रंग-बिरंगी पट्टी से जानिए कुत्ते का स्वभाव

आवारा कुत्ते
इमेज कैप्शन, लंदन में कुत्तों के स्वभाव से मेल खाती रंगीन पट्टी पहनाई जा रही है

लंदन के कुछ हिस्से में जिन <link type="page"><caption> आवारा कुत्तों</caption><url href="लंदन के कुछ हिस्से में जिन आवारा कुत्तों की घर वापसी हो रही है उनके स्वभाव का अंदाजा लगाने के लिए गले में ट्रैफिक लाइट के रंगों जैसा ही पट्टा लगाया जाएगा. हैकनी के कुत्ता घरों में रहने वाले कुत्तों के गले में हरे, गहरे पीले और लाल रंग की पट्टी होगी. जब ऐसे कुत्ते सड़कों पर टहलते हुए नज़र आएंगे तो इन पट्टियों की वजह से अंदाजा होगा इन कुत्तों का स्वभाव कैसा है. हैकनी काउंसिल का कहना है कि इसके 90 फीसदी आवारा कुत्ते स्टैफोर्डशायर नर शिकारी कुत्ते हैं जो स्वभाव से उग्र माने जाते हैं डॉग्स ट्रस्ट का कहना है कि यह बेहद प्रोत्साहन भरा क़दम है लेकिन इससे कुत्तों के स्वभाव से जुड़ी दिक्कतों का हल नहीं निकल सकता है. मिलफील्ड्स रोड के कुत्ता घरों के कुत्ते, हरे रंग की पट्टी पहनेंगे जिससे अंदाजा होगा कि उनका स्वभाव मित्रवत है, वहीं गहरे पीले रंग की पट्टी वाले कुत्तों को देखते ही किसी को यह अंदाज़ा हो सकता है कि ऐसे कुत्ते दूसरों के साथ सहज महसूस नहीं करते. जिन कुत्तों के गले में लाल रंग की पट्टी हो उससे अंदाज़ा मिलेगा है कि उन्हें यह बिल्कुल भी पसंद नहीं कि कोई भी उनसे छेड़छाड़ करे. इन आवारा कुत्तों को कोट भी पहनाया जाएगा जिस पर उनकी घर वापसी का संदेश विज्ञापन के तौर पर दिया जाएगा. काउंसिल से जुड़े अल्सटेयर स्मिथ का कहना है, “हमें ज्यादातर स्टैफिज़ (स्टैफोर्डशायर) प्रजाति के कुत्ते मिल रहे हैं और कुछ लोग इन कुत्तों को अच्छे स्वभाव का नहीं मानते हैं.” “अगर कोई किसी पार्क में ऐसे कुत्तों के पास जाता है तो उन्हें इन्हीं पट्टी के जरिये अंदाज़ा हो जाएगा कि ये कुत्ते कैसे अपनी प्रतिक्रिया देंगे.” वर्ष 2012 के दौरान हैकनी काउंसिल ने 215 कुत्ते जुटाए थे जिनमें से 76 कुत्तों की घर वापसी हुई थी, 97 कुत्तों को उनके मालिकों के पास पहुंचाया गया था जबकि 42 कुत्तों को सुलाया था. डॉग्स ट्रस्ट के एलविरा मेयुसी का कहना है, “यह कुत्ते के मालिकों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने कुत्तों को प्रशिक्षण दें और उनके स्वभाव से जुड़ी दिक्कतें दूर करें. इस कोशिश में ट्रैफिक लाइट के रंग का पट्टा पहला कदम हो सकता है लेकिन यह कुत्तों के स्वभाव से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में कारगर नहीं होगा.” ट्रस्ट का कहना है कि ग्रेटर लंदन में आवारा कुत्तों की तादाद में 148 फीसदी का इज़ाफा देखा गया जबकि छोड़े गए स्टैफॉर्डशायर नर शिकारी कुत्तों की संख्या 2011 के 1,641 से बढ़कर 2012 में 4,071 हो गई. लोगों का कहना है कि वे इन कुत्तों को इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि उनके लिए इन कुत्तों को रखना काफी महंगा साबित होगा. वहीं ट्रस्ट का कहना है कि स्टैफिज बेहद अच्छे घरेलू कुत्ते बन सकते हैं अगर एक जिम्मेदार कुत्ता मालिक संजीदगी से उनकी देखभाल करे." platform="highweb"/></link> की घर वापसी हो रही है उनके स्वभाव का अंदाज़ा लगाने के लिए गले में ट्रैफ़िक लाइट के रंगों जैसा ही पट्टा लगाया जाएगा.

