_map_as.shtml" platform="highweb"/></link> और 2016 के ओलंपिक पर भारी मात्रा में पैसा खर्च किया जा रहा है.

साल 1992 के बाद से हालिया विरोध प्रदर्शन सबसे बड़े हैं. तब तत्कालीन राष्ट्रपति फ़र्नांडो कोलोर डे मेलो पर महाभियोग की मांग करते हुए लोग सड़कों पर उतरे थे.

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