दुर्लभ पेंटिंग चाहिए 80 रुपए निकालें!

एकदम नन्हीं नन्हीं कलाकृतियां. ‘लीड्स’ की एक वेंडिंग मशीन के जरिए हजारों की संख्या में छोटे-छोटे <link type="page"><caption> आर्टवर्क्</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/02/130204_art_protest_pg_da.shtml" platform="highweb"/></link> बिकने जा रहे हैं. कीमत होगी, मात्र एक पाउंड या तकरीबन 80 रुपए.
लीड्स की यह खास पहल मशहूर और दुर्लभ <link type="page"><caption> कला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120606_queen_jubilee_protest_vd.shtml" platform="highweb"/></link> को सामान्य व्यक्ति के लिए भी सहज सुलभ बनाने में कारगर साबित होगी.
लीड्स की यह पेशकश 3500 पाउंड के नए ट्रिनिटी शॉपिंग सेंटर में उपलब्ध होगी. इस सेंटर में तीन ऐसी वेंडिंग मशीनें तैयार रखी गई हैं.
इसके अलावा इस तरह की तीन और मशीन अलग-अलग दुकानों और बारों में भी लगाई गई हैं. इस अनोखी पहलकदमी को अंजाम देंगे वे 30 कलाकार जो चर्चित कलाकारों से जुड़ी 150 कलाकृतियों को दर्शकों के हिसाब से तैयार करेंगे.
बेमिसाल कलाकृतियां
कलाकृतियों का संग्रह करने वाले 'वूलगैदर' के जॉन स्लेमेंस्क कहते हैं, "बहुत दिनों से हमारी चाहत थी कि हम कुछ ऐसा करें जिससे कला ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सके."
इन छोटे छोटे आर्टवर्क्स में कई बेमिसाल कृतियां शामिल होंगी.
ये वेन्डिंग मशीन 'वूलगैदर' द्वारा लगाए जा रहे हैं. वूलगैदर की शुरुआत कुछ उन उभरते कलाकारों ने की थी जो इस शहर की कई मौलिक पहलकदमियों के पीछे रहे हैं.
इन पहलकदमियों में न्यू आर्ट अवार्ड विशेष रूप से शामिल हैं. न्यू आर्ट अवार्ड में पब्लिक वोटिंग के जरिए विजेता चुना गया था.

स्लेमेंस्क ने बताया, "केवल एक पाउंड में आप कला की कुछ बेहद दुर्लभ कृतियां अपने घर ले जा सकेंगे."
उन्होंने आगे बताया, "मैं कभी कोई कलाकृति नहीं खरीद सकूंगा’ या ‘ये कलात्मक कृति तो मेरी पहुंच से बाहर है’ जैसी बातों से अब आपको छुटकारा मिल सकेगा."
हाथों हाथ मिल जाएगा
स्लेमेंस्क को उम्मीद है कि यदि किसी व्यक्ति को सीन विलियम्स की पेंटिंग ‘लेमन’ बहुत पसंद है तो इस मंहगी और बेजोड़ रचना का नन्हा रूप उन्हें वहीं हाथों हाथ मिल जाएगा.
स्लेमेंस्क ने वेंडिंग मशीन के बारे में कुछ इन शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी, "ये नन्ही कलाकृतियां कला के प्रेमी के लिए कला के समंदर में एक डुबकी लगाने जैसा आनंद देंगी. आप इन नन्हीं डुबकियों से अपनी पसंद का पता लगा सकेंगे."
स्लेमेंस्क के अनुसार मशीन में डाला गया हर पाउंड उसको बनाने वाले कलाकार के जेब में जाएगा. इस तरह यह कोशिश लंबे समय तक चलेगी
वेंडिगं मशीन के जरिए कला की बिक्री कोई नई बात नहीं है. 1960 में, अवांत-ग्रेड फ्लक्सस मूवमेंट ने वेंडिंग मशीनों का इस्तेमाल किया था.
योको ओनो ने वेंडिंग मशीन को <link type="page"><caption> आसमान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/01/130118_sky_photo_gallery_aa.shtml" platform="highweb"/></link> के नीले टुकड़ों का प्रदर्शन करने के लिए इस्तेमाल किया था.












