इमरान की सफलता से खुश हैं जेमाइमा

तहरीक ए इंसाफ पार्टी के प्रमुख <link type="page"><caption> इमरान खान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130512_rajiv_nawaz_pakistan_india_adg.shtml" platform="highweb"/></link> की पूर्व पत्नी जेमाइमा ख़ान का कहना है कि वो इस पार्टी के प्रदर्शन से काफी खुश हैं.
तहरीक ए इंसाफ को <link type="page"><caption> ख़ैबर पख़्तून प्रांत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130512_pakistan_election_provinces_aa.shtml" platform="highweb"/></link> में सफलता मिली है और वो वहाँ सरकार बनाने की तैयारी में है.
लंदन में रह रही जेमाइमा ने ट्वीट किया, "ये उस राजनीतिक दल के लिए भारी सफलता है जिसके पास संसद में सिर्फ एक सीट हुआ करती थी. एक प्रांत में सत्ता में भी आई है. सुनामी न सही, लेकिन निश्चित तौर पर नए पाकिस्तान की ओर."
इससे पहले जेमाइमा ने ट्वीट किया था है कि <link type="page"><caption> आतंक की धमकियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130512_pak_ballot_over_bullet_fma.shtml" platform="highweb"/></link> के बावजूद लोगों ने वोट डाले.
जेमाइमा ने ये भी ट्वीट किया था कि उनके लड़कों ने इमरान खान का कुर्ता पहन रखा है. उनके दो बेटे हैं सुलेमान खान और कासिम खान.
जेमाइमा ने 1995 में इमरान से निकाह किया था, लेकिन 2004 में दोनों ने तलाक ले लिया.
दूसरी सबसे बड़ी पार्टी
पीटीआई के नेता असद ओमार का कहना है कि तहरीक ए इंसाफ के लिए ये स्वर्णिम दिन है.
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का संसद में प्रतिनिधित्व न के बराबर था वो देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है. साथ ही खैबर पख्तून प्रांत में वो सरकार बनाने की स्थिति में आती जा रही है.
अफगानिस्तान से लगने वाले पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तून प्रांत में इमरान खान की पार्टी को काफी फायदा होता दिख रहा है.
पार्टी प्रांतीय असेंबली की 99 सीटों में से 76 के <link type="page"><caption> नतीजे </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/pakistan/2013/05/130510_pakistan_election_result_live_psa.shtml" platform="highweb"/></link>आ गए हैं. इनमें 25 सीटें जीतकर तहरीक ए इंसाफ सबसे आगे चल रही है जबकि पीएमएल(एन) को 10 सीटें मिली हैं.
ये प्रांत सबसे ज़्यादा चरमपंथी हिंसा का शिकार है. चुनावों में यहां सबसे ज्यादा उम्मादवीरों पर हमले हुए.
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