हैकनी के कुत्ता घरों में रहने वाले कुत्तों के गले में हरे, गहरे पीले और लाल रंग की पट्टी होगी. जब ऐसे कुत्ते सड़कों पर टहलते हुए नज़र आएंगे तो इन पट्टियों की वजह से अंदाज़ा लगाया जा सकेगा कि इन कुत्तों का स्वभाव कैसा है.

हैकनी काउंसिल का कहना है कि इसके 90 फ़ीसदी आवारा <link type="page"><caption> कुत्ते</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130212_dogs_behaviour_study_vr.shtml" platform="highweb"/></link> स्टैफ़ोर्डशायर नर शिकारी कुत्ते हैं जो स्वभाव से उग्र माने जाते हैं. डॉग्स ट्रस्ट का कहना है कि यह बेहद प्रोत्साहन भरा क़दम है लेकिन इससे कुत्तों के स्वभाव से जुड़ी दिक़्क़तों का हल नहीं निकल सकता है.

मिलफील्ड्स रोड के कुत्ता घरों के कुत्ते, हरे रंग की पट्टी पहनेंगे जिससे अंदाज़ा होगा कि उनका स्वभाव मित्रवत है, वहीं गहरे पीले रंग की पट्टी वाले कुत्तों को देखते ही किसी को यह अंदाज़ा हो सकता है कि ऐसे कुत्ते दूसरों के साथ सहज महसूस नहीं करते.

जिन कुत्तों के गले में लाल रंग की पट्टी हो उससे अंदाज़ा होगा कि उन्हें यह बिल्कुल भी पसंद नहीं कि कोई भी उनसे छेड़छाड़ करे.

इन आवारा कुत्तों को कोट भी पहनाया जाएगा जिस पर उनकी घर वापसी का संदेश विज्ञापन के तौर पर दिया जाएगा.

काउंसिल से जुड़े अल्सटेयर स्मिथ का कहना है, “हमें ज्यादातर स्टैफ़िज़ (स्टैफ़ोर्डशायर) <link type="page"><caption> प्रजाति </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/01/130106_extinct_dog_gallery_va.shtml" platform="highweb"/></link>के कुत्ते मिल रहे हैं और कुछ लोग इन कुत्तों को अच्छे स्वभाव का नहीं मानते हैं.”

“अगर कोई किसी पार्क में ऐसे कुत्तों के पास जाता है तो उन्हें इन्हीं पट्टी के ज़रिए अंदाज़ा हो जाएगा कि ये कुत्ते कैसे अपनी प्रतिक्रिया देंगे.”

कैसा अभियान

अवारा कुत्ते
इमेज कैप्शन, लंदन में पिछले साल स्टैफोर्डशायर कुत्ते की प्रजाति की तादाद बढ़ी है

वर्ष 2012 के दौरान हैकनी काउंसिल ने 215 कुत्ते जुटाए थे जिनमें से 76 कुत्तों की घर वापसी हुई थी, 97 कुत्तों को उनके मालिकों के पास पहुंचाया गया था जबकि 42 कुत्तों को सुलाया था.

डॉग्स ट्रस्ट के एलविरा मेयुसी का कहना है, “यह कुत्ते के मालिकों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने कुत्तों को प्रशिक्षण दें और उनके स्वभाव से जुड़ी दिक़्क़तें दूर करें. इस कोशिश में ट्रैफ़िक लाइट के रंग का पट्टा पहला क़दम हो सकता है लेकिन यह कुत्तों के स्वभाव से जुड़ी दिक़्क़तों को दूर करने में कारगर नहीं होगा.”

ट्रस्ट का कहना है कि ग्रेटर लंदन में आवारा कुत्तों की तादाद में 148 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा देखा गया जबकि छोड़े गए स्टैफ़ोर्डशायर नर शिकारी कुत्तों की संख्या 2011 के 1,641 से बढ़कर 2012 में 4,071 हो गई.

लोगों का कहना है कि वे इन कुत्तों को इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि उनके लिए इन कुत्तों को रखना काफ़ी महंगा साबित होगा.

वहीं ट्रस्ट का कहना है कि स्टैफ़िज़ बेहद अच्छे घरेलू कुत्ते बन सकते हैं अगर एक ज़िम्मेदार कुत्ता मालिक संजीदगी से उनकी देखभाल करे.