मुशर्रफ़ को नहीं जाना चाहिए जेल : पाक पुलिस

पाकिस्तान के <link type="page"><caption> पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130416_musharraf_election_barred_rd.shtml" platform="highweb"/></link>की गिरफ्तारी के अदालती आदेश के बावजूद उन्हें गिरफ़्तार न करने पर इस्लामाबाद के पुलिस प्रमुख को 19 अप्रैल, यानी आज, अदालत में तलब किया गया है.
अदालत ने मुशर्रफ़ के जमानत रद्द करने के फ़ैसले में कहा है कि जब यह फ़ैसला हो रहा था तब हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने अदालत को सूचित किया कि था कि जनरल मुशर्रफ़ के निजी गार्ड ने उन्हें स्थानीय पुलिस के सामने गिरफ़्तारी देने के बजाय अदालत से भगाने में मदद कर रहे हैं.
अदालत के फैसले में कहा गया है कि जाहिर तौर पर मुशर्रफ़ और उनके सुरक्षाकर्मियों ने एक और अपराध किया है इसलिए इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वह अदालत में उपस्थित होकर बताएं कि इस मामले से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिस को क्यों नहीं तैनात किया गया.
रिपोर्ट दें
अदालत ने पुलिस महानिरीक्षक या आईजी से मुशर्रफ़ की मदद करने वाले लोगों और अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन न करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है.
इन बातों पर आईजी ने का कहना है, “हमारा मानना है कि देश में सुरक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए मुशर्रफ़ को उनके घर में रहने देना चाहिए. वह इस्लामाबाद में ही रहेंगे और जब भी अदालत तलब करेगी वह उपस्थित होंगे.”
पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में पुलिस आईजी ने कहा, "एसएसपी मुशर्रफ़ के फ़ॉर्म हाउस पर गए और उनसे बात भी की. वह अपने घर में पुलिस के लिए उपलब्ध हैं. अभी कानूनी प्रक्रिया चल रही है ऐसे में पुलिस भी एहतियात के साथ क़दम उठा रही है."
अदालत द्वारा गिरफ़्तारी के आदेश जारी होने के बाद से पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अपने निजी सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित चक शहज़ाद में अपने फ़ॉर्म हाउस पर हैं और अभी भी उनकी गिरफ़्तारी के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है.
आदेश
परवेज़ मुशर्रफ़ की गिरफ़्तारी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में दिया गया है.

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने गुरुवार को परवेज़ मुशर्रफ़ की अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया.
बीबीसी संवाददाता शहजाद मलिक ने बताया कि अदालत ने जिस समय यह आदेश दिया, उस समय मुशर्रफ़ अदालत में ही मौजूद थे, लेकिन इस्लामाबाद थाना पुलिस ने, जहां यह मामला दर्ज है, कोई कार्रवाई नहीं की.
मामला
वकीलों ने अदालत में मांग की थी कि जनरल मुशर्रफ़ पर अपने शासन काल के दौरान आपातकाल लागू करने और 2007 में वरिष्ठ जजों को बर्खास्त करने का मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए.
हाल ही में, जजों की बर्खास्तगी के मामले पर परवेज़ मुशर्रफ़ ने <bold> <link type="page"><caption> बीबीसी से बात</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130408_musharraf_pak_sc_sm.shtml" platform="highweb"/></link></bold> करते हुए कहा, "उस वक्त मैं लोकतांत्रिक व्यवस्था को लागू करने की कोशिश कर रहा था और उस कोशिश में कुछ कड़ी कार्रवाइयां करनी पड़ीं, जो मैंने कीं. जजों की बर्ख़ास्तगी का मामला उस वक्त की जरूरत थी, इसलिए ऐसा करना सही था.
जनरल मुशर्रफ़ को 2008 में सत्ता से हटा दिया गया था जिसके बाद वो विदेश चले गए थे.
लेकिन मई में होने वाले आम चुनाव में शिरकत करने के लिए वो पाकिस्तान लौटे हैं पर उनका सभी जगह से <link type="page"><caption> नामांकन रद्द</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130416_musharraf_election_barred_rd.shtml" platform="highweb"/></link> हो चुका है.












