पाकिस्तान से बाहर नहीं जा सकेंगे मुशर्रफ़

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को जजों के सामने पेश होने का आदेश दिया है. इस पेशी के दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ अपने कार्यकाल में लगे देशद्रोह के आरोपों का सामना करेंगे.
शीर्ष अदालत ने उन्हें मंगलवार को पेशी का समन जारी किया है और उनके देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है.
वकीलों ने अदालत में मांग की है कि जनरल मुशर्रफ़ पर अपने शासन काल के दौरान आपातकाल लागू करने और 2007 में वरिष्ठ जजों को बर्खास्त करने का मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए.
जनरल मुशर्रफ़ को 2008 में सत्ता से हटा दिया गया था जिसके बाद वो विदेश चले गए थे. लेकिन मई में होनेवाले आम चुनाव में शिरकत करने के लिए वो पाकिस्तान लौटे हैं.
आम चुनाव
इससे पहले रविवार को जनरल <link type="page"><caption> मुशर्रफ़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130324_pakistan_musharraf_ia.shtml" platform="highweb"/></link> को अगले महीने होने वाले आम चुनावों में अपनी क़िस्मत आज़माने की इजाज़त मिल गई.
वो पाकिस्तान के सुदूर उत्तर में स्थित ज़िले चितराल से प्रत्याशी होंगे. इससे पहले देश की दो अन्य सीटों से उनका नामांकन ख़ारिज कर दिया गया था.
पूर्व सेना प्रमुख भी रह चुके मुशर्रफ़ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख्तापलट के बाद लगभग नौ साल तक पाकिस्तान में अपनी हुकूमत चलाई लेकिन फिर उन्हें मजबूर होकर सत्ता छोड़नी पड़ी.

पिछले चार-पांच वर्षों से वो विदेश में रह रहे थे लेकिन कुछ ही दिन पहले वो पांच साल बाद अपने देश वापस लौटे हैं.
आरोप
मुशर्रफ़ फ़िलहाल अपने कार्यकाल से संबंधित कई आरोपों का सामना कर रहे हैं. उनमें से एक आरोप यह है कि वह 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री <link type="page"><caption> बेनज़ीर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/pakistan/2011/11/111105_bhutto_pak_vd.shtml" platform="highweb"/></link> भुट्टों की हत्या से पहले उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहे थे.
वह बलूचिस्तान के जनजातीय नेता नवाब अकबर बुग्ती की हत्या में शामिल होने और नवंबर 2007 में पूरी न्यायपालिका को बंधक बनाने के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं.
लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने अपने ख़िलाफ दायर मामलों को “आधारहीन” और राजनीति से प्रेरित बताया है.
पिछले सप्ताह अधिकारियों ने कुछ आपत्तियों के चलते कसूर से मुशर्रफ़ का नामांकन पत्र ख़ारिज कर दिया था. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर स्थित चितराल में अधिकारियों ने कहा कि उनके दस्तावेज़ सही हैं.
नामांकन अधिकारी जमाल ख़ान ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, “वह अभी तक दोषी साबित नहीं हुए हैं, इसलिए हम उन्हें अयोग्य नहीं ठहरा सकते.”












