इमरान का चुनावी बाउंसर, पहले भ्रष्टाचार को आउट करूंगा

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी लोकतांत्रिक सरकार ने पांच साल के अपने कार्यकाल को पूरा किया और अब वहां 11 मई को आम चुनाव होने वाले है.
चुनाव प्रचार ज़ोरों पर है और <link type="page"><caption> तालिबान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130321_imran_khan_mobile_application_social_media_pak_election_vr.shtml" platform="highweb"/></link> प्रायोजित हिंसा भी उम्मीदवारो को निशाना बना रही है.
पाकिस्तान में इस बार सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और मुख्य विपक्षी पार्टी नवाज़ शरीफ़ की मुस्लिम लीग (नून) के अलावा पूर्व क्रिकेटर <link type="page"><caption> इमरान ख़ान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130321_imran_khan_mobile_application_social_media_pak_election_vr.shtml" platform="highweb"/></link> की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं.
मैंने चुनाव प्रचार में जुटे इमरान ख़ान के साथ उनके गृह प्रदेश पंजाब में उनकी चुनावी रैलियों का जायज़ा लिया.
इमरान ख़ान कहते हैं कि पाकिस्तान की प्रमुख पार्टियों से जनता का मोह भंग हो गया है.
चुनाव प्रचार के दौरान बातचीत में इमरान ख़ान कहते हैं, ''लोगों ने इस बार फ़ैसला कर लिया है. उन्होंने तमाम पार्टियों को आज़मा कर देख लिया है. मुझे अब्राहम लिंकन की उस बात पर पूरा भरोसा है कि आप सभी लोगों को हर समय बेवक़ूफ़ नहीं बना सकते हैं.''
'80 फ़ीसदी लोग अपराधी'
भ्रष्टाचार को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाते हुए इमरान कहते हैं, ''पाकिस्तान में उच्च स्थानों पर बैठे हुए 80 फ़ीसदी लोग अपराधी हैं. मुझे बाक़ी 20 फ़ीसदी लोगों के बारे में भी शक है लेकिन इतना तो तय है कि शीर्ष पदों पर बैठे 80 प्रतिशत लोग अगर पश्चिमी देशों में होते तो अब तक वे जेल में बंद होते.''
इमरान ख़ान का दावा है कि इस बार चुनाव में एक राजनीतिक सुनामी आएगी, जो उनकी पार्टी को सत्ता में बिठा देगी.
उनके दावे में इतना दम तो नहीं लगता लेकिन इतना ज़रूर है कि उन्होंने पाकिस्तान की नई पीढ़ी के एक बड़े हिस्से को उन्होंने अपनी ओर आकर्षित किया है और उनके राजनीतिक विरोधी उन पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं.
चुनावी भाषणों में इमरान बार-बार यही कहते हैं कि अब पाकिस्तान में बदलाव का समय आ गया है.
उनके इस तरह के बयान युवाओं को अपील भी करते हैं और चुनाव के दिन इमरान को इन्हीं युवाओं पर निर्भर करना होगा. चुनाव के दिन अगर भारी संख्या में मतदान होता है तो इससे इमरान ख़ान की पार्टी को लाभ मिलने की संभावना है.
दावा

स्टेज पर पहुंचते ही इमरान ख़ान क्रिकेट की भाषा में अपने राजनीतिक विरोधियों को आउट करने का दावा करते हैं.
बदलाव की ज़रूरत के अलावा भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाते हुए इमरान ख़ान सिर्फ़ 90 दिनों में भ्रष्टाचार समाप्त करने का दावा करते हैं.
उनके राजनीतिक विरोधी और आलोचक कहते हैं कि इमरान ख़ान राजनीति में नए हैं और तालिबान के प्रति उनका रवैया नरम रहता है.
लेकिन इमरान के समर्थक मानते हैं कि इमरान ही पाकिस्तान की अकेली उम्मीद हैं. चुनावों के नतीजे आने के बाद उम्मीद है कि उनकी पार्टी गठबंधन सरकार की एक हिस्सा होगी या फिर विपक्ष की एक अहम आवाज़ हो सकती है.
लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में इमरान ख़ान के राजनीतिक अहमियत की अनदेखी नहीं की जा सकती है.












