ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में 'पाबंदी की राजनीति'

- Author, सईद बार्जिन
- पदनाम, बीबीसी पर्सियन सर्विस
<link type="page"><caption> ईरान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130517_women_in_iran_election_rns.shtml" platform="highweb"/></link> के तजुर्बेकार और व्यावहारिक कहे जाने वाले राजनीतिज्ञ अकबर हाशमी रफसंजानी को वहां 14 जून को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई है.
यह फैसला देश की संवैधानिक संस्था गार्डियन काउंसिल ने लिया है.
गार्डियन काउंसिल वह संस्था है जिसे राष्ट्रपति पद के लिए <link type="page"><caption> संभावित</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130416_earth_quake_ml.shtml" platform="highweb"/></link> उम्मीदवारों को अयोग्यता के आधार पर प्रतिबंधित करने का अधिकार मिला हुआ है.
बहरहाल कुछ हलकों में यह कहा जा रहा है कि <link type="page"><caption> रफसंजानी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130409_iran_earthquake_va.shtml" platform="highweb"/></link> को अयोग्य करार दिए जाने से इस <link type="page"><caption> इस्लामी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130519_iran_spying_hang_ra.shtml" platform="highweb"/></link> गणतंत्र को गंभीर परिणामों से रुबरू होना पड़ सकता है.
इस फैसले का सीधा मतलब यह हुआ कि अगले महीने मुल्क में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में <link type="page"><caption> मध्यमार्गी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130322_international_iran_israel_ia.shtml" platform="highweb"/></link> धड़े की नुमाइंदगी करने वाले इस 78 वर्षीय राजनीतिज्ञ को राजनीतिक व्यवस्था से किनारे कर दिया गया है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया

यह मुमकिन है कि रफसंजानी को अपना नुमाइंदा मानने वाले लोग राजनीतिक प्रक्रिया से अलग होकर इसका बहिष्कार भी कर सकते हैं.
इसमें देश का मध्य वर्ग और कारोबारी लोग और यहां तक कि पारंपरिक मौलवियों का तबका भी शामिल है.
एक हलके में यह भी माना जा रहा है कि रफसंजानी को अयोग्य करार दिए जाने का फैसला करके राजनीतिक व्यवस्था अपनी जड़े कमजोर कर रहा है.
माना जा रहा है कि ईरान में हाशिए की तरफ धकेल दिए गए सामाजिक समूहों से खुद को बचाने के लिए देश को अपने बचाव के कड़े कदम उठाने होंगे.
रफसंजानी ईरानी गणतंत्र के संस्थापक सदस्यों में से रहे हैं. 80 के दशक में इराक़ के साथ आठ सालों तक चली लड़ाई में उनकी अहम भूमिका रही थी. बाद के दौर में शुरू हुए सुधारात्मक कार्यक्रम में भी रफसंजानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सेवानिवृत

लेकिन आधी सदी की क्रांतिकारी राजनीति के बाद उन्होंने अपना रुख उदारवादी राजनीति की तरफ कर लिया.
पिछले चार सालों से वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर सुधार की मांग के साथ-साथ सामाजिक सहिष्णुता और अधिक खुलेपन की बात करते रहे हैं.
ईरान की राजनीति का पारंपरिक और दक्षिणपंथी धड़ा इस बदलाव के लिए तैयार नहीं था उन्हें धीरे-धीरे हाशिए की तरफ धकेलने लगा.
यहां तक कि उनके बच्चों को जेल भेज दिया गया. इस पर ईरान में कई लोगों का कहना है कि रफसंजानी के बच्चों पर मनगढंत आरोप लगाए गए थे.
और अब जब कि रफसंजानी को किनारे कर दिया गया है उनके राजनीतिक सहयोगी भी उनसे अलग हो सकते हैं. और इसका सीधा मतलब यही होगा कि वे राजनीतिक तौर पर सेवानिवृत हो जाएंगे.
<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर <link type="page"><caption> फ़ॉलो</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> भी कर सकते हैं.)</bold>












