कहाँ तक पहुँचा है ईरान का परमाणु कार्यक्रम?

ईरान में हो रहे हैं. इसमें हिस्सा ले रहे देश के सभी उम्मीदवार के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करते हैं. इन सभी उम्मीदवारों को चुनाव में उतरने की इजाज़त वहाँ की गार्डियन काउंसिल ने दी है.
ऐसे में देश के परमाणु कार्यक्रम के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं.
ईरान का अपनी परमाणु गतिविधियों पर पर्दा डालने का इतिहास है और वो संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था, आईएईए के निरीक्षकों को अपने संयंत्रों की जांच और दस्तावेज़ सौंपने से इनकार करता रहा है.
आईएईए की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अब भी सहयोग नहीं कर रहा है. तो क्या ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ आंख-मिचौली कर रहा है ताकि उसे परमाणु हथियार बनाने के लिए और समय मिल सके?
बीबीसी संवाददाता रॉब ब्रूमबी ने हालात का जायज़ा लेने की कोशिश की है.
असली ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में ये कोशिशें हुईं कि परमाणु हथियारों का प्रसार किसी तरह रोका जाए लेकिन इसमें एक बड़ी समस्या ईरान की है.
जेनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में अपने देश के परमाणु कार्यक्रम के आलोचकों को जवाब देते हुए ईरान के प्रतिनिधि ने कहा था कि ईरान परमाणु ऊर्जा के मसले पर अपने रवैए से कभी भी समझौता नहीं करेगा. वह पश्चिम के दबाव में भी नहीं आएगा.
इसी बैठक में अमरीकी प्रतिनिधि टॉमस कंट्रीमैन ने कहा था कि असली ख़तरा ईरान से है क्योंकि उसके पास जल्द ही परमाणु बम बनाने के लिए सामग्री होगी.
ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है लेकिन आलोचक इस पर यकीन नहीं करते क्योंकि इससे पहले भी ईरान ने गुप्त परमाणु गतिविधियों के नियम तोड़े हैं.
ईरान का कहना है कि उसे अपने संयंत्रों के लिए अपने परमाणु ईंधन का संवर्धन करने का हक़ है लेकिन अगर वो इसी तरह उच्च स्तर तक यूरेनियम का संवर्धन करता रहेगा तो उसके पास परमाणु बम के लिए सामग्री तैयार हो जाएगी.
निर्णायक दौर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान को ईंधन संवर्धन कार्यक्रम रोकने का आदेश दिया है लेकिन उल्टा ईरान ये कार्यक्रम और तेज़ी से बढ़ा रहा है.
ऑली हाएनेनन साल 2010 तक आईएईए के मुख्य निरीक्षक थे. वे कहते हैं कि जल्द ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम निर्णायक दौर में पहुंच जाएगा.
इस साल गर्मी तक ईरान की परमाणु क्षमता दोगुनी हो जाएगी. अगर उन्हें परमाणु बम बनाना है, तो उसके लिए सामग्री एक महीने में तैयार हो जाएगी.
ईरान कहता है कि उसकी परमाणु हथियार बनाने की कोई योजना नहीं है. तो आखिर कौन सच कह रहा है?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी पूरे यक़ीन के साथ कुछ नहीं कह सकती क्योंकि ईरान अब भी अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में सहयोग नहीं कर रहा और इस गतिरोध को ख़त्म करने के लिए हो रही बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल रहा.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम में शुरू से ही गोपनीयता थी. वह वर्षों से उस तकनीक का विकास कर रहा है जिससे वो परमाणु हथियार बना सके.
अघोषित परमाणु सामग्री

