तुर्की में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना की तैनाती संभव

तुर्की में जारी तनाव के बीच पुलिस ने इस्तांबुल के तकसीम चौक पर प्रदर्शन के लिए जा रहे ट्रेड यूनियन के सैकड़ों लोगों को रोक दिया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जब पुलिस ने मजदूरों का रास्ता रोकने की कोशिश की तो वे जमीन पर ही लेट गए.
वहीं इस्तांबुल में ही कुछ अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा आँसू गैस छोड़े जाने की भी खबर मिली है.
इस बीच, तुर्की की सरकार ने कहा है कि वो इस्तांबुल और कुछ अन्य शहरों में पिछले तीन हफ्तों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकती है.
तुर्की के उप-प्रधानमंत्री बुलेंट एरिंक ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि सरकार जरूरत पड़ने पर सेना समेत अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगी.
ये पहला मौका है जबकि इस्लामी मूल वाली सरकार ने विद्रोहियों के खिलाफ सेना की तैनाती का मुद्दा उठाया है.
ये मुद्दा इसलिए भी काफी संवेदनशील है क्योंकि तुर्की में सेना को धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर के रूप में देखा जाता है.
रविवार को इस्तांबुल में हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए तुर्की के प्रधानमंत्री रेचेप तैयप अर्दोआन ने कहा था कि प्रदर्शनकारी चरमपंथियों के हाथों में खेल रहे थे.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान करीब पांच हजार लोग घायल हुए हैं जबकि कम से कम चार लोग मारे गए हैं.
शुरुआत
इस्तांबुल में गेज़ी पार्क के पुनर्विकास की योजना के मुद्दे पर ये विरोध प्रदर्शन गत 28 मई को शुरू हुआ था. विरोध की शुरुआत शहर के बीचों बीच स्थित तकसीम चौक पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे इसने देश के कई हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन का रूप अख्तियार कर लिया.
उप प्रधानमंत्री का कहना था कि बीस दिन पहले शुरू हुआ ‘सीधा-सादा’ प्रदर्शन अब खत्म हो चुका है.
उनका कहना था कि अब किसी भी तरह के प्रदर्शन को तुरंत दबा दिया जाएगा. उप प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी पुलिस, हमारे सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. यदि ये पर्याप्त नहीं होंगे तो फिर सेना अपना काम करेगी.”
पिछले सप्ताहांत में इस्तांबुल में गृहमंत्रालय के अधीन आने वाले सशस्त्र बलों की तैनाती प्रदर्शनकारियों के लिए काफी चौंकाने वाली थी.
हालांकि एक साक्षात्कार में देश के गृह मंत्री मुअम्मर गुलेर ने कहा था कि उन्होंने पुलिस की मदद के लिए सेना को बुलाने का कोई सुझाव नहीं दिया था.
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