लेकिन उसका राज़ साल 2002 में खुला जब एक ईरानी विद्रोही गुट ने बताया कि नातांज़ नाम की जगह पर एक गुप्त यूरेनियम संवर्धन कारखाना है.
इससे ईरान का राज़ खुल गया और उसे संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अपने संयंत्रों में जाने की इजाज़त देनी पड़ी. पियर गोल्डश्मिट उस आईएईए जांच दल के उपनिदेशक थे.
वे कहते हैं, "हम फरवरी 2003 में नातांज़ परमाणु संयंत्र देखने गए. हमें ये देख कर बड़ी हैरानी हुई कि वहां एक बड़े संयंत्र का निर्माण हो रहा था और एक सेंट्रीफ्यूज संवर्धन सुविधा लगभग तैयार हो चुकी थी."
ईरान के आलोचकों का डर सही निकला क्योंकि नातांज़ ईरान को परमाणु बम बनाने का रास्ता दिखा सकता था.
इतना ही नहीं, नियमों को तोड़ते हुए ईरान को गोपनीय प्रयोगों के लिए चुपचाप चीन से अघोषित परमाणु सामग्री भी मिल गई थी.
प्रस्ताव का उल्लंघन

'कारनेगी एंडाओमेंट फॉर पीस' संस्था के मार्क हिब्स कहते हैं, "ईरान ने 18 साल तक आईएईए से लगातार झूठ बोला और धोखा दिया क्योंकि ईरान ने गुप्त रूप से, बिना जानकारी दिए, कई जगह से परमाणु सामग्री आयात की थी. वह इसमें से कुछ सामग्री यूरेनियम धातु जैसी संवदेनशील सामग्री में बदल रहा था जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों की रिसर्च में किया जा सकता था."
साल 2009 में फोरदो नाम की जगह में एक भूमिगत अघोषित यूरेनियम संवर्धन सुविधा का पता चला. ईरान ने एक बार फिर नियम तोड़े थे.
अली असग़र सोल्तानिएह, ईरान के मुख्य परमाणु दूत हैं. जब उनसे दशकों तक गोपनीयता और झूठ के दावों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं ख़ुश हूं कि इस बारे में सवाल पूछा गया है. नातांज़ भूमिगत सुविधा नहीं है. वो एक हाईवे के पास बना है जिसे हर कोई देख सकता है. गोपनीयता वाली सारी बात झूठी है. हमने कभी भी किसी संयंत्र की बात नहीं छुपाई. हमने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन नहीं किया है और न ही हम आईएईए के साथ आंख-मिचौली खेल रहे हैं."
और अब अराक नाम की जगह में एक और परमाणु संयंत्र बनने की ख़बर पर चिंता है.
व्यापक विनाश के हथियार

जब ये संयंत्र अगले साल चालू हो जाएगा, इससे ईरान को प्लूटोनियम मिल सकेगा, जिसके इस्तेमाल से एक अलग तरह का परमाणु हथियार बनाया जा सकता है.
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान परमाणु क्षमता की दहलीज़ पर खड़े देश के तौर पर पहचान चाहता है, ऐसा देश जिसके पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता तो है लेकिन वो खुद पर खतरा होने की स्थिति तक ऐसा करेगा नहीं.
मगर इस बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका का रुख कड़ा होता जा रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्यापक विनाश के हथियारों पर निगरानी का एक कार्यक्रम चलाया है, फ़रवरी तक इसके संयोजक गैरी सैमोर थे.
वे कहते हैं कि अमरीका, परमाणु क्षमता वाले ईरान का ख़तरा नहीं मोल ले सकता, "मेरा मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता परमाणु हथियार चाहते हैं. और जब तक हम ईरान को ऐसा करने से रोक नहीं पाते, मुझे लगता है कि किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ जाएगी. राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि वो खुद सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं."
आईएईए के एक पूर्व निदेशक ने चेतावनी दी है कि ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले से मध्य-पूर्व में महायुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
इसके बावजूद ईरान का कहना है कि उसकी दस और प्रतिबंधित संवर्धन सुविधाएं और चार अन्य परमाणु संयंत्र बनाने की योजना है. ऐसे हालात में आने वाले महीने निर्णायक साबित होंगे.